रीवा : फ़र्ज़ी नियुक्ति करके घिर गये हेल्थ कमिश्नर

रीवा

रीवा। रोगी कल्याण समिति कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में हेल्थ कमिश्नर घिरते नजर आ रहे हैं। वर्ष 2013 में की गई फर्जी तरीके से 88 नियुक्तियों के बाद रोगी कल्याण समिति के नौ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भुगतान की मांग की थी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने तत्कालीन सीएमएचओ से भुगतान न करने के संबंध में जवाब मांगा था। हालांकि उच्च न्यायालय के सख्त रवैये के बाद डॉ. सुधीर जैसानी ने 21-21 हजार के दो चेक तथा 15-15 हजार के दो चेक देकर बजट न होने का हवाला दिया था।

रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों द्वारा दायर की गई अपील के बाद एक बार फिर से कर्मचारियों ने भुगतान न मिलने से भुखमरी की स्थिति का हवाला देकर उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई थी। मामले को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने सीएमएचओ डॉ. आनंद महेन्द्रा से भुगतान के संबंध में जानकारी ली, जिस पर डॉ. महेन्द्रा ने शासन द्वारा किसी भी तरह का बजट न मिलने का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया था कि हेल्थ कमिश्नर को मांग पत्र भेजा जाएगा, इसके बाद ही भुगतान संभव हो सकेगा।

डॉ. महेन्द्रा ने अपने हलफिया बयान में कोर्ट को यह बताया था कि हेल्थ कमिश्नर को 17 लाख रुपए भुगतान के संबंध में डिमांड भेजा गया है। बजट आने के बाद भुगतान किया जाएगा। काफी दिनों तक राशि न मिल पाने के बाद सख्त हुए उच्चतम न्यायालय ने हेल्थ कमिश्नर को तलब कर 19 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। इस दौरान हेल्थ कमिश्नर कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए लिहाजा इनके वकील उपस्थित होकर सफाई प्रस्तुत किए।

दिया गया समय

रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों द्वारा दायर की गई अपील के बाद भुगतान देने के लिए उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिए थे। इस दौरान बजट न होने का हवाला देकर सीएमएचओ ने हाईकोर्ट को अवगत कराया था। ऐसे में उच्चतम न्यायालय ने हेल्थ कमिश्नर को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए 25 जून की तिथि तय की थी। इस दौरान जब वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तब उच्चतम न्यायालय के जज जेके महेश्वरी ने हेल्थ कमिश्नर पल्लवी जैन, प्रिंसिंपल सेकेट्री गौरी सिंह को व्यक्तिगत रूप से 10 जुलाई को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। माना यह जा रहा है कि इस दौरान कोर्ट कोई भी बड़ा निर्णय ले सकती है। यहां पर यह बता दें कि वर्ष 2013 में की गई 88 नियुक्तियों के फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने के बाद तत्कालीन सीएमएचओ ने उसे निरस्त भी कर दिया था।