सेमरिया

रीवा: ‘राजनीति’ ने अटका दिया अंतिम संस्कार, जिपं अध्यक्ष अभय समेत 5 पर मुकदमा

रीवा

रीवा जिले के सेमरिया थाना क्षेत्र में 24 घंटों के भीतर हुई 2 मौतों की आग से पूरा क्षेत्र झुलस उठा है। रजौल कोल की संदिग्ध मौत के बाद चिरौंजीलाल कोल की मौत पर जोर-शोर से राजनीति हो रही है। बुधवार को परिजनों के आक्रोश, कांग्रेस और बसपा नेता के धरना-प्रदर्शन के कारण मृत चिरौंजीलाल कोल का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के मान मनौव्वल के बाद भी लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे।

बुधवार शाम इस पूरे घटनाक्रम में उस वक्त नया मोड़ सामने आया, जब सेमरिया थाना प्रभारी सुनील गुप्ता की शिकायत पर वरिष्ठ अधिकारियों ने सेमरिया थाने में जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रदीप सोहगौरा, लाला खान और भागीरथी शुला व मुन्ना सिंह के विरुद्ध बलवा, शासकीय कार्य में बाधा और सरकारी कर्मचारी से मारपीट करने के मामले में अपराध दर्ज किया गया है। जबकि रजौल कोल के साथ मारपीट करने वाले छोटू सिंह, अरुण सिंह निवासी डाढ़ व किशन गौतम के खिलाफ धारा 306 का अपराध दर्ज किया गया है। वहीं, मौके पर पहुंचे एसडीएम सिरमौर ने आंदोलनकारियों के सामने मामले की न्यायिक जांच कराने सहित टीआई पर लगे आरोपों की एसडीओपी से जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है।

गौरतलब है, ग्राम अकौरी निवासी रजौल कोल की मौत मामले में पुलिस जांच में सामने आया था कि घटना दिनांक की रात रजौल कोल को छोटू सिंह, अरुण सिंह निवासी डाढ़ व किशन गौतम मुर्गा खाने के लिए अपने साथ बुलाकर चिरौंजीलाल कोल के घर ले गए थे। जहां खाने पीने के बाद छोटू, अरुण और किशन द्वारा रजौल के साथ मारपीट की गई थी। मामले में चिरौंजीलाल का नाम सामने आने पर पुलिस द्वारा उसकी तलाश की जा रही थी। तभी मंगलवार सुबह 11 बजे चिरौजीलाल गांव में ही अचेत हालत में पाया गया था। परिजनों की सूचना पर सेमरिया पुलिस द्वारा युवक को संजय गांधी अस्पताल में दाखिल कराया गया था, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई।

युवक की मौत के बाद पत्नी केशकली का आरोप था कि पुलिस देर रात उसके पति को घर से थाना ले गई थी, जहां पुलिस की धमकी से उसने जहर निगल लिया। मंगलवार को दिनभर कांग्रेस और बसपा कार्यकर्ता सेमरिया पुलिस के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने की मांग करते हुए धरने पर बैठे रहे। देर शाम तक चले धरने के बाद पुलिस ने बुधवार सुबह 8 बजे पीएम कराने को कहा था, लेकिन इसके पहले ही पुलिस ने मृतक के पिता को गांव से लाकर पीएम कराकर शव को गांव पहुंचा दिया। इसके बाद सुबह 8 बजे जब पत्नी सहित भाई अस्पताल पहुंचा तो उन्हें मृतक का शव नहीं मिला। बताया गया कि पुलिस ने चोरी छिपे सूर्योदय से पहले ही शव का पीएम कराकर गांव भेज दिया।

अलग-अलग दलों के नेता धरने में शामिल

दलित परिवारों के दो अलग-अलग सदस्यों की मौत पर जोर-शोर से राजनीति हो रही है। घटना दिनांक से ही जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा परिवारीजनों के हमदर्द बने रहे और पुलिस-प्रशासन का विरोध करते रहे। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और दलित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए बसपा के पूर्व विधायक रामगरीब बनवासी, बसपा के पूर्व सांसद देवराज सिंह पटेल, शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत सिंह मंगू, प्रदीप सोहगौरा, कुंवर सिंह सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता बुधवार को सेमरिया पहुंचकर धरने में शामिल हुए।

युवक की मौत का सूत्रधार था चिरौंजी

फांसी पर लटकते मिले रजौल के पास से जो शिकायती पत्र मिला था, उसमें उसने स्पष्ट लिखा था कि घटना दिनांक की रात उसे छोटू सिंह, अरुण सिंह व किशन गौतम मुर्गा खिलाने के लिए चिरौंजीलाल कोल के घर ले गए थे। चिरौंजी के घर में मुर्गा खाने के बाद उसके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया था। इस तरह पूरे मामले में चिरौंजी घटना का सूत्रधार था। पुलिस चिरौंजी की तलाश कर रही थी। परिजनों से धोखा, चोरी छिपे पीएम कराने का आरोप : मृत चिरौंजीलाल की मौत के बाद पुलिस द्वारा परिजनों को धोखा दिया गया।

बताया गया कि मंगलवार रात पुलिस ने शव का पीएम सुबह 8 बजे कराने को कहा था। इस पर शव को मर्चुरी में रखकर मृतक की पत्नी, बच्चे व परिवार के अन्य सदस्यों को पूर्व विधायक अपने घर ले गए थे। सुबह जब मृतक की पत्नी व बच्चे अस्पताल पहुंचे तो पुलिस द्वारा शव का पीएम करा गांव पहुंचा दिया गया था। बताया गया कि पुलिस मृतक के पिता को जबरदस्ती गांव से उठाकर ले आई और पिता की मौजूदगी में पीएम कराकर शव को पत्नी के पहुंचने से पहले ही गांव पहुंचा दिया गया। पुलिस के इस कृत्य से परिजनों में आक्रोश व्याप्त रहा।

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