मलवे के ढेर से निकला ज़िंदा युवक, देखकर मच गई भगदड़

जबलपुर

जबलपुर। जाको राखे साइयां मार सके ना कोय… यह कहावत एक बार फिर तब चरितार्थ हुई जब मलबे के ढेर के नीचे से एक जिंदा युवक कांखते हुए बाहर आया। दरअसल नगर निगम के वाहन ने इस सोते हुए युवक के ऊपर पूरा मलबा और कचरा डंप कर दिया था। वह रात भर इसी के नीचे ही दबा रहा। सुबह जब आवारा कुत्तों ने कचरे के ढेर के आसपास लगातार भोंकना शुरू किया तो लोगों को संदेह हुआ। संदेह को मिटाने के लिए लोगों ने आनन-फानन में नगर निगम की जेसीबी मशीन मंगाकर कचरा हटाया गया तो उसमें से एक जिंदा युवक निकला। युवक को देखकर लोग हैरान रह गए। मलबे के ढेर के नीचे से जिंदा निकले युवक का नाम अमर मेश्राम बताया गया है। वह मैहर का रहने वाला है।

आवारा स्वानों दिया संकेत
नगर निगम अमले की लापरवाही शहर में मजदूरी करने आए 24 वर्षीय अमर मेश्राम की जिंदगी पर भारी पड़ जाती, लेकिन आवारा कुत्तों की वजह से उसकी जान बच गई। नौदराब्रिज मंदिर के पास मलबे में गले तक दबे मजदूर को देखकर कुत्ते लगातार भौंक रहे थे। इस बीच कुछ लोगों की नजर भोंक रहे कुत्तों पर पड़ी। लोगों ने गाड़ी मंगाकर कचरा हटवाया और जो कुछ उन्हें दिखा वह उसे देखकर हैरान रह गए। कचरे के नीचे एक युवक दबा हुआ था। लोगों ने उसको बाहर निकाला और उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। विक्टोरिया अस्पताल से मंगलवार को उसको छुट्टी भी दे दी गई।

पुलिस कर्मी की भूमिका
बताया गया है कि कुत्तों को लगातार भोंकते हुए देखकर सबसे पहले आरक्षक प्रमोद कुमार सोनी को संदेह हुआ। वह वहां तांक-झांक करने लगे। इस बीच काफी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। भीड़ लग गई। प्रमोद के इशारे पर लोगों ने कचरा हटाने में मदद की। जेसीबी मशीन भी मंगवाई गई। यूं कहें कि प्रमोद की पहल पर ही उसे कचरे और मलबे के ढेर के नीचे से निकाला गया। आरक्षक प्रमोद कुमार सोनी को एएसपी दीपक शुक्ला ने इस नेक कार्य के लिए एसपी कार्यालय में सम्मानित भी किया।

मजदूरी करता है अमर
मैहर निवासी अमर मेश्राम शहर में मजदूरी करने आया था। दिन भर मजदूरी करने के बाद वह नौदराब्रिज स्थित हनुमान मंदिर के बगल में सो जाता था। मंदिर के बगल में ही निगम का खाली प्लॉट है, जहां मिट्टी सहित आसपास का मलबा डाला जाता है। रविवार रात अमर मजदूरी कर होटल में खाना खाया और मिट्टी के ढेर पर साड़ी ओढकऱ सो गया। अमर ने बताया, इसके बाद उसे होश नहीं कि क्या हुआ। सुबह करीब सवा आठ बजे कुछ लोगों की नजर भोंकते हुए कुत्तों पर पड़ी। आरक्षक प्रमोद भी वहां आ गए। मलबे को हटाया तो वहां अमर का चेहरा नजर आया। लोगों ने उसके चेहरे पर पानी का छींटा मारकर जगाया तो वह असहाय सा कुछ बुदबुदाया। लोगों ने बिना देर किए वहां का मलबा हटवाया और उसे बाहर निकाला। उसके कपड़े मिट्टी से सने हुए थे। अमर ने सीने में हल्के दर्द की शिकायत की तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अमर के सकुशल बाहर आते ही लोगों ने उसे बताया कि वह मिट्टी के नीचे दबा हुआ था। यह जानकर वह सहम गया। मंदिर के आसपास मौजूद भिक्षुक राम दीन व कौशल्या बाई ने बताया कि सुबह 4 बजे निगम का डम्पर यहां मलबा डालने के लिए आया था। उसी ने अमर के ऊपर पूरा मलबा गिरा दिया और यहां से चला गया।