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जबलपुर मध्यप्रदेश सतना

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दसवीं बोर्ड परीक्षा की अंकसूची यदि उपलब्ध है तो आयु का निर्धारण उसी के आधार पर किया जाएगा। जस्टिस अतुल श्रीधरन की सिंगल बेंच ने अपहरण व दुष्कर्म की शिकार नाबालिग किशोरी द्वारा इसके लिए की गई ओसीफिकेशन (अस्थि परीक्षण) की मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने किशोरी को उसके माता-पिता के सुपुर्द करने के निर्देश दे दिए।

दसवीं की मार्कशीट सही, अस्थि परीक्षण की जरूरत नहीं
हाईकोर्ट ने कहा-जो भी करना हो बालिग होकर करना
नाबालिग को भेजा माता-पिता के साथ, सतना जिले का मामला

सतना जिले के नागौद निवासी व्यापारी ने यह याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि उसकी 17 वर्षीय बहन को अस्पताल चौक के समीप रहने वाले पेशे से ड्राइवर मोहम्मद नईम खान ने 5 मार्च 2018 को अगवा कर लिया। मोहम्मद कलीम खान ने इसमें नईम का साथ दिया। तभी से उसका कोई पता नहीं है। पुलिस को शिकायत की गई, लेकिन पुलिस ने प्रकरण दर्ज करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता की ओर से आशंका जताई गई कि किशोरी को आरोपित या तो मार डालेंगे या उससे कोई अवांछनीय कृत्य कि या जा सकता है। गत 28 मई को कोर्ट ने सतना एसपी को नोटिस जारी कर लापता किशोरी को खोजने के निर्देश दिए थे।

किशोरी को कोर्ट में पेश किया
मंगलवार को नागौद थाना पुलिस ने किशोरी को पेश कर कोर्ट को बताया कि अपहरणकर्ता युवक पर भादंवि व पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं किशोरी ने कहा कि उसने नईम से शादी कर ली है। अब वह उसी के साथ रहना चाहती है। जब कोर्ट ने उसकी आयु का हवाला दिया जो किशोरी ने ओसीफिकेशन टेस्ट की मांग कर डाली। कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अंकसूची के अनुसार किशोरी 25 जनवरी 2019 को 18 साल की हो जाएगी। तब उसकी जो इच्छा हो, वह कर सकती है।