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सलाम है एमपी के ऐसे कोरोना वारियर को / कोरोना काल में दोहरी भूमिका निभा रहें ये SP, फील्ड पर 'पुलिस' तो अस्पताल में बन जाते हैं 'डॉक्टर'

RewaRiyasat.Com
रीवा रियासत डिजिटल
01 May 2021

एमपी के इंदौर जिले में एक ऐसे पुलिस अफसर भी हैं जो कोरोना काल में दोहरी भूमिका निभा रहें हैं और लोगों के लिए मिसाल बन रहें हैं. फील्ड में वे पुलिस होते हैं, तो अस्पताल में डॉक्टर बन जाते हैं और संक्रमितों का इलाज करते हैं. 

हम बात कर रहें हैं इंदौर के विशेष शाखा (एसबी) के SP राजेश सहाय की. राजेश सहाय कोरोना काल में दोहरी भूमिका निभा रहें हैं. वे अपने पुलिस दायित्वों का बाखूबी निर्वहन करते हैं. उसके ठीक बाद वो अस्पताल पहुंचकर कोरोना संक्रमित पुलिसकर्मियों के इलाज में जुट जाते हैं. राजेश सहाय एक ऐसे कोरोना वारियर बन गए हैं, जो लगातार मिसाल पेश कर रहें हैं. 

जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो इंदौर के सैकड़ों पुलिसकर्मी संक्रमित हो गए. इसलिए पुलिस लाइन में 48 घंटे में कोविड अस्पताल की शुरुआत की गई. राजेश सहाय अपनी ड्यूटी के बाद यहां पर संक्रमित पुलिसकर्मियों का इलाज भी करने लगे.

SP राजेश की पत्नी राखी सहाय पीएससी कार्यालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर हैं. उन्हें केरल में चुनाव के चलते ऑब्जर्वर की ड्यूटी के लिए भेजा गया है. इसी बीच उनका 14 वर्षीय बेटा रुद्राक्ष 4 दिन पहले ही पॉजिटिव हो गया. घर पर राजेश ही बेटे की देखरेख भी कर रहे हैं.

MBBS और MD डिग्रीधारक हैं राजेश सहाय 

इंदौर DIG मनीष कपूरिया के मुताबिक राजेश सहाय ने MBBS और MD (एनेस्थीसिया) की डिग्री ली है. पुलिस विभाग में भर्ती होने के पहले वे एक बड़े अस्पताल में आइसीयू प्रभारी थे. पुलिस लाइन स्थित जिस कोविड-19 अस्पताल को हाल में शुरू किया गया है, उसे राजेश सहाय की देखरेख में ही तैयार किया गया है. इससे बड़ा उदाहरण कहां मिलेगा कि उनका 14 वर्षीय बेटा रुद्राक्ष भी कोरोना संक्रमित है, लेकिन वे रोजाना आकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं.

एसपी राजेश सहाय कहते हैं कि पुलिस विभाग भी मेरा परिवार है. यह मेरा सौभाग्य है कि इस कठिन समय में मुझे देशसेवा के साथ रोगियों की सेवा का अवसर भी मिल रहा है. लोग डरे हुए हैं, उन्हें इलाज और अपनेपन की जरूरत है. हमारे प्रयासों से लोगों की जान बच सके इससे बेहतर और क्या हो सकता है.

राजेश सहाय सुबह 11 बजे अस्पताल पहुंच जाते हैं और संक्रमित मरीजों का उपचार शुरू कर देते हैं. अस्पताल में ASP पीपीई किट, फेस शील्ड, स्टेथोस्कोप के साथ वे एक पेशेवर डॉक्टर बन जाते हैं. एसपी को देख सैल्यूट करने वाले सिपाही भी उनसे डॉक्टर की हैसियत से दर्द साझा करते हैं.

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