पीएम आवास योजना

खाते में आए 1 लाख रूपए, जांच हुई तो सामने आया पीएम आवास का महाघोटाला

Madhya Pradesh

रतलाम। पीएम आवास योजना में एक महाघोटाला सामने आया है, जिस हितग्राही के नाम से राशि जारी हुई, उसे पता ही नहीं कि उसके खाते में पैसा क्यों आया है। जब उसने शिकायत की तो बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। दरअसल, कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा अनुमोदित 320 पात्र हितग्राहियों की सूची में 13 पात्र हितग्राहियों के नाम पर अन्य नाम जोड़कर यह खेल हुआ था। यही नहीं उनके बैंक खाते लिंक भी कर दिए गए। मामले का खुलासे पर जब नगर निगम में हड़कंप मचा तो किसी अज्ञात व्यक्ति के जरिए निगम प्रशासन के पास एक लाख रुपए की डीडी भी पहुंचा दी गई। अब सभी 1483 हितग्राहियों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

जान लें कि इनमें से 1479 को भुगतान भी हो चुका है। स्थानीय निवासी ममता पति राजेंद्र श्रीवास्तव के बैंक खाते में नगर निगम की ओर से दो बार 50-50 हजार रुपए जमा हुए, लेकिन उन्हें पता ही नहीं था कि यह राशि किसलिए जारी की गई है। ममता सोमवार को इस मामले की शिकायत करने नगर निगम पहुंची। उन्होंने बताया कि उनके दामाद जितेंद्र उर्फ गोलू पिता राजेंद्र सोलंकी निवासी गुजराती की चाल ने उनसे बैंक पासबुक, आधारकार्ड, एटीएम कार्ड और पिन नंबर सहित पेनकार्ड यह कहकर लिया था कि उसके लोन के कुछ पैसे आने वाले हैं। पेनकार्ड नहीं होने से उसके बैंक खाते में रुपए नहीं आ सकेंगे।



ममता का कहना है कि दामाद की बातों में आकर उन्होंने और पति राजेंद्र श्रीवास्तव ने उक्त दस्तावेज उसे सौप दिए। अब तक की जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि दरअसल यह पूरा खेल जितेंद्र सोलंकी ने किसी जाकिर हुसैन पिता घम्मन खां निवासी पीएनटी कॉलोनी के मार्फत खेला। उसके कहने पर ही प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यालय में कार्यरत दीपक कुमावत ने सूची में ममता पति राजेंद्र श्रीवास्तव का खाता नंबर दर्शाकर दो अलग-अलग तारीखों में 50-50 हजार रुपए यानी कुल एक लाख रुपए जमा करवा दिए। सोलंकी को जब लगा कि ममता और राजेंद्र से उसे पैसा वापस नहीं मिल सकेगा तो उसने बैंक के एक सुरक्षाकर्मी पिंटू उर्फ आकाश जॉन निवासी न्यू रेलवे कॉलोनी रोड नंबर पांच के खाते में रुपया ट्रांसफर कर दिया।

ममता के पति राजेंद्र श्रीवास्तव के बैंक में संपर्क करने पर उन्हें शंका हुई तब श्रीवास्तव दंपती ने शिकायत की। निगम प्रशासन की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि कलेक्टर से अनुमोदित हितग्राहियों की सूची में दो पेज बदले गए हैं। इसके बाद जांच प्रतिवेदन कलेक्टर रुचिका चौहान को भेजा गया है। अब सभी योजना के सभी 1483 हितग्राहियों की जांच शुरू की गई है।

किसी एजेंसी ने सत्यापन नहीं किया –

पीएम आवास योजना में एक किश्त जारी होने के बाद अगली किश्त से पहले मौके पर जाकर सत्यापन किया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट ओके होने पर ही दूसरी किश्त जारी होती है। पात्रों के नाम बदलने व राशि करने के घोटाले में किसी भी एजेंसी ने सत्यापन की जरूरत नहीं समझी। योजना में तय एजेंसियों ने लापरवाही बरती तो नगर निगम के जिम्मेदार भी आंखे मूंद कर राशि जारी करते रहे। यदि शिकायत नहीं होती तो यह फर्जीवाड़ा जारी रहता और कई पात्र लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता। जांच को लेकर निगम ने अपने स्तर पर प्रतिवेदन सौंपा है लेकिन कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी निगमायुक्त एसके सिंह सहित अन्य को नोटिस जारी किए हैं।

शिकायतकर्ता ममता श्रीवास्तव के एसबीआई के बैंक खाते में 26 मई व 5 जून को 50-50 हजार रुपए की राशि नगर निगम की ओर से जमा हुई। इस राशि को एटीएम के जरिए निकाल भी लिया गया। इधर राजेंद्र व ममता का दामाद जितेंद्र उर्फ गोलू पिता राजेंद्र सोलंकी से कुछ विवाद हुआ तो राशि अटकने के डर से दलाल जाकिर हुसैन राजेंद्र के घर पहुंच गया और उनके खाते में डली राशि को कालाधन बताते हुए वापस देने की मांग की। इसके बाद उन्होंने शिकायत का मन बनाया। कलेक्टर द्वारा अनुमोदित मूल सूची में फेरबदल का खेल सर्वे सहित मॉनीटरिंग एजेंसी के कर्मचारियों सहित दलालों की सांठगांठ होना पाया।

कुल तीन सूची में अभी अंतिम सूची की जांच में 13 अपात्र याने फर्जी लोगों के नाम सामने आने के बाद पूरी संभावना है कि पहली व दूसरी सूची में शामिल शेष 1159 नामों पर भी बैंकों में फर्जी भुगतान हुआ है। ऐहतियात बतौर नगर निगम प्रशासन ने अब तक हुई जांच का प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर रूचिका चौहान को भेज दिया। केंद्र की इस योजना में चयनित 1483 में से 1479 पात्र पाए गए हैं। इसमें से 1389 हितग्राहियों के खातों में 50-50 हजार की पांच किश्तों के मान से करीब 22 करोड़ रुपए जमा कराए गए हैं। अब सभी की जांच होगी।

विधायक-कलेक्टर को भी दी जानकारी –

मामले में ममता की ओर से विधायक चैतन्य काश्यप के पीए मणीलाल जैन सहित कलेक्टर रुचिका चौहान को भी शिकायत देकर पूरे मामले की जानकारी सोमवार को दी। यहां कार्रवाई को लेकर धीमी चाल दिखने पर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय व मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी। इधर निगम की तृतीय सूची के 320 हितग्राहियों में अभी 13 फर्जी नाम सामने आए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि पहली व दूसरी सूची के 1159 हितग्राहियों के नाम पर भी फर्जीवाड़ा कर राशि जारी की गई है। अज्ञात व्यक्ति दे गया 1 लाख का डीडी – मामले का खुलासा होने के बाद अब फर्जी नाम से आवंटित हुई राशि को लेकर फर्जी बैंक धारकों में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच शुरू होने पर एक अज्ञात व्यक्ति नगर निगम में चपरासी को नगर निगम आयुक्त के नाम एक लाख रुपए का डिमांड ड्रॉफ्ट सौंपकर रफूचक्कर हो गया। इस डिमांड ड्रॉफ्ट के आधार पर निगम प्रशासन यह पड़ताल में जुटी है कि कौन व्यक्ति यह डिमांड ड्रॉफ्ट देकर गया है।



किस एजेंसी की क्या जिम्मेदारी –

सैडमेप –

शासन के इस उपक्रम को वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना में जमीनी सर्वे की जिम्मेदारी सौंप रखी है। सर्वे पश्चात रिपोर्ट तैयार कर सूची बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी इसी विभाग की है। यह काम यहां पदस्थ विजय चौरे को करना था। उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया।

एजीस इंडिया एजेंसी –

शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना में मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी इसी एजेंसी के मार्फत पूरे देश में हो रही है। इस एजेंसी के अधिकारी-कर्मचारी सैडमेप द्वारा तैयार सर्वे सूची का सत्यापन पश्चात जरूरतमंदों के आधारकार्ड, बैंक पास बुक सहित अन्य दस्तावेज एकत्र करने के अलावा जरूरतमंदों को पैसा आवंटन में मुख्य भूमिका निभाती है।

नगर निगम –

प्रधानमंत्री आवास योजना की मुख्य एजेंसी नगर निगम को शासन ने बनाया है। दोनों एजेंसी सैडमेप व एजीस इंडिया एजेंसी द्वारा किए जाने वाले कार्यों की रिपोर्टिंग लेने सहित पात्रों को राशि आवंटन का काम संबंधित एजेंसी द्वारा दिए गए पात्रों की सूची को करना रहता है। कार्यों का अवलोकन व मॉनीटरिंग करने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा –

संबंधित एजेंसियों के कर्मचारियों की मिलीभगत कुछ दलालों के मार्फत सांठगांठ प्रारंभिक रूप से उजागर हुई है। नियमानुसार पट्टेधारियों को मकान निर्माण के लिए निगम से तैयार सूची का अंतिम अनुमोदन कलेक्टर द्वारा किया जाता है। कलेक्टर द्वारा अनुमोदित मूल सूची की एक प्रति नगर निगम के रिकॉर्ड में रहती है, जबकि दूसरी मूल सूची सैडमैप व एजीस कंपनी को संयुक्त रूप से सौंपी जाती है। अंतिम रूप से अनुमोदन पश्चात पात्रों को नगर निगम द्वारा सूचित किया जाता है कि वह अपने पट्टे पर पक्का मकान निर्माण के लिए पात्र हो चुके हैं, वे बैंक खाता नंबर सहित अन्य दस्तावेज सैडमेप व एजीस कंपनी के संयुक्त कार्यालय राजीव गांधी सिविक सेंटर पर जमा कराएं, ताकि नियमानुसार राशि बैंक खाते में जमा कराई जा सके।

संबंधित एजेंसी व दलालों के मार्फत मूल सूची जो उनके पास रहती है उसमें बीच के पन्नाों में पात्रों के नाम क्रमांक अनुसार हटाकर नया पेज तैयार किया गया और मूल सूची में बीच में जोड़ राशि आवंटन के लिए निगम प्रशासन को सौंप दी। हस्ताक्षरयुक्त मूल सूची को देख निगम प्रशासन ने संबंधित दर्शाए गए बैंक खातों में राशि आवंटित कर दी।

एक नजर पूरी योजना पर –

1483 पट्टेधारी प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान निर्माण के लिए चयनित ।

1479 पात्र हितग्राहियों को पांच चरणों में 50-50 हजार राशि मिलना शुरू ।

3 बस्तियों ईश्वरनगर, बजरंगनगर एवं विरियाखेड़ी में हुआ सर्वे।

320 पात्रों की अंतिम सूची में 13 फर्जी बैंक खातों में राशि जमा 22 करोड़ रुपए से अधिक राशि योजना अनुसार की जा चुकी आवंटित।

बैंक खाता पहले ही किया जा चुका था लॉक –

बुधवार को एसबीआई में ममता अपने पति राजेंद्र के साथ बैंक में खाता सीज कराने पहुंची तो पता चला कि खाता पहले ही सीज कराया जा चुका है। इस संबंध में बैक से कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिल सका।

प्रशासन की जांच में भी बनाया जा रहा है दबाव –

इससे पहले प्रधानमंत्री आवास योजना व पट्टे को लेकर नगर निगम की सूची पर एसडीएम द्वारा गठित राजस्व टीम ने आपत्ति जताई थी। इसमें कई अपात्रों को भी पात्र बताया गया। बताया जाता है कि जनप्रतिनिधि स्तर पर भी इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि हितग्राहियों की संख्या ज्यादा से ज्यादा रखी जाए। इधर तय मानक नहीं होने से राजस्व अमला इस पर सहमत नहीं है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में अब ऐसे घोटाले सामने आ रहे हैं।



‘घर पर कोई आए तो नाम ममता बताना” –

ममता श्रीवास्तव के खाते में जो राशि जमा हुई थी वह पात्र बजरंगनगर निवासी मधु पति कालू के नाम को हटाकर की गई। शिकायत सामने आने पर जांच के दौरान मधु ने बताया कि योजना अंतर्गत पूर्व में उसकी दूसरी किश्त खाते में जमा हो चुकी थी। पति कालू घर से विवाद कर कहीं चला गया। मधु का पति कालू के साथ संयुक्त बैंक खाता है। जब मधु ने यह पूरी बात कर्मचारी दीपक कुमावत को बताई तो उसने इसका फायदा उठाते हुए मधु को बोला कि जब बजरंगनगर स्थित घर पर कोई जांच करने आए तो उन्हें अपना नाम ममता पति राजेंद्र श्रीवास्तव बताना तो मैं तुम्हारे खाते में निर्माण की शेष राशि बैंक खाते में जमा करवा दूंगा। इस तरह मधु पति कालू की जगह ममता पति राजेंद्र श्रीवास्तव के बैंक खाते में मकान निर्माण की राशि जमा कर षड़यंत्र रचा गया।

निगमायुक्त सहित अन्य को नोटिस जारी किए हैं। जल्द से जल्द जांच पूरी कर कार्रवाई करेंगे।

– रुचिका चौहान, कलेक्टर

हमें डायरेक्टर स्तर पर कार्यों की मॉनीटरिंग के लिए नियुक्त किया गया है। दीपक कुमावत सैडमेप का कर्मचारी है। मॉनीटिरंग करने का पूरा काम नगर निगम का है। नगर निगम अगर समय पर देखती तो फर्जीवाड़ा नहीं होता। – राजकुमार सिंह, असिस्टेंट रेसीडेंस इंजीनियर, मॉनीटरिंग एजेंसी, एजीस

प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत पात्र तेरह पट्टेधारियों के मकान निर्माण की राशि फर्जी बैंक खातों में जमा होने की प्रारंभिक रूप से जानकारी सामने आई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -एसके सिंह, कमिश्नर, नगर निगम रतलाम



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