मुख्यमंत्री की दौड़ में सिंधिया निकले आगे शिवराज को छोड़ा पीछे… वोट देख हटाया पेज से सर्वे1 min read

Madhya Pradesh

भोपाल. भाजपा के फेसबुक पेज पर अगले मुख्यमंत्री के लिए कराए गए सर्वे में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आगे निकल गए। सिंधिया के समर्थन में तेजी से वोट होते देख सर्वे अचानक पेज से हटा दिया गया। हालांकि, भाजपा आइटी सेल का कहना है कि यह पार्टी का अधिकारिक पेज नहीं है।

‘बीजेपी एमपी मिशन 2018 सीएम’ फेसबुक पेज पर 31 अगस्त से सर्वे शुरू हुआ। इसका विषय था, अगला मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए। इस पोस्ट को 736 से अधिक लोगों ने पसंद किया, जबकि 12 हजार से अधिक ने वोट किए। इसमें शिवराज को 49.9 फीसदी और सिंधिया को 50.1 फीसदी लोगों ने पसंद किया।

जैसे ही सिंधिया के समर्थकों का आंकड़ा 50 पार हुआ, वैसे ही सर्वे को पेज से हटा दिया गया। यह पेज 17 जून 2017 को आइ सपोर्ट सीएम शिवराज के नाम से बनाया गया था। बाद में 11 अगस्त 2018 को इस पेज का नाम ‘बीजेपी एमपी मिशन 2018 सीएम’ कर दिया गया था।

ये भाजपा आइटी सेल का पेज नहीं है। हो सकता है किसी समर्थक ने पेज बनाया हो। हमारा पेज बीजेपी फॉर एमपी है। हमने कोई सर्वे नहीं कराया।
शिवराज सिंह डाबी, संयोजक, प्रदेश भाजपा आइटी सेल

आठ और नौ सितंबर को दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी

इधर, भाजपा की आठ और नौ सितंबर को हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष अलग-अलग प्रेजेंटेशन देंगे। आलाकमान ने हाल ही में हुए भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में चुनावी राज्यों को सरकार और संगठन में खाली पदों पर कार्यकर्ता तैनात करने को कहा था। साथ ही कार्यकर्ताओं के असंतोष को खत्म करने की हिदायत दी थी। अब दोनों की रिपोर्ट मांगी जाएगी।

कार्यकारिणी में चुनावी राज्यों का विशेष सत्र होगा। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनावी सर्वेक्षण कराया है। इसके नतीजों के आधार पर दोनों राज्यों उनका आकलन मांगा है। राज्य के मुद्दों को लेकर प्रदेश इकाई की तैयारियों के बारे में पूछा जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा को निर्देश दिया गया है कि विपक्ष के आरोपों की काट तथ्यों के आधार पर निकाले। दलित और सवर्ण आंदोलन को लेकर जनता को यह समझाए कि कुछ राजनीतिक दल अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए इसे समर्थन दे रहे हैं। उनके बहकावे में नहीं आएं।

कल्याणकारी योजनाओं पर जोर
दोनों राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए कार्यों का ब्योरा भी आलाकमान के सामने पेश करेंगे। केंद्रीय संगठन ने दोनों राज्यों से केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का महत्व बताने के लिए बड़ी संख्या कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा था। साथ ही नाराज कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद करने की सख्त हिदायत दी थी। दोनों राज्यों को इसकी रिपोर्ट भी पेश करना है।

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