खेवनहार ने पलटाई नाव, डूब गई सत्ता, मध्यप्रदेश की सियासत के लिये उथल-पुथल वाला रहा वर्ष 2020..

खेवनहार ने पलटाई नाव, डूब गई सत्ता, मध्यप्रदेश की सियासत के लिये उथल-पुथल वाला रहा वर्ष 2020..

भोपाल मध्यप्रदेश

खेवनहार ने पलटाई नाव, डूब गई सत्ता, मध्यप्रदेश की सियासत के लिये उथल-पुथल वाला रहा वर्ष 2020..

भोपाल । मध्यप्रदेश की सियासत के लिये वर्ष 2020 बेहद उथल-पुथल वाला रहा है। प्रदेश की सियासत में एक वाकया ऐसा भी आया जब एक बेहद विश्वासपात्र नाविक जिस पर सैकड़ों की संख्या में सवार लोगों को सागर पार कराने का जिम्मा था, उसी खेवनहार ने ही नाव पलटा दी और सभी डूब गये। सभी के सपने धरे के धरे रह गये।

आपको बतों दे कि 15 वर्ष वनवास काटने के बाद मुश्किल से कांग्रेस सत्ता में लौट पाई थी और 15 महीने सरकार चलाने के बाद 2020 में चली गई। एक ऐतिहासिक उलटफेर हुआ जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हो गये और भाजपा फिर सत्ता में आ गई।

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इस उथल-पुथल में कई नेताओं के भविष्य संवर गये लेकिन कइयों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अब 2020 बीत चुका है और 2021 की शुरूआत हो चुकी है, नेताओं को नये साल में बड़ी उम्मीद है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता जो 15 साल के भाजपा शासन काल में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं उन्हें सरकार में जगह नहीं मिल पाई है। वह आज भी जमीन की तलाश में जुटे हैं। वहीं अमरपाटन विधायक रामखेलावन पटेल को मंत्री बना दिया गया जो लोगों के गले नहीं उतर रहा।

जब चली गई कांग्रेस की सत्ता

लंबे इंतजार के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस के लिए साल 2020 धोखेबाज साबित हुआ। नेताओं ने माना था कि अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस का राज चलेगा लेकिन ऐसी आंधी चली की सबकुछ धराशायी हो गया है। महीनों विधायकों की लुका छिपी का खेल चलता रहा। दोनों मुख्य पार्टियों के बीच बचाने और गिराने का खेल चलता रहा। अंततः कांग्रेस को सत्ता छोड़नी पड़ी और भाजपा ने चैथी बार सत्ता संभाल ली। लेकिन सत्ता में उथल-पुथल का खेल पूरे साल चलता रहा। अब वर्ष 2020 बीत चुका, नये साल से उम्मीदों का दौर शुरू हो चुका है।

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