मध्यप्रदेश : बंद को लेकर सपाक्स का बड़ा बयान1 min read

Madhya Pradesh

भोपालः एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर मध्य प्रदेश में एससीएसटी वर्ग ने बंद का आह्वान किया है। आंदोलन को समर्थन देते हुए सपाक्स समाज संस्था (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था) ने भी इस बात को साफ कर दिया है कि, जब तक एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन नहीं किया जाएगा तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हालांकि, संस्था ने यह भी कहा कि, 6 सितंबर को होने वाले बंद को उनका समर्थन रहेगा। साथ ही, संस्था की तरफ से यह भी कहा गया है कि, बंद के लिए सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में तय किया जाएगा कि, व्यापारी संगठनों से समन्वय बनाकर बंद को सफल बनाएं, ताकि सरकार तक हमारी बात पहुंच सके। हालांकि, उन्होंने इस बात को साफ कर दिया कि, बंद के लिए किसी तरह की कोई जोर-जबरदस्ती नहीं की जाएगी, इसे स्वेच्छा से सफल बनाने की अपील की जा रही है।

अब झंडे के तले किया जाएगा आंदोलन

इसके अलावा संस्था अपना एक झंडा भी बना लिया है, जिसे काला और सफेद रंग दिया गया है। संस्था का कहना है कि, आगामी दिनो में संस्था की तरफ से कोई भी आंदोलन किया जाएगा तो इसी झंडे के तले किया जाएगा। संस्था के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने गुरुवार के बंद को देखते हुए सपाक्स की विभिन्न इकाईयों के लिए स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि, इस बात को खासतौर पर समझना होगा कि, संस्था ने बंद का आव्हान नहीं किया, बल्कि उसने बंद को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा है कि व्यापारी संगठनों के साथ बैठक कर बंद को लेकर समर्थन लें। वहीं माइक की अनुमति लेकर शहरी क्षेत्र के लोगों से अपील करें। साथ ही लोगों को एट्रोसिटी एक्ट में हुए संशोधन और उसके प्रभाव के बारे में बताएं। ताकि वह अपनी स्वेच्छा से आंदोलन में जुड़कर बंद को सफल बनाएं।

लोगों को समझाइश की अपील

इसके अलावा उन्होंने सपाक्स के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि, वह अपने अपने जिलों के कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे। जिसमें एट्रोसिटी एक्ट संशोधन 2016 और 2018 को वापस लेने की मांग हो। इसके अलावा प्रदेश के ग्वालियर में सपाक्स द्वारा एक्ट में संशोधन के लिए खासा विरोध देखा जा रहा है। सपाक्स संगठन ने विरोधस्वरूप महापौर विवेक शेजवलकर को चूड़ियां और श्रृंगार सामग्री भेंट की। इसके साथ ग्वालियर पहुंचे भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे को भी आंदोलनकारियों ने काले झंडे दिखाए।

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