मध्यप्रदेश में फिर नही खुलेगी स्कूलें, आदेश फिर टला, पढ़िए पूरी खबर

MP: स्कूल का मुंह नहीं देखे और फीस की डिमाण्ड शुरू, पढ़िए पूरी खबर

मध्यप्रदेश रीवा

MP: स्कूल का मुंह नहीं देखे और फीस की डिमाण्ड शुरू, पढ़िए पूरी खबर

MP/भोपाल। कोरोना वायरस के चलते प्रभावित हुई शिक्षण व्यवस्था के लिए ऑनलाइन के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था की गई है लेकिन उन गरीब बच्चों का क्या होगा जिनके पास मोबाइल अथवा इंटरनेट की सुविधा नहीं है। जबकि स्कूल संचालकों द्वारा फीस की डिमाण्ड शुरू कर दी गई है।

कोरोना संक्रमण के शिक्षा, उद्योग, व्यापार सबकुछ प्रभावित हुआ है। परंतु इसका प्रभाव शिक्षण व्यवस्था पर काफी अधिक पड़ा स्कूल-कॉलेज बंद हो गये जिससे पठन-पाठन पूरी तरह ठप सा हो गया। बच्चों की पढ़ने-लिखने की अभिरुचि प्रभावित हुई।

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स्कूल जाने को बच्चे तैयार नहीं हो रहे। लगभग चार महीने का शिक्षण सत्र बीतने के बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। इन सबके बावजूद पैसे के भूखे स्कूल संचालकों द्वारा लगातार फीस की डिमाण्ड की जा रही है। हर नोटिस जारी कर फीस जमा करने की पेशकश की जा रही है।

बीमारी के कारण लोगों के रोजगार-धंधे बंद हो गये, ऐसे में स्कूलों की फीस भरना मुश्किल हो गया है। स्कूल संचालकों घर बैठे स्कूल संचालन के लिए फीस की जरूरत है लेकिन जिसके सामने बेरोजगारी का संकट वह फीस कैसे भर पाएगा।

मोबाइल पर कोर्स वर्क का दिखावा

सरकार की गाइड लाइन के अनुसार स्कूल संचालकों द्वारा ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था शुरू की है। जिन बच्चों अभिभावकों के पास मोबाइल उपलब्ध है उनके मोबाइल में तो कोर्स भेजा जा रहा है लेकिन उस विषय वस्तु बच्चे मोबाइल के माध्यम से कितना समझ रहे हैं इससे कोई लेना देना नहीं है।

यह तो सिर्फ फीस जमा कराने का एक फण्डा साबित रहा है। लेकिन जिन बच्चों के पास मोबाइल सुविधा नहीं है उनकी पढ़ाई कैसे होगी, इसकी चिंता किसी को नहीं है।

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ऑनलाइन पढ़ाई का कितना असर

ऑनलाइन से पढ़ाई कराने वाले शिक्षकों से यह जानकारी ली जानी चाहिए कि जिन बच्चों को उनके द्वारा ऑनलाइन कोर्स वर्क दिया जा रहा है उसको बच्चों पर कितना असर हुआ है। वह कुछ विषय वस्तु समझ पाये अथवा नहीं। यदि बच्चे ऑनलाइन के माध्यम से थोड़ा भी विषय के संबंध में ज्ञान अर्जित कर रहे हैं तो ठीक है अन्यथा ऑनलाइन प्रश्न-उत्तर लिखकर भेजने का कोई मतलब नहीं है।

ऑनलाइन पढ़ाई सोची-समझी रणनीति

ऑनलाइन पढ़ाई फीस लेने की एक सोची समझी रणनीति है। यही कारण है कि आये दिन अभिभावकों को नोटिस जारी होने लगी है। स्कूल संचालकों को सिर्फ अपनी व्यवस्था की चिंता है, उन्हें बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अथवा उनकी समस्या कोई लेना देना नहीं है। स्कूल संचालकों एवं सरकार को अभिभावकों की समस्या पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

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बिना पढ़ाई फीस क्यों दें अभिभावक

जब स्कूल नहीं खुले, पढ़ाई नहीं तो किस बात की फीस मांगी जा रही है। यदि स्कूल संचालकों के सामने समस्या है तो क्या अभिभावकों के पास कहीं से पैसा कहीं से उड़ते हुए आ रहा है जो बगैर पढ़ाई-लिखाई के बच्चों की फीस जमा करें। अभिभावकों पर स्कूल संचालक द्वारा जबरिया फीस वसूली का नोटिस जारी करना न्याय संगत नहीं है। अभिभावकों ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह इस दिशा में हल निकाले।

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