रीवा: विवादों में घिरे अपर कमिश्नर को दिखाया गया मुख्यालय की राह

रीवा: महिला की शिकायत पर अपर कमिश्नर कुलेश से न्यायालयीन प्रभार छिना , 21 एवं 22 अक्टूबर को निराकृत प्रकरणों पर रोक

मध्यप्रदेश रीवा

रीवा: महिला की शिकायत पर अपर कमिश्नर कुलेश से न्यायालयीन प्रभार छिना , 21 एवं 22 अक्टूबर को निराकृत प्रकरणों पर रोक

रीवा। मनगवां के एक जमीनी प्रकरण को लेकर सुर्खियों में आये अपर कमिश्नर बीएस कुलेश से रीवा सम्भाग के समस्त न्यायालयीन कार्य सम्भागीय कमिश्नर ने वापस ले लिया है। साथ ही 21 एवं 22 अक्टूबर को निराकृत किये गए सभी प्रकरणों पर रोक लगा दी गई है। 23 अक्टूबर से सभी राजस्व प्रकरणों की सुनवाई अब स्वयं कमिश्नर राजेश जैन द्वारा की जाएगी।

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महिला पक्षकार ने की थी शिकायत

न्यायालयीन प्रकरण में पक्षपात और हेराफेरी किये जाने की आशंका मनगवां निवासी एक महिला पक्षकार द्वारा लगाए जाकर मामले की शिकायत कमिश्नर रीवा के अलावा लोकायुक्त , प्रदेश के मुख्य सचिव तक से की गई थी। इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए कमिश्नर श्री जैन ने विवादित प्रकरण को अपने पास बुलवा लिया और जांच कराई थी। जिसमे गड़बड़ी पाये जाने पर श्री कुलेश से न्यायालयीन कार्य वापस ले लिया गया।

ऐसी स्थिति में अब रीवा और सतना की लिंक कोर्ट में कार्यरत स्टेनो , रीडर और कार्यरत लिपिकों को भी हटाना आवश्यक हो गया है। अभी तक इनकी सतना से रीवा और रीवा से सतना कोर्ट में अदला बदली होती रही लेकिन जिस तरीके से कमिश्नर कार्यालय के बाहर और भीतर चर्चाओं का बाजार गर्म है उसे दृष्टिगत रखते हुए इन्हें न्यायालयीन कार्य से पृथक रखना आवश्यक हो गया है।

रीवा-सीधी की भी सौपी गई थी जिम्मेदारी

दरअसल सम्भाग मुख्यालय में अपीलीय प्रकरणों की सुनवाई के लिए दो अपर कमिश्नर के पद सृजित किये गए हैं। जिनमे रीवा के साथ सीधी जबकि सतना के साथ सिंगरौली जिले के प्रकरणों की सुनवाई की जाती है। विगत माह पूर्व रीवा, सीधी का कार्य देख रहे अपर कमिश्नर श्री आग्नेय रिटायर हो गए लेकिन उनके स्थान पर नई पदस्थापना नही की गई। जिसके चलते सतना कोर्ट में पदस्थ अपर कमिश्नर बीएस कुलेश को रीवा सीधी का भी दायित्व सौप दिया गया। श्री कुलेश मनगवां के एक जमीनी प्रकरण को लेकर चर्चा में आ गए। रीवा से भोपाल तक शिकायते हुई। कमिश्नर राजेश जैन ने सम्बंधित प्रकरण अपने पास बुलवा कर उसकी जांच कराई तो उन्हें भारी गड़बड़ी समझ मे आई लिहाजा श्री जैन ने कुलेश से न्यायालय का अधिकार वापस ले लिया लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ में बैठा स्टाफ उसी तरह सलामत है। जिनकी बदली करना न्याय संगत होगा।

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वर्षों से कुण्डली मारकर बैठा है स्टाप

बताया गया है कि दोनों कोर्टो का वर्तमान स्टाफ कई वर्षों से कुण्डली मारकर बैठा हुआ है जो मौका मिलने पर अपने अधिकारी की आंख में धूल झोंकने से पीछे नही रहता। जिसका प्रमाण शुक्ला रीडर स्वतः हैं जिन्हें तत्कालीन कमिश्नर अशोक भार्गव ने हटा दिया था । शुक्ल के स्थान पर उमेश पांडेय को पदस्थ कर दिया गया , श्री पांडेय पहले रीवा सम्भाग में पदस्थ थे जिन्हें सतना कोर्ट भेजकर उनकी जगह अवनीश शर्मा को बैठा दिया गया जबकि श्री शर्मा का मूल विभाग वैटनरी है जो डेढ़ दशक से कमिश्नर कार्यालय में अटैच हैं। ऐसी स्थिति में कमिश्नर श्री जैन को सफाई अभियान चलाने की जरूरत है ताकि रीवा के माथे पर तत्कालीन अपर कमिश्नर वीके सिंह , केपी राही के समय से लगा बदनुमा दाग धुल सके।

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