मुख्यमंत्री शिवराज का आरोप, कमलनाथ हमारे विधायकों को फ़ोन कर रहे है और कह रहे आओ जितना पैसा चाहिए ले लो, डरा धमका कर भी...

एमपी :सत्ता पर काबिज होने किसानों को अपने पक्ष में करना चाहते है मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री, जानिए कैसे….

भोपाल मध्यप्रदेश

एमपी :सत्ता पर काबिज होने किसानों को अपने पक्ष में करना चाहते है मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री, जानिए कैसे….

रीवा। प्रदेश की सत्ता पाने के लिए एक बार फिर राजनैतिक दल के र्शीष नेता जोर अजमाइस लगा रहे हैं। सबसे ज्यादा उनकी नजर किसानो पर हैं। भाजपा नेता एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए किसानो हितों की बात करने के साथ ही उन्हे लाभ दिलाने के लिए पूरी ताकत से लगे हुए है तो वही कांग्रेस के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सत्ता पर काबिज होने के लिए खुले मंच से किसानो के लिए हिसाब मांग रहे है।

दोनो ही दल के नेता किसानो को अपने पक्ष में रखने के लिए इन दिनों चुनावी रण में अपनी-अपनी किसान हितैषी बातो को भी रख रहे है। जिससे यह साफ हो रहा है कि सत्ता के गिलियारे में अपनी कायनात को स्थापित करने के लिए किसान एक बड़ा चेहरा सामने आ रहा है।

फसल बीमा एंव ऋणमाफी बना मुद्दा

मुख्यमंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री के बीच किसानो को लेकर चलाई गई योजना इन दिनों मुद्रदा बना हुआ है। 28 विधानसभा में हो रहे उपचुनाव में अपना परचम लहराने के लिए मुख्यमंत्री ने फसल बीमा को किसानो के लिए वारदान बताते हुए दांवा कर रहे है कि एक-एक किसानो को उसके फसल की बीमा राशी दिलवाई जाएगी। किसान को किसी भी तरह से चिंता करने की जरूरत नही हैं। इसके लिए सरकार ने सभी व्यावस्था बनाई है।

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसी बीच कहां कि उनहे महज 15 माह के कार्यकाल में किसानो के कर्ज माफी जो की गई है उसके एक-एक पाई का हिसाब वे देने के लिए तैयार है। उन्होने कहां कि सत्ता संभालने के बाद से किसानो को किए गए वादे को पूरा करने के लिए काम किए है।

क्या है किसानो के लिए योजना

किसानो के लिए चलाई गई फसल बीमा योजना के माध्यम से भाजपा सरकार फसलो का नुकसान होने पर उसका पूरा मुआवजा कम्पनी के माध्यम से किसानों को दिलाती है। ऋण मांफी योजना लाकर कांग्रेस किसानो को कर्ज मुक्त बनाने की बात कर रही है। अपने-अपने दांवो के बीच दोनो ही दल के नेता किसानो को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार लगे हुए हैं। बहरहाल उॅट किस करवट बैठता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि शिवराज किसाने का मत लेकर अपनी सियासत बरकरार रख पाएगे या फिर कमलनाथ का ऋण माफी उन्हे दुबारा सत्ता तक पहुचाएगा।

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