गरीब परिवार का दृष्टिबाधित दिव्यांग बेटा बना प्रोफेसर, MPPSC में मिली सफलता

मध्यप्रदेश

छतरपुर बड़ामलहरा। प्रतिभा कभी सुविधाओं,संसाधनों की मोहताज नहीं होती। इस बात को एक बार फिर बड़ामलहरा के अभय जैन ने चरितार्थ किया है। बस कुछ कर गुजारने का जनून मन में लेकर कदम बढ़ता गया और आज कामयाबी कदम चूम रही है। बड़ामलहरा नगर के एक युवा दृष्टिबाधित दिव्यांग ने विषम परिस्थतियो में अपने आप को संभाल कर कामयाबी की नयी इबारत लिखी है। नगर के वार्ड नं 12 में रहने रहने वाले अभय जैन ने एमपी पीएससी परीक्षा में सफलता अर्जित की है। उनका चयन असिस्टेंट प्रॉफेसर परीक्षा में हो गया है।

मां विकलांग, भाई दृष्टिबाधित पिता का साया नही फिर भी पढ़ाई जारी रखी
एक गरीब परिवार में जन्मे अभय जैन जन्म से दृष्टिबाधित हैं। उनके पिता दशरथ लाल जैन दूसरों के यहां तुलाई का काम करते थे, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। साथ ही उनकी मां काशीबाई जैन जो खुद पैरों से विकलांग है और उनका बड़ा भाई सुरेंद्र जैन भी दृष्टिबाधित है। उन्होंने भी अपनी मेहनत से पढ़ाई पूरी की और आज वो भी संविदा वर्ग 2 में ग्राम उजरा गढ़ीमलहरा में शिक्षक के पद पर नियुक्त हैं। साथ ही उनका छोटा भाई रजनीश जैन जो पूर्ण स्वास्थ्य है वो घर में रह कर अपनी मां की सेवा कर रहा है।

अभय जैन की बचपन से यादाश्त बहुत तेज थी इसलिए उसको प्रारम्भिक शिक्षा के लिए दिल्ली के सरकारी दृष्टिबाधित स्कूल में भेजा गया। जहां स्कूली पढ़ाई के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए और एमए की उपाधि प्राप्त की। इसके उपरांत नेट जेआरएफ निकाल कर के वर्धा यूनिवर्सिटी से एमफिल की, साथ ही इसी वर्ष 2018 के एमपी पीएससी द्रारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा में भाग लिया। मेहनत रंग लाई और उनका चयन असिस्टेंट प्रॉफेसर के पद पर हुआ है। अभय जैन ने प्रथम बार में ही सफलता अर्जित कर पूरे परिवार को गौरवान्वित किया है।

मंजिल पाने के लिए जुनून चाहिए
अभय जैन ने अपनी इस सफलता पर चर्चा करते हुए कहा कि मंजिल पाने के लिए कड़ी मेहनत के साथ जुनून जरूरी है। मैंने ये कभी नही माना कि शारीरिक रूप से कोई काम करने में अक्षम हूं। लगातार मेहनत और लगन से आज यह सफलता मिली है। मां पिता का आशीर्वाद है कि आज मुझे मेरी मंजिल मिल गई.