रीवा में व्यापम से भी बढ़कर घोटाला, अभ्यर्थियों का कराया इंटरव्यू , 127 अभ्यर्थियों से हुई ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया

रीवा में व्यापम से भी बढ़कर घोटाला, अभ्यर्थियों का कराया इंटरव्यू , 127 अभ्यर्थियों से हुई ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया

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रीवा में व्यापम से भी बढ़कर घोटाला, अभ्यर्थियों का कराया इंटरव्यू , 127 अभ्यर्थियों से हुई ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया

रीवा (विपिन तिवारी ) । एक बार फिर व्यापमं घोटाले की तर्ज पर फर्जी नियुक्तियां करने वाला एक गिरोह इनदिनों प्रदेश के विश्वविद्यालयों में सक्रिय हो गया है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कई इस तरह के मामले सामने आए हैं, जहां पर फर्जी नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थी अब भटक रहे हैं। इसकी शिकायतें विश्वविद्यालय के साथ ही अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंच गयी हैं। गिरोह के फर्जीवाड़े के तार केवल रीवा विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं।

शहडोल के पंडित शंभूनाथ विश्वविद्यालय, चित्रकूट के ग्रामोदय विश्वविद्यालय, छतरपुर एवं अन्य स्थानों में नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली है। दलालों को रुपए देने वाले अधिकांश लोग रीवा जिले के ही हैं।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में लाइब्रेरियन, आफिस अटेंडेंट, कम्प्यूटर आपरेटर एवं अन्य पदों के लिए बकायदे इंटरव्यू लेटर रजिस्टार के नाम पर भेजे गए, इतना ही नहीं विश्वविद्यालय कैम्पस में बकायदे इंटरव्यू भी लिए गए। अभ्यर्थियों को लगातार गुमराह किया जाता रहा।

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तीन से पांच लाख रुपए तक लेकर नियुक्ति पत्र भी दिए गए। जब ज्वाइन करने अभ्यर्थी पहुंचे तो विश्वविद्यालय के अधिकारी भी इस तरह के फर्जी नियुक्ति पत्र देखकर दंग रह गए। साथ ही अभ्यर्थियों के भी होश उड़े हुए हैं, अब वह दलालों की तलाश कर रहे हैं तो वह नहीं मिल पा रहे हैं। पीडि़तों ने बताया है कि उनकी तरह ही 127 लोगों से रुपए लेकर कुछ को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, कुछ को लॉकडाउन का बहाना बनाकर इंतजार करने के लिए कहा गया है।

– एक दलाल ने विश्वविद्यालय का कर्मचारी होने किया था दावा

युवाओं से नौकरी के नाम पर लाखों रुपए ऐंठने वाले गिरोह के एक सदस्य ने अपना नाम विनोद तिवारी बताया था। इसने दावा किया था कि वह अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का कर्मचारी है। जबकि गिरोह का मुख्य दलाल राहुल सिंह पटेल निवासी रजहा, मनगवां था। उसने ही इंटरव्यू के लिए काललेटर और नियुक्ति पत्र दिए थे। अभ्यर्थियों ने बताया कि जब वह विश्वविद्यालय पहुंचे तो वहां पर विनोद तिवारी नहीं मिला। पता चला है कि कुलपति का गार्ड इस नाम का है, लेकिन वह भी विश्वविद्यालय में नहीं मिल रहा है। राहुल ने बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय महू का कर्मचारी स्वयं को बताया था लेकिन आरटीआइ से मिली जानकारी में इस नाम का कोई कर्मचारी नहीं है।

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– विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नहीं लिया संज्ञान, उठे सवाल

अभ्यर्थियों ने अपने शिकायत में कहा है कि करीब दो वर्ष से यह गिरोह सक्रिय है। विश्वविद्यालय के तत्कालीन रजिस्टार के नाम पर आदेश जारी किए जाते रहे, कैम्पस का भी उपयोग इंटरव्यू के लिए किया गया। ज्वाइन करने पहुंचे अभ्यर्थियों ने पूरा घटनाक्रम बताया इसके बाद भी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस गिरोह को बेनकाब करने कोई प्रयास नहीं किया है। इसलिए सवाल उठाए जा रहे हैं कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा घपला सामान्य व्यक्ति नहीं कर सकता। करीब छह महीने पहले सिटी कोतवाली थाने में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन पुलिस ने भी आवेदन को दबाए रखा।


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केस-1

एपीएसयू रीवा में नियुक्ति के लिए अजीत सिंह, महेन्द्र प्रताप यादव, ओमप्रकाश तिवारी, राजीव कुमार पटेल को लाइबे्ररियन के लिए काल-लेटर भेजकर इंटरव्यू कैम्पस में ही कराया और रुपए लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र भी दे दिया। वहीं सविता सिंह, ममता साकेत को आफिस अटेंडेंट का नियुक्ति पत्र दिया गया। जिसमें 28 हजार 600 रुपए प्रतिमाह वेतन का उल्लेख था। इनकी नियुक्ति 28८ दिसंबर 2019 से की गई थी। पहले ज्वाइन कराने में आनाकानी करता रहा फिर लॉकडाउन का हवाला देकर अब तक गुमराह कर रहा है। इसी तरह अन्य पदों के लिए भी कई लोगों से रुपए वसूले गए हैं।

केस- 2

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के नाम पर भी फर्जी नियुक्तियां की गई हैं। इसके लिए संबंधित अभ्यर्थियों से रुपए वसूले गए। ज्वाइन नहीं होने के बाद प्रमुख दलाल राहुल पटेल ने रुपए वापस करने का आश्वासन दिया था, इसलिए अब तक इंतजार किया जा रहा था। चित्रकूट में वीरेन्द्र कुमार पटेल निवासी रतहरा को कम्प्यूटर आपरेटर पद पर 35,600 रुपए प्रतिमाह दिलाने का नियुक्ति पत्र दिया गया है। इसी तरह तीन अन्य युवकों को नियुक्ति पत्र दिया गया है।


केस- 3

पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल में कम्प्यूटर आपरेटर और आफिस अटेंडेंट के नाम पर फूलकुमारी पटेल, रावेन्द्र पटेल, राजकुमार पटेल आदि से एक-एक लाख रुपए लिए गए। अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग नहीं होने पर अब तक रुपए लौटाने का आश्वासन दिया था,इसलिए शिकायतें नहीं कर रहे थे। कहा जा रहा है कि इसी तरह छतरपुर और सागर में नियुक्तियों के नाम पर भी रुपए लिए थे।

विश्वविद्यालय में इस तरह से कोई चोरी-छिपे नियुक्ति प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। मामला संज्ञान में आया है, यदि हमारे विश्वविद्यालय के लोगों की संलिप्तता है तो उन पर सख्त कार्रवाई करेंगे। कैम्पस के भीतर इंटरव्यू कराने की जांच कराएंगे। अभ्यर्थियों को पुलिस के पास भी जाना चाहिए।

डॉ. बृजेश सिंह, कुलसचिव एपीएसयू रीवा

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