व्यापमं पर बोलें सिंधिया: गरीब के लायकों को नहीं, अमीरों के नालायकों को दी नौकरी

Madhya Pradesh

कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने व्यापमं घोटाले से नौजवानों के साथ हुए अन्याय को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे गरीब व्यक्ति के लायक नौजवान बेटे को नौकरी नहीं मिल सकी, लेकिन अमीर आदमी के नालायक ने सरकारी नौकरी हासिल कर ली। उन्होंने यह कहा कि व्यापमं से मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य क्षेत्र

सबसे ज्यादा कलंकित हुआ है। सिंधिया ने यह बात सोमवार को पत्रकार भवन परिसर में कांग्रेस नेता कृष्णा घाडगे द्वारा आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में कही।

कार्यक्रम में कलाकार, खिलाड़ी, चिकित्सक, शिक्षक, किसान, वकील, एनजीओ आदि क्षेत्रों के चुनिंदा लोगों को बुलाकर सिंधिया से सीधा संवाद कराया गया। संवाद के दौरान सिंधिया ने अपनी पार्टी के नेताओं से यह अपेक्षा की कि वे घोषणाएं नहीं करें। जो वादे करें, उन्हें पूरा करें। उन्होंने कहा कि जब वे पांच साल बाद सामने आएंगे तो किए गए वादों को पूरा करके ही आएंगे।

सिंधिया ने कहा ‘मैं घोषणाओं पर विश्वास नहीं करता। मेरा क्रियान्वयन और नतीजों पर विश्वास है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर यूपीए सरकार के समय को याद करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की साइकल सवारी पर तंज कसा। वे बोले कि आज सीएम केन्द्र सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराएं। श्रेया नामक युवती के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार में आने के बाद मौजूदा सरकार की योजनाओं का परीक्षण कराया जाएगा और जो जनहितैषी होंगी, उन्हें जारी रखा जाएगा।
हर वर्ग से किए वादे पूरा करेंगे

क्रिकेटर मोहनीश मिश्रा ने कहा इन दिनों खिलाड़ी कोटे से रोजगार के अवसर बंद हैं तो सिंधिया बोले1970 और आज के वातावरण में अंतर आया है। सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बीच का अनुपात उलट हो गया है। पहले जिस तरह खेल प्रतिभाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरियां मिल जाती थीं, आज नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने स्व. माधवराव सिंधिया द्वारा रेल व विमानन में खिलाड़ियों को दी नौकरियां याद दिलाईं।

ज्यादा काम से पीठ नहीं दिखाएं
सिंधिया ने शिक्षक सुनील विश्वकर्मा के शिक्षण कार्य के अलावा दूसरे काम कराए जाने की समस्या रखी तो उन्होंने कहा कि शिक्षक परेशान हैं, लेकिन अगर उनकी क्षमताओं का दूसरे काम में उपयोग लिया जाता है तो उन्हें पीठ नहीं दिखाना चाहिए। वहीं एनजीओ से जुड़े शुभम मुद्गल के सवाल पर सिंधिया ने कहा मेरा व्यक्तिगत मानना है कि सरकार से जितनी दूर रहेंगे, उतना लोगों का फायदा होगा।

किसानों के अलावा डॉक्टर-शिक्षक भी प्रताड़ित
जीएमसी के डॉ. हेमंत वर्मा ने सवाल किया कि चिकित्सकों को नौकरी में आने के बाद ट्रेनिंग ही नहीं दी जाती तो उन्होंने कहा कि हम सरकार में आने के बाद ऐसा सिस्टम बनाएंगे कि डॉक्टर और शिक्षक को लगातार सीखने का मौका मिले और ट्रेनिंग होती रही। सिंधिया ने कहा कि प्रदेश में किसानों के अलावा डॉक्टर, शिक्षक भी प्रताड़ित हैं। डॉक्टरों की कमी है, लेकिन सरकार की हॉस्पिटल के निर्माण पर ही रुचि है।

सिंधिया ने कहा- भोपाल या विधानसभा मुख्यालय में बैठकर न हो फर्जी मतदाताओं की जांच
कांग्रेस सांसद एवं चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मांग की है कि 55 लाख फर्जी मतदाताओं की गड़बड़ी की जांच भोपाल या विधानसभा मुख्यालय में बैठकर नहीं कराई जाए। सूची में शामिल हर मतदाता का भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इसमें तय 31 जुलाई 2018 तक का समय कम पड़ रहा है तो उसे आगे बढ़ाया जाए। सिंधिया ने यह मांग सोमवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान की है।

उन्होंने कहा कि हमने 101 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गड़बड़ियां निकालकर चुनाव आयोग को दी थीं, लेकिन चुनाव अयोग ने गंभीरता से जांच नहीं की। सिंधिया ने सवाल किया कि 55 लाख मतदाताओं की मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का निपटारा चार दिन में कैसे हो सकता है। चार लोगों की टीम से यह किस प्रकार संभव है।

उन्होंने कहा कि भोपाल या विधानसभा में बैठकर नहीं, बल्कि डोर टू डोर मतदाता सूचियों की दोबारा जांच कराई जाए। मतदाता सूचियों में गड़बड़ी को हल्के ढंग से नहीं लें। गहराई में जाकर जांच कराएं। उन्होंने कहा कि भौतिक सत्यापन कर मतदाता सूचियों की जांच कराई जाना चाहिए और जिन लोगों की लापरवाही से मतदाता सूचियों में गलतियां हुईं, उनके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। 31 जुलाई 2018 की स्थिति में बनने वाली मतदाता सूची में एक भी मतदाता का नाम दो बार नहीं पाया जाना चाहिए। अगर समय लग रहा है तो तारीख आगे बढ़ाई जाए।
आयोग की जांच संतोषजनक नहीं

उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि चुनाव आयोग की जांच संतोषजनक नहीं है। इसकी दोबारा जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि हमने एक जनवरी 2018 की स्थिति वाली मतदाता सूची की शिकायत की थी। तब अधिकारी सुधार की बात कह रहे थे, लेकिन अब वे इसे ठीक बता रहे हैं।

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