मध्यप्रदेश : इन नौ जिलों में होने वाली है भारी बारिश, जानिये ?

मध्यप्रदेश

भोपाल।बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम मंगलवार शाम से दिखने लगेगा। मौसम विभाग ने सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, छतरपुर, पन्ना एवं टीकमगढ़ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। वहीं भोपाल में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे से रिमझिम का दौर चल रहा है। मौसम विभाग ने आज रात रूक-रूककर तेज बारिश होने की संभावना जताई है। दोपहर स बीते 24 घंटों में दौरान प्रदेश में जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, चंबल एवं शहडोल संभाग के कुछ जिलों में कहीं-कही हल्की बारिश हुई। बाकी प्रदेश में मौसम शुष्क है।

मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि उत्तर पश्चिमी बंगाल की खाड़ी एवं उसके आसपास कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। हवा के ऊपरी हिस्से में 7.6 किमी की ऊंचाई तक चक्रवाती हवा का घेरा भी बन चुका है। अगले कुछ घंटों में में यह और स्ट्रांग होगा। संभावना है कि एख बार फिर प्रदेश के अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है।

प्रदेश के मौसम को प्रभावित करने वाले कारक

– एक अति कम दबाव का क्षेत्र उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी उससे लगे हुए उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल में बना हुआ है साथ ही साथ हवा के ऊपरी हिस्से में 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक चक्रवाती हवा का घेरा बना हुआ है जिसके आगामी 12 घंटों के भीतर और अधिक गहराने तथा डिप्रेशन बनने की संभावना है।
– मॉनसून द्रोणिका अनूपगढ़, चूरू, ग्वालियर, सीधी, डालटनगंज, अति कम दबाव के क्षेत्र के मध्य भाग से होकर गुजर रही है 3)उत्तर पश्चिम मध्य प्रदेश में हवा के ऊपरी हिस्से में 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्र वाती हवा का घेरा बना हुआ है।

पीली हुईं पत्तियां
बारिश थमे हुए करीब दस दिन हो गए हैं। लोग उमस से बेहाल हैं। सबसे ज्यादा चिंता किसानों को है। बारिश न होने और तेज धूप निकलने से सोयाबीन की फसल पीली पड़ गई है। वहीं खेतों में दरारें पड़ गईं है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश में दस दिन का गेप होने से फसल की जड़े कमजोर पड़ गईं हैं। इसका सीधा असर खरीफ में होने वाली हर फसल पर पड़ेगा और उत्पादन कम होगा।