मध्यप्रदेश में संविदाकर्मियों के मानदेय की मांग पूरी, 15 हजार रुपये तक का लाभ

मध्यप्रदेश में संविदाकर्मियों के मानदेय की मांग पूरी, 15 हजार रुपये तक का लाभ

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मध्यप्रदेश में संविदाकर्मियों के मानदेय की मांग पूरी, 15 हजार रुपये तक का लाभ

मध्यप्रदेश: खेल और युवा कल्याण विभाग में कार्यरत 540 तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी संविदाकर्मियों को सरकार ने बड़ी सौगात दे दी है जिससे विभाग में ख़ुशी की लहर है. आपको बता दे की संविदाकर्मियों की मांग थी की उन्हें नियमित पद का 90 फ़ीसदी मानदेय मिले जिसे सरकार ने पूरा कर दिया है. संचालक खेल और युवा कल्याण व्हीके सिंह ने बताया कि खेल विभाग में 5 जून 2018 से पूर्व के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत संविदा कर्मियों को शासन निर्देशानुसार प्रावधानित नियमित पद का 90 फ़ीसदी मानदेय का लाभ दिया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ पर चीनी कंपनी को नियम विरुद्ध 271 करोड़ रुपये का ठेका देने का आरोप

भोपाल : यह आरोप लगाते हुए जबलपुर के पाटन से भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। उन्होंने टेंडर की शर्तो का उल्लंघन करके दिए गए इस ठेके को अविलंब निरस्त करने की मांग की है। गौरतलब है कि सिंधिया समर्थक 22 विधायकों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद 20 मार्च को कमल नाथ ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। यह ठेका उससे चंद दिन पहले का बताया गया है। 

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विश्नोई ने पत्र में कहा है कि ठेका प्रदेश में विद्युत के द्वारा ट्रांसमीट करने के लिए, फाइबर नेटवर्क स्थापित करने के लिए है। सामरिक महत्व के आंकड़ों को चोरी से बचाने के लिए ऐसा काम चीनी कंपनी को देना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया है कि टेंडर नं. टीआर-19/2019 की शर्त क्रमांक 38.5 में स्पष्ट था कि पूरा काम एक ही कंपनी को नहीं दिया जाएगा। एल-1 को 50 प्रतिशत, एल-2 को 30 प्रतिशत और एल-3 को 20 प्रतिशत काम देना इस शर्त में लिखा है। चूंकि काम सबको मिलना था, इसलिये सबने मिलीभगत से रेट ज्यादा भरे, परंतु चीनी कंपनी ने बाकी कंपनियों को धोखा देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ की मदद से 271 करोड़ रपयों का पूरा ऑर्डर खुद ले लिया। 

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विधायक अजय विश्नोई ने पत्र में बताया है कि चीनी कंपनी का नाम जेटीटी है। 2013 में इस कंपनी ने जेटीटी इंडिया प्रा. लिमि. नाम की एक कंपनी बना ली है। इसी के नाम पर यह 271 करोड़ रपये का ठेका लिया गया है, जिसे निरस्त करने की मांग की गई है।

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