मध्यप्रदेश में 5 अगस्त को होने जा रहे रोजगार मेले से ठीक पहले कमलनाथ ने रोजगारी के आंकड़े प्रस्तुत किये

मध्यप्रदेश

नई दिल्लीः मध्यप्रदेश में 5 अगस्त को होने जा रहे रोजगार मेले से ठीक पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बेरोजगारी के आंकड़े प्रस्तुत किये हैं. कमलनाथ ने बेरोजगारी आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि “बीजेपी ने हर साल लगभग दो लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन मध्य प्रदेश में हर साल नाम मात्र के युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है. असफलता छुपाने के लिे चुनाव से ठीक 4 माह पहले भाजपा रोजगार मेले का स्वांग रच रही है. सीएम शिवराज ने युवाओं को टाटा, अंबानी बनाने का वादा किया था, लेकिन आंकड़े तो कुछ और ही कह रहे हैं. सच तो यह है कि प्रदेश के 1 करोड़ से भी ज्यादा युवा आज भी बेरोजगार बैठे हैं.”

मध्य प्रदेश में बेरोजगारों का आंकड़ा 1.5 करोड़
कमलनाथ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार ने पिछले 14 वर्षों में केवल 17600 बेरोजगारों को नौकरी दी है. दिसंबर 2017 तक मध्यप्रदेश में बेरोजगारों का पंजीकृत आंकड़ा 23.90 लाख दिखाया गया था, जबकि वास्तविक तौर पर यह आंकड़ा 1.5 करोड़ है. इस सच के बाद सरकार का चुनावी वर्ष में बड़ी संख्या में रोजगार देने का वादा पूरी तरह से झूठा है. आंकड़ो के मुताबिक दिसंबर 2011 में 10 बेरोजगारों में से 7 शिक्षित थे और वर्ष 2017 में 10 में से 9 शिक्षित हैं. इससे स्पष्ट है कि शिक्षित लोगों में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है.

पिछले 13 वर्षों में आत्महत्या की घटनाओं में 20 गुना वृद्धि
मध्य प्रदेश में वर्ष 2016-17 में बेरोजगारों की संख्या में 19 लाख की वृद्धि हुई है, जबकि वर्ष 2017 में मात्र 1750 युवाओं को नौकरी मिली है. आज मध्यप्रदेश युवाओं की आत्महत्या के मामले में देश में शीर्ष पर है. एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 वर्षों में 1874 और वर्ष 2016 में 579 युवाओं ने बेरोजगारी के कारण आत्महत्या कर ली. पिछले 13 वर्षों में बेरोजगारी के कारण आत्महत्याओं की घटना में 20 गुना की वृद्धि हुई है. प्रतिदिन औसतन दो युवा आत्महत्या कर रहे हैं.

2016 में मात्र 422 लोगों को रोजगार
प्रदेश में पिछले दो वर्षों में बेरोजगारी 53 प्रतिशत बढ़ी है. शिवराज सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में वर्ष 2016 में 11.24 लाख पंजीकृत बेरोजगारों में से मात्र 422 लोगों को रोजगार देने का दावा किया गया, यह वास्तविकता है. प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर, पटवारी, जिला कोर्ट में चपरासी, पुलिस विभाग सहित अन्य विभागों में पिछले दिनों निकली नाम मात्र की भर्ती में हजारों आवेदन आये. उसमें से कई पीएचडी, एमबीए डिग्रीधारी, बीटेक और एमटेक परीक्षा पास उच्च शिक्षित अभ्यार्थी भी शामिल थे.