मध्यप्रदेश : राजनीति में आया बड़ा मोड़, कांग्रेस को होने वाला है बड़ा नुकसान

मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश में जल्द होने वाले चुनावों से पहले एक बार फिर राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। जिसके चलते एक बार फिर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है।

दरअसल यह पूरा मामला कांग्रेस के साथ बसपा के गठबंधन से जुड़ा हुआ है। जिसका लाभ और नुकसान दोनों ही सत्तापक्ष की ओर आने की चर्चा बनी हुई थी। सामने आ रही सूचना के अनुसार अब मायावती ने कांग्रेस के सामने एक शर्त रख दी है जिसके बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में भूकंप की स्थिति पैदा हो गई है।

एक तरफ शुरू में जहां कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपनी समान विचार धारा वाली पार्टियों से गठबंधन वाली बात कही थी, वहीं उस समय बसपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने इस तरह के किसी भी समझौते से लगभग मना कर दिया था। लेकिन पिछले दिनों लगातार आ रही सूचनाओं में कहा जा रहा था कि उपर के लेबल पर कांग्रेस बसपा का समझौता हो चुका है।

जिसके चलते मध्यप्रदेश में दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। जानकारों का मानना है ऐसे में इसका सीधा खामियाजा भाजपा को भूगतना पड़ सकता था, लेकिन अब एक बार फिर राजनीति की बिसात में बदलाव आया है। जिसमें मायावती ने सीधे तौर पर कांग्रेस को झटका देते हुए सम्‍माजनक सीटें मिलने पर ही गठबंधन की बात कह दी है।

जानकारी के अनुसार इसी साल तीन राज्यों में होने जा रहे चुनावों के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इन राज्‍यों में कांग्रेस के साथ तालमेल उसी दशा में हो सकता है जब हमको गठबंधन के तहत सम्‍माजनक सीटें मिलेंगी। ऐसा नहीं होने पर हम अकेले चुनाव लड़ने की तैया‍री कर रहे हैं।

दलित कार्ड…
दरअसल माना जा रहा था कि कांग्रेस दलित वोट बैंक को अपने साथ जोड़कर मध्यप्रदेश में जीत की प्लानिंग बना रही थी। लेकिन बसपा सुप्रीमो के इस बयान के सामने आते ही मध्यप्रदेश में समीकरण अब तेजी से बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

ये था समीकरण…
राजनीति के जानकारो के अनुसार कांग्रेस की प्लानिंग थी कि पिछले 20 सालों से बसपा ने मध्य प्रदेश में सात प्रतिशत के करीब वोट शेयर बरकरार रखा है। अगर पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर 37 प्रतिशत को इसमें जोड़ दिया जाए तो यह गठबंधन भाजपा के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का 45 प्रतिशत वोट शेयर रहा है और यह भी माना जा रहा है कि अभी वह तीन बार सत्ता में रहने के कारण एंटी इनकंबेंसी का सामना कर रही है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कुल 230 सीटें हैं. जिनमें भाजपा के पास 165, कांग्रेस के 58, बहुजन समाज पार्टी के चार और तीन निर्दलीय विधायक हैं। मायावती की पार्टी बसपा का दलितों के बीच अच्छा जनाधार है। मध्य प्रदेश में दलितों का वोट करीब 15.62 प्रतिशत है।

ये थी तैयारी…
सामने आ रही जानकारी के अनुसार कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के चुनाव को देखते हुए पिछले दिनों बसपा के साथ गठबंधन तय कर लिया था। कांग्रेस राज्य में बीएसपी को 26 सीटें देने को राजी हो गई है, जबकि 204 सीटों पर कांग्रेस खुद अपने प्रत्याशी उतारेगी।

दिल्ली में राहुल गांधी से गठबंधन को लेकर मिली हरी झंडी के बाद कमलनाथ ने बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलकर सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा की। बताया जा रहा है कि बसपा विंध्य, बुंदेलखंड, चंबल में अपने प्रभाव वाली सीटों पर प्रत्याशी उतारने को तैयार थी।

प्रदेश में बसपा के प्रभाव वाले क्षेत्र
मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रभाव है। साल 2013 के चुनाव में बसपा के खाते में चार सीटें गई थी। इसमें 62 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां बीएसपी को दस हजार और 17 सीटों पर तीस हजार वोट मिले थे।

अब आया ये मोड़
जानकारों की माने तो मायावती का बयान ऐसे वक्‍त आया है जब विधानसभा चुनावों में दलित वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस, बसपा के साथ तालमेल की संभावनाओं को टटोल रही है।

इस सिलसिले में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने इन तीनों प्रदेशों के पार्टी नेताओं के साथ पिछले दिनों दिल्‍ली में विचार-विमर्श भी किया।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक के दौरान मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ यूनिट के पार्टी नेताओं ने बीजेपी को हराने के लिए बीएसपी के साथ गठबंधन की पुरजोर वकालत की थी, लेकिन राजस्‍थान के कांग्रेसी नेताओं ने इसका विरोध किया।

इस पेंच में फंसा तालमेल…
वहीं सूत्रों का कहना है कि बसपा तीनों चुनावी राज्‍यों में कांग्रेस के साथ तालमेल करना चाहती है और ऐसा नहीं होने की स्थिति में अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतर सकती है। अब जो जानकारी समाने आ रही है उसके अनुसार कांग्रेस में इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में बीएसपी के प्रभाव को देखते हुए कांग्रेस राजस्‍थान में कुछ सीटें गठबंधन के नाम पर बीएसपी के लिए छोड़ सकती है।

ऐसे में जानकारों का कहना है कि कुल मिलाकर अभी मध्यप्रदेश के चुनाव के लिए कांग्रेस बसपा गंठबंधन खटाई में पड़ गया है। वहीं जानकारों की मानें तो इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा।<