मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने इस चुनाव में बीजेपी को 6-1 से हराया

मध्यप्रदेश

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सत्ताधारी बीजेपी को कांग्रेस ने बड़ी झटका दिया है. राज्य के होशंगाबाद जिले स्थित पचमढ़ी में हुए स्थानीय चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को एकतरफा मुकाबले में हरा दिया. पचमढ़ी में छावनी परिषद के चुनाव में कांग्रेस ने 7 में से 6 सीटें जीत ली हैं. मात्र एक सीट बीजेपी समर्थित प्रत्याशी ने जीती है. बता दें कि छावनी परिषद में अध्यक्ष पद पर सेना के पदेन अधिकारी ही होते है.

गौरतलब है कि पचमढ़ी छावनी परिषद में इससे पहले साल 2016 में चुनाव हुए थे. तब से यहां सेना की समिति ही छावनी परिषद का संचालन कर रही थी. 22 जून रविवार को छावनी के सभी 7 वार्डों के लिए सुबह 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक वोटिंग हुई थी. मतदान का प्रतिशत 79.27 रहा था. वोटों की गिनती रात नौ बजे खत्म हुई. छावनी परिषद पचमढ़ी में कुल 4495 मतदाता हैं.

पचमढ़ी छावनी परिषद के नतीजे विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस पार्टी के लिए अच्छी खबर है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस में बड़ा बदलाव करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. मध्य प्रदेश में पिछले 15 सालों से सत्ता में वापसी के लिए प्रयासरत कांग्रेस के लिए यह जीत निश्चित रूप से प्रेरणा का काम करेगी.
आपको बता दें कि इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में हुए लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव में भी बीजेपी को हराया था. साल 2018 में ही कांग्रेस ने कोलारस और मूंगावली विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की थी. इससे पहले कांग्रेस ने रतलाम जिले की झाबुआ सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को हराया था.

कहां है पचमढ़ी?
होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी 1100 मीटर की ऊंचाई पर बसा है जिसे सतपुड़ा की रानी के नाम से भी जाना जाता है. मध्‍य प्रदेश का एकमात्र हिल स्‍टेशन पचमढ़ी मॉनसून के दिनों में और भी खूबसूरत हो जाता है. सिंध व सतपुड़ा की सुंदर पहाड़ियों से घिरा यह पर्यटन स्थल मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा पर्यटन स्थल है. यहां की सुंदरता पर्यटकों को लुभाती है और गर्मियों के दौरान यहां सैलानियों का तांता लगा रहता है.

पचमढ़ी दो शब्द पंच अर्थात पांच और मढ़ी अर्थात गुफा से मिल कर बना है. मान्यता है कि यहां मौजूद पांच गुफाएं पांडवों ने महाभारत काल में अपने वनवास के दौरान बनाया था. ये गुफाएं यहां एक ऊंचे पर्वत शिखर पर मौजूद हैं. कहा जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान ज्यादा समय यही बिताया था.

ब्रिटिश राज का गवाह
पहले पचमढ़ी पर गोंड जनजाति का राज था. ब्रिटिश राज से पहले यह इसी जनजाति की राजधानी थी. 1887 में ब्रिटिश सैनिक कैप्टन जेम्स फोर्स्थ ने इसका परिचय पश्चिमी दुनिया से कराया. अंग्रेजों ने भी पंचमढ़ी को मध्यप्रदेश की राजधानी बनाया. आजादी के बाद 1967 तक पचमढ़ी मध्यप्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी. यहां मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के भी बंगले मौजूद हैं. साथ ही यहां एक राजभवन भी है जो राज्यपाल के ठहरने के लिए उपयोग में लाया जाता था. अब कई बार राज्य शासन और विपक्षी पार्टियों की मीटिंग यहां आयोजित की जाती है.