रीवा: केवल चार माह के लिए ही कॉलेजों में नियुक्त किये जाएंगे अतिथि विद्वान

Madhya Pradesh Rewa
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रीवा। कालेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के बाद भी खाली रह गए पदों पर अब अतिथि विद्वानों के नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। यह नियुक्ति केवल चार महीने की होगी। आगामी 30 जून तक के लिए नियुक्ति आदेश संबंधित कालेज की जनभागीदारी समिति द्वारा जारी किए जाएंगे। लगातार अतिथि विद्वानों द्वारा आंदोलन किए जा रहे हैं। भोपाल में भी लगातार धरना चल रहा था। जिसके चलते चार फरवरी अतिथि विद्वानों के आवेदनों में मैरिट के आधार पर कालेज आवंटन का समय रखा गया था। इसके बाद भी कई कालेजों में अब तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए हैं।

पीएससी से चयनित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियां होने की वजह से बड़ी संख्या में अतिथि विद्वान हटाए गए हैं। हालांकि जिनकी नियुक्तियां हुई हैं, उसमें अधिकांश पहले से ही अतिथि विद्वान की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब कालेजों में नियमित पद भरे जाने की वजह से अतिथि विद्वानों के लिए स्थान नहीं है, इसलिए उन्हें दूसरे कालेजों में ज्वाइनिंग करनी होगी। शासन ने सभी अतिथि विद्वानों से नए सिरे से आवेदन जमा करने का विकल्प दिया था।

23 जनवरी से लेकर तीन फरवरी तक यह प्रक्रिया चली, जिसके तहत आवेदन की प्रोफाइल अपडेट करने के साथ ही च्वाइस फिलिंग का भी विकल्प दिया गया था। अब इस बात को लेकर अतिथि विद्वानों में मायूषी है कि शासन द्वारा प्रक्रिया में लेटलतीफी की गई, जिसकी वजह से उन्हें कई महीने का नुकसान हो रहा है। जो नियुक्तियां हो रही हैं, वह एक वर्ष से अधिक समय तक के लिए होना चाहिए।

सहायक प्राध्यापकों के भरे गए पदों की स्थिति
रीवा जिले में 70 खाली पद भरे गए हैं, जिसमें राजनीति शास्त्र के पांच, समाजशास्त्र के तीन, रसायन के तीन, हिन्दी के पांच, संगीत के दो, संस्कृत के दो, भूगर्भ शास्त्र के एक, इतिहास दो, गणित दो, अर्थशास्त्र दो, विधि नौ, वनस्पति एक, प्राणिकी चार, भौतिकी एक, अंग्रेजी तीन, वाणिज्य के पांच, ग्रंथपाल के पांच, क्रीड़ा अधिकारी के चार, दर्शन के एक, उर्दू के एक, गृहविज्ञान के चार, भूगोल के पांच नियुक्त हुए हैं। बताया जा रहा है कि अब जनभागीदारी समितियों को अधिकार दिए गए हैं कि उनके यहां अतिथि विद्वानों के लिए जितनी जगह खाली हों, वहां पर नियुक्ति के लिए आदेश जारी किए जाएं।

अतिथि विद्वान को हटाया
जनपद पंचायत रीवा के अध्यक्ष सिद्धार्थ शुक्ला राजनीतिक पद पर होने के बावजूद अतिथि विद्वान का भी दायित्व निभा रहे थे। इसकी शिकायत उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची थी। पूर्व में नोटिस भी जारी की गई थी लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अब शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य ने सिद्धार्थ शुक्ला का अतिथि विद्वान आमंत्रण समाप्त कर दिया है। इसके लिए उच्च शिक्षा आयुक्त ने नाराजगी जाहिर की थी, जिसकी वजह से यह कार्रवाई की गई है। बता दें कि सिद्धार्थ शुक्ला टीआरएस कालेज के प्राचार्य रामलला शुक्ला के पुत्र हैं, इसलिए वह लगातार सुर्खियों में रहे हैं।

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