PM मोदी ने मानी CM शिवराज की ये बात, होगा ये बदलाव

मध्यप्रदेश राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय

भोपाल। पीएम मोदी ने मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के सोयाबीन पर सुझाव को मानते हुए उसे हरी झंड़ी दिखाने का मन बना लिया है। दरअसल विश्व स्तर पर आयात निर्यात को लेकर चल रही बहस के बीच भारत की ओर से अपने लिए उपयोगी रास्ता खोजने की कवायद की जा रही थी।

इसी के चलते सीएम शिवराज ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सोयाबीन को चीन को निर्यात करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी। यहां शिवराज ने अमेरिका से आयातित सोयाबीन पर चीन द्वारा आयात शुल्क 25 फीसदी किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि चीन में सोयाबीन की पूर्ति नहीं हो पा रही है।

इसका फायदा भारत को मिल सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार ने सोयाबीन के निर्यात पर दी जाने वाली 7 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि को 3 फीसदी बढ़ा दिया है। यानी सोयाबीन के निर्यात पर अब सीधे 10 फीसदी प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

जानकारी के अनुसार यह राहत 31 मार्च 2019 तक के लिए दी गई है। इस संबंध में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा का कहना है कि इस आदेश का लाभ किसानों को भी मिलेगा। सोयाबीन की अच्छी कीमत मिल सकेगी।

जानकारों का मानना है कि नई व्यवस्था में निर्यातक व्यापारियों को जितनी प्रोत्साहन राशि अधिक मिलेगी, वे उतना ही सस्ता सोयाबीन चीन को बेच सकेंगे। इसका मुनाफा किसानों को भी कीमत में बढ़ोतरी से मिल सकता है। वर्तमान में अंतराष्ट्रीय बाजार में मूल्य 450 अमरीकी डॉलर प्रति टन है, 10 प्रतिशत प्रोत्साहन रही होने पर व्यापारी की औसत 14 यूएस डॉलर प्रति टन का फायदा होगा|

ऐसे समझें पूरा मामला…
दरअसल पूर्व में अमरीका के सोयाबीन पर 25 फीसदी निर्यात टैक्स लगाने के बाद से ही माना जा रहा था कि चीन अब भारत की ओर रुख कर सकता है। जिसका फायदा मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा होगा। ये तीनों राज्य देश में सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य है। मध्यप्रदेश भी अकेले चीन की मांग को पूरी करने की क्षमता रखता है।

चीन को 11.50 लाख टन सालाना सोयाबीन की जरूरत रहती है। अकेला मध्यप्रदेश 70 लाख टन सोयाबीन पैदा करता है। अक्टूबर 2017 की स्थिति में प्रदेश के पास स्टॉक में करीब 10 लाख टन सोयाबीन है।

दुनिया में ऐसी स्थिति
दुनिया में अमरीका बड़ा सोयाबीन निर्यातक देश है। चीन को सबसे ज्यादा सोयाबीन अमरीका ही देता था। इसके बाद ब्राजील, अर्जेटीना, चीन और भारत का नंबर आता है। चीन में 11.50 करोड़ टन सोयाबीन की खपत है, लेकिन उसके यहां केवल 1.50 करोड़ सोयाबीन होता है। इसलिए वह दूसरे देशों से सोयाबीन खरीदता है। अमरीका पांच लाख करोड़ टन सोयाबीन चीन को देता था। निर्यात टैक्स के बाद चीन ने अमरीका से मुंह मोड़ लिया है।

अभी ऐसी है मध्यप्रदेश में स्थिति…
मध्यप्रदेश में अभी सोयाबीन की कीमत बेहतर है। पिछले साल सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3050 रुपए प्रति क्विंटल था। इस सीजन में यह बढ़कर 3399 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।

माना जा रहा है कि यदि चीन से मांग आती है तो किसानों को इससे भी अधिक दाम मिल सकते हैं। मध्यप्रदेश के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा के अनुसार अमरीका से सोयाबीन बंद करके चीन भारत से खरीदना शुरू करता है तो मध्यप्रदेश के लिए भी यह बेहतर मौका होगा। मध्यप्रदेश सोयाबीन स्टेट है और देश का 55 फीसदी सोयाबीन उत्पादित करता है। भारत से जो सोयाबीन जाएगा, उसमें मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा योगदान हो सकता है।

भारत 2012 तक देता था सोयाबीन…
भारत 2012 तक चीन को सोयाबीन भेजता था। वर्ष 2010-11 में 4 लाख टन सोया खली (तेल निकालने के बाद) चीन को दी थी। साथ ही 3 लाख टन सोया आटा दिया था। जनवरी 2012 में चीन ने भारत से सोयाबीन आयात पर यह कहकर रोक लगा दी थी कि सोयाबीन में मॉलीक्साइड ग्रीन रसायन पाया गया है।

यह रसायन जूट-बैग की प्रिंटिंग से निकलता था। खास बात यह कि तब चीन 3 से 5 प्रतिशत टैक्स आयात पर लेता था। अमरीका से आयात बंद करने के बाद चीन ने यह टैक्स हटा दिया।

03 प्रमुख राज्यों में सोयाबीन रकबा…
– 58.45 लाख हैक्टेयर में मध्यप्रदेश
– 35.84 लाख हैक्टयेर में महाराष्ट्र
– 10.80 लाख राजस्थान<