मानहानि मामलाः बयान दर्ज कराने जिला अदालत पहुंचे CM शिवराज

मध्यप्रदेश

नई दिल्लीः मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मानहानि मामले में अपना बयान दर्ज कराने जिला अदालत पहुंचे हैं. दरअसल, मध्यप्रदेश के पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर 7 मार्च 2015 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान व्यापमं घोटाले में लिप्त होने की बात कही थी. केके मिश्रा ने सीएम शिवराज पर आरोप लगाया था कि व्यापमं घोटाले में उनकी और उनकी पत्नी की हिस्सेदारी है. सीएम शिवराज ने व्यापमं घोटाले के जरिए अपनी पत्नी के मायके गोंदिया के 19 लोगों का परिवहन आरक्षक में चयन करवाया है. जिसके चलते सीएम शिवराज ने कांग्रेस नेता केके मिश्रा पर मानहानि का केस दायर किया था. बता दें केके मिश्रा मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रहे हैं और वह लगातार व्यापमं समेत कई मामलों पर मुख्यमंत्री पर हमला बोल चुके हैं. जिसके चलते CM शिवराज ने केके मिश्रा पर मानहानि का परिवाद दायर किया था.

मानहानि मामले में सीएम शिवराज को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं केके मिश्रा
वहीं मानहानि मामले में सीएम शिवराज को चुनौती देने केके मिश्रा सुप्रीम कोर्ट भी गए थे. जहां केके मिश्रा ने केस को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने केके मिश्रा की अपील खारिज कर दी थी. केके मिश्रा पर सीएम शिवराज का आरोप है कि केके मिश्रा के बयानों के चलते उनके और उनके परिवार के सम्मान को ठेस पहुंची है. जिसके चलते मुख्यमंत्री ने केके मिश्रा पर दुर्भावना के तहत आरोप लगाने का परिवाद दायर करवाया था.

मेरी छवि धूमिल हुई
बता दें केके मिश्रा द्वारा लगाए इन आरोपों के बाद सीएम शिवराज ने अपनी तरफ कोर्ट में मानहानि का परिवाद लगाया था. सीएम का कहना था कि इन आरोपों से मेरी छवि धूमिल हुई है. मेरी गरिमा को नुकसान पहुंचाया गया है. केके मिश्रा के इन आरोपों से मेरी इज्जत तार-तार हो गई है, मेरी तरफ लोग संदेह भरी नजरों से देखने लगे हैं, जिसकी वजह से मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

केके मिश्रा को तकनीकि आधार पर सुप्रीम कोर्ट से राहत
सीएम शिवराज के इन आरोपों के बाद केके मिश्रा को भोपाल अदालत ने 17 नवंबर 2017 को इस मामले में 2 साल की कैद और 25 हजार जुर्माने की सजा दी गई थी. भोपाल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मिश्रा ने हाईकोर्ट में अपील की थी. हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर पब्लिक प्रोसिक्यूटर द्वारा दायर परिवाद को अमान्य माना था और परिवाद के गुण-दोषों पर कोर्ट ने कोई विचार नहीं किया था. यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद शिवराज सिंह ने व्यक्तिगत आधार पर यह परिवाद पेश किया था और अब अपना बयान दर्ज कराने अदालत पहुंचे हैं.