कर्नाटक-गोवा के हालात से एमपी सरकार चिंतित! विधायकों के साथ.... 1

कर्नाटक-गोवा के हालात से एमपी सरकार चिंतित! विधायकों के साथ….

Madhya Pradesh

भोपाल. कर्नाटक और गोवा में उपजे सियासी संकट के कारण मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार अलर्ट हो गई है। एमपी कांग्रेस में विधायकों की एकजुटता के लिए डिनर पार्टी का आयोजन किया गया है। बताया जा रहा है कि गोवा और कर्नाटक में सियासी उठापटक के बाद एमपी कांग्रेस में हलचल तेज हैं गई हैं। बता दें कि गोवा में बुधवार को कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक अचानक भाजपा में शामिल हो गए जिसके बाद देश की सियासत में उठापटक सुरू हो गई। 10 विधायक गुरुवार को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ दिल्ली भी पहुंच गए हैं।

सभी विधायक होंगे दावत पर
कर्नाटक और गोवा के सियासी हलचल के बाद आज मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के आवा, पर डिनर पार्टी का आयोजन किया गया है। इस पार्टी में सीएम ( kamal Nath) और ज्योतिरादित्य सिंह के अलावा कांग्रेस के सभी विधायक और बड़े लीडर्स शामिल होंगे। इस दावत में कांग्रेस विधायकों के अलावा सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों को भी बुलाया गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के द्वारा विधायकों को दावत में बुलाकर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कांग्रेस सिंधिया और कमलनाथ खेमे के बीच किसी तरह की सरकार नहीं है।

सिंधिया और कमलनाथ समर्थक मंत्रियों में मतभेद की खबरें
हाल ही में सिंधिया औऱ कमलनाथ समर्थक मंत्रियों के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आईं थी। कैबिनेट बैठक में भी सिंधिया समर्थक मंत्रियों और कमलनाथ समर्थक मंत्री आमने-सामने थे। वहीं, सिंधिया समर्थक कई मंत्रियों ने कहा था कि अधिकारी हमारी बात नहीं सुनते हैं और मुख्यमंभी तक भी हमारी बात नहीं पहुंचने दी जाती है।

हार के बाद भोपाल दौर पर सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे हैं। सिंधिया ने हाल ही में कांग्रेस महासचिव पद से इस्तीफा दिया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस खुद भी अपना चुनाव हार गए थे। सिंधिया के पास पश्चिमी यूपी का प्रभार था।

सीएम ने भी की थी विधायकों के साथ बैठक
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले अपने निवास पर कांग्रेस विधायकों के साथ बैठक की थी। इस दौरान सीएम कमलनाथ ने कहा था भाजपा कभी भी डिवीजन मांग सकती है। जिस पर वोटिंग हो सकती है इसलिए सभी अनिवार्य रूप से सदन में मौजूद रहें। डिवीजनल मांग के हालात बने तो घंटी बजने तक सभी विधायक सदन में आ जाएं। बैठक में कर्नाटक का मुद्दा भी छाया रहा था।

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