बड़ी खबर : ACTION मोड में CM KAMALNATH, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के ये मंत्री जांच के दायरे में, मध्यप्रदेश में हड़कंप

Madhya Pradesh
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भोपाल। मध्य प्रदेश में बिना जानकारी आयकर विभाग द्वारा की गई छापामार कार्रवई से नाराज कमलनाथ सरकार एक बार फिर एक्शन मोड में आती दिख रही है।

इसी के चलते विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादों के मुताबिक राज्य सरकार ने अब शिवराज सरकार में हुए घोटालों पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है।

ई-टेंडर घोटाले में हुई कार्रवाई के बाद से प्रदेश की सियासत का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। वहीं अभी जल्द ही माखनलाल वाले मामले में भी कार्रवाई किए जाने के संकेत मिल रहे है।

सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनावों के बाद छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने जिस तरह से पूर्व सीएम रमन सिंह और उनके विश्वासपात्रों पर कठोर कार्रवाई की है। अब, उसी तर्ज पर कमलनाथ भी राज्य में कार्रवाई चाहते हैं।

बताया जाता है कि कमलनाथ सरकार जल्द ही शिवराज के पूर्व मंत्रियोंं पर कार्रवाई कर सकती है। इस बात के संकेत खुद कमलनाथ सरकार ने आईटी रेड के बाद दिए। सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही पुराने बही खाते खोलने जा रही है। जिसमें कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस संबंध में मख्यमंत्री कमलनाथ ने चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी के साथ बैठक भी की है। बताया जाता है कि उन्होंने इस मुलाकात में आईटी रेड संबंधित जानकारी लेने के अलावा पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों के बारे में भी चर्चा की।

माना जा रहा है कि सरकार अब बीते 15 सालों में हुए बड़े आयोजन और उनमें हुए भ्रष्टाचार की तह में जाना चाहती है। वहीं ये भी चर्चा है कि सीएम कमलनाथ ने स्पष्ट रूप से अफसरों को भाजपा सरकार के दौरान हुई अनियमितताओं की फाइलें प्राप्त करने और जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपने का निर्देश दे दिया है।

इस पूरे मामले में सूत्रों का कहना है कि इसके द्वारा भाजपा नेताओं को जांच के जरिए निशाना बनाया जाएगा।

वहीं अब सरकार सभी दस्तावेजों को EOW और अन्य पुलिस एजेंसियों को सौंप देगी। बैठक में जिलों में हुई अनियमितताओं की जानकारी लोकसभा चुनाव के बाद भी एकत्र किए जाने का भी निर्णय लिया गया।

यही नहीं मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों को इस बात के साफ संकेत दिए हैं, कि उनके सामने बीजेपी नेताओ से संबंधित सभी मुद्दे प्रथमिकता से रखे जाएं। कांग्रेस ने विधानसभा में भी बीजेपी के कार्यकाल में हुए घोटालों को उठाया था।

इस पर अब सीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि चुनाव के बाद वह किसी भी भ्रष्ट नेता या अफसर को बख्शा नहीं जाएगा।

जांच के दायरे में ये घोटाले!…

-सहकारिता विभाग और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में ऋण संवितरण में अनियमितता।

– माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में नियुक्ति।

– सिंहस्थ के दौरान की गई खरीदारी।

– नर्मदा के किनारे किए गए प्याज और बागानों की खरीद।

– छात्रवृत्ति घोटाला।

– एनजीओ को सौंपा काम।

– संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम।

– वैचारिक महाकुंभ के दौरान व्यय।

– व्यापमं के बारे में एसटीएफ के पास शिकायतें भेजना।

– ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन में खर्च।

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