कर्जमाफी के लिए सरकार ने मांगे आवेदन, ऐसा होगा कर्जमुक्ति फार्म : MP NEWS1 min read

Madhya Pradesh

भोपाल: मध्य प्रदेश में अपने वचन पत्र को सिद्ध करने की ओर बढ़ते हुए कमलनाथ सरकार ने सूबे के किसानों की कर्ज माफी प्रक्रिया पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए सरकार द्वारा कर्जदार किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। योजना के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर सिस्टम से राज्य के कोष से राशि किसान के फसल ऋण खाते में जमा कराई जाएगी। हालांकि, इस कर्ज की पूर्ति के लिए पर्याप्त धनराशि आएगी कहां से ये सवाल अब भी बरकरार है। अनुपूरक बजट में कर्जमाफी के लिये 5000 करोड़ का प्रावधान है, जबकि योजना के तहत पूर्ण कर्जमाफी के लिए 50,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की ज़रूरत है।

वचन पत्र में था कांग्रेस का जनता से वादा

आपको बता दें कि सत्ता में आने के बाद देश-प्रदेश के किसानो कर्जमाफी का वादा करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि, सत्ता में आने के दस दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। इसे कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में भी शामिल किया था। हालांकि, शपथ ग्रहण करने के दो घंटों के भीतर ही सबसे पहला फैसला लेते हुए कमलनाथ ने प्रदेश के किसानो के कर्ज मुक्ति के वादे को स्वीकृति दे दी थी।

गन्ना किसान भी करने वाले थे विधानसभा घेराव

वहीं, दूसरी तरफ बोनस की मांग को लेकर गुरुवार को गन्ना किसानों ने मध्यप्रदेश विधानसभा का घेराव करने की भी कोशिश की थी। हालांकि, प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें राजधानी के रेलवे स्टेशन पर ही रोक लिया। बाद में राज्य के कृषि मंत्री किसानों से मिलने पहुंचे, जहां उन्होंने गन्ना मूल्य बोनस की मांग पर हफ्ते भर का वक्त मांगा। इसके बाद किसानो ने हफ्ते भर के लिये आंदोलन स्थगित रखने पर सहमति दे दी है।

सरकार की चिंता

आगामी कुछ दिनो में सरकार के सामने किसानों से जुड़े ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनसे पार पाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा कर्जमाफी ही माना जा रहा है। सरकार ने सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच 22,268 करोड़ का अनुपूरक बजट पास करा लिया, जिसमें कर्ज़माफी के लिये जुगाड़े 5000 करोड़ रुपये। माना जा रहा है कि लगभग 35 लाख किसानों को इस योजना का लाभ मिलने वाला है। अनुपूरक बजट में किए गए इंतज़ाम से साफ है कि सरकार खाली खजाने में से इससे अधिक रकम कर्जमाफी के लिए नहीं निकाल सकती थी।

ट्रिपल “क” से निकलेगा हल

इन सवालों का जवाब देते हुए सरकार के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि, इस धनराशी का इंतेज़ाम हो पाना नामुमकिन नहीं है। क्योंकि, ये ट्रिपल “क” की सरकार है। इन तीनों “क” का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि, “क से कांग्रेस”, “क से कमलनाथ ” और “क से किसान”, हमने फिज़ूलखर्ची रोककर पिछले 22 दिनों में 150 करोड़ बचाए हैं। एक न्यूज चेनल द्वारा पूछा गया कि, किफायत तो ठीक है लेकिन बाकी पैसे जुगाड़ किस तरह होगी? इसपर जवाब देते हुए यादव ने कहा कि, “बहुत सारे विकल्प हैं, आदरणीय मुख्यमंत्री तलाशेंगे उनके निर्देशन में मार्गदर्शन में हम सभी चुनौतियों का पार करेंगे। लेकिन ये इतना आसान भी नहीं क्योंकि मध्यप्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले उसका सकल मौद्रिक घाटा 3.3% के आसपास है, यानी एफआरबीएम के नियमों की सीमा से 0.2% ज्यादा। मोटा-मोटी गणित के हिसाब से सरकार और 7000 करोड़ का कर्ज जुगाड़ सकती है वो भी तब जब 2018-19 में राज्य पर कर्ज़ा 1,87,636 करोड़ का है, जिसके लिये 12,867 करोड़ ब्याज चुकाना होता है।”

तीन तरह के होंगे फार्म

इस बीच कर्जमाफी के आवेदन सीएम कमलनाथ की तस्वीर के साथ तैयार हैं। वचन पत्र के अनुसार, किसानों का 1 अप्रैल 2007 से 12 दिसंबर 2018 तक का कर्ज माफ किया जाएगा। इसके लिए आगामी 26 जनवरी से किसानों को तीन अलग-अलग रंगों का फार्म भरना होगा। हरा फॉर्म आधार से लिंक किसानों के लिए होगा। सफेद फॉर्म बिना आधार संख्या वाले किसानों के लिए होगा, लेकिन इन्हें पहचान-पत्र के तौर पर कोई दूसरा दस्तावेज देना होगा। गुलाबी फॉर्म उन किसानों के लिए होगा जिनके पास ना तो आधार है ना ही कोई अन्य पहचान का दस्तावेज। 26 जनवरी को होने वाली ग्राम सभा में तीनों रंगों के आवेदनों के किसानों के नाम पढ़कर सुनाए जाएंगे। 27 जनवरी से पांच फरवरी तक आवेदनों की एंट्री और दावे आपत्तियां ली जाएंगी। 18 से 20 फरवरी तक दावों का निपटारा किया जाएगा। यानि अगर सबकुछ तय समय में होता रहा तो, साल का वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले प्रदेश का किसान कर्ज मुक्त हो जाएगा।

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