मध्यप्रदेश : भाजपा-कांग्रेस की जीत और हार के यह होंगे बड़े कारण, यह पार्टी संभालेगी सत्ता1 min read

Madhya Pradesh

भोपालः मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मतदान हो चुके हैं। सभी पार्टियों की निगाहें अब सिर्फ 11 दिसंबर को आने वाले परिणामों पर टिकू हुई हैं। जैसे-जैसे मतगणना का दिन नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे प्रदेश की जनता में इस बात की उत्सुक्ता भी बढ़ती जा रही है, कि आखिर अगले पांच सालों के लिए प्रदेश की सत्ता की कमान किसके हाथों में जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, मध्य प्रदेश में मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस है। दीगर पार्टियां इक्का-दुक्का सीटों पर कब्जा जमा पाएंगी। इसी के चलते मतदान के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस खुद के जुटाए आंकड़ो के आधार पर प्रदेश में सत्ता हासिल करने का दावा भी करती नज़र आ रही हैं। इसके अलावा देश-प्रदेश की कई एजेंसियां और मीडिया हाउसेज़ भी अपने-अपने द्वारा जुटाए आंकड़ों के आधार पर बीजेपी और कांग्रेस के सत्ता में आने के अनुमान पैश कर रहे हैं। फिलहाल, जानकारों के अनुमान के अनुसार प्रदेश में भाजपा या कांग्रेस की सरकार बनती है तो उसके क्या कारण होंगे, आइये जानते हैं।

चौथी बार सत्ता में लौटेगी भाजपा

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी चौथी बार सत्ता में आने में सफल होती है तो इसका बड़ा क्रेडिट सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को जाएगा। क्योंकि, भाजपा ने इस बार प्रदेश में सीएम के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा है। भाजपा के पास इस बार सत्ता में आने के दो बड़े कारण हैं, पहला तो सीएम की जनता के बीच बनी छवि इसी को आगे रखते हुए शिवराज के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया और दूसरा कारण है सरकार द्वारा किए विकासकार्यों और योजनाओं के आधार पर इस बार का चुनाव लड़ा गया। आइये क्रम अनुसार जानते हैं, भाजपा की जीत में किन चीजों का लाभ मिलेगा।

-शिवराज का चेहरा

देश विदेश में मामा के नाम से पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह का जनता से लगाव और जनता का उनसे लगाव पार्टी को जीत दिला सकता है।

-विकास मॉडल

भाजपा को सत्ता में लाने का क्रेडिट सरकार द्वारा पिछले पंद्रह सालों में किए गए विकास कार्यों और देश-प्रदेश की योजनाओं को लागू करके प्रदेशवासियों को लाभ पहुंचाने के कारण भी मिल सकता है।

-कांग्रेस कार्यकाल का लाभ

जानकारों का मानना है कि, जैसा कि भाजपा ने अपने चुनाव अभियान के दौरान प्रदेश की जनता को बार-बार पंद्रह साल पहले की दिग्विजय सरकार के कार्यकाल को याद दिलाने की कोशिश की, तो हो सकता है कि, जनता ने इस आंकलन के आधार पर मतदान किया हो। चुनावी सभाओं में भाजपा का आरोप था कि, दिग्विजय कार्यकाल में ना रोड थे ना बिजली और ना ही पानी। सीएम शिवराज कई बार चुनावी सभाओं में कह चुके हैं, कि, हमने बीमारू राज्य को विकासशील राज्य बनाया।

-दम भरता प्रचार

हर बार की तरह इस बार भी भाजपा के केन्द्र और राज्य के कई दिग्गज नेताओं ने ऐड़ी-चोटी का ज़ोर लगाते हुए प्रदेश के कोने कोने तक पहुंचकर प्रचार किया। यह नेता योजनाओं की जानकारी लेकर चुनाव प्रचार में पहुंचे थे। अगर जनता के बीच यह योजनाएं घर कर गईं, तो पार्टी को इसका भी लाभ मिलेगा।

इन वजहों से प्रदेश की सत्ता से हाथ धो सकती है भाजपा

प्रदेश में सत्ता हासिल करने के कारणों पर तो हमने गौर किया, लेकिन अगर भाजपा प्रदेश की सत्ता से बाहर होती है, तो उसके भी कई कारण होंगे। इनमें सबसे बड़ा कारण तो प्रदेश का किसान हो सकता है। क्योंकि, एमपी में लगभग 80 फीसदी वोटर किसान और ग्रामीण है और इन्ही को यहां मुख्य मतदाता माना जाता है। जानकारों का मानना है कि, इस बार प्रदेश का सबसे बड़ा मतदाता सूबे के मुखिया और सरकार की नीतियों से नाखुश रहे। इसका कारण कर्ज माफी के साथ ज़रूरी सहूलतें मुहय्या कराना था। इसे लेकर पिछले साल किसानो ने देश व्यापी आंदोलन भी किया, जिसके उग्र होने पर बड़ा जान-माल का नुकसान भी हुआ। हालांकि, इसके बावजूद भी सरकार अपने फैसले पर कायम रही और किसानो को कर्ज में राहत तो दी, लेकिन उसे माफ नहीं किया। आइये क्रम अनुसार जानते हैं, कि वह कोनसे कारण हैं, जिनके चलते भाजपा को इस बार हार का मूंह देखना पड़ सकता है।

-आंदोलन

वैसे तो शिवराज सिंह चौहान के पिछले दो कार्यकाल तो शांतिपूर्ण रहे, जिसका लाभ उन्हें सीधे तौर पर मिला भी, लेकिन इस बार प्रदेश के एक बड़े धड़े में भाजपा को विरोध का सामना करना पड़ा। इनमें किसानों का विरोध, सवर्णों और दलितों का विरोध पार्टी विरोधी समीकरण बना सकता है।

-आला नेताओं की नाराज़गी

युवाओं को पार्टी में मौका देने के नाम पर पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को इस बार टिकट ना दिए जाने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। देखा जाए तो फैसले लेते ही पार्टी के दिग्गज नेताओं ने या तो पार्टी का दामन छोड़कर विपक्षी दलों में चले गए या फिर अपनी ही पार्टी को घेरते नज़र आए। इस फूट से कई कार्यकर्ताओं ने इस बार भाजपा का साथ नहीं दिया, जिसका खामियाज़ा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

-एंटी इंकमबैंसी

प्रदेश की शिवराज सरकार को इस बार सरकार विरोधी लहर का नुकसान हो सकता है। इसका बड़ा कारण यह रहा कि, सीएम शिवराज द्वारा प्रदेश की जनता के समक्ष कई योजनाओं का ऐलान तो किया गया, लेकिन तय समय में उस योजना को लागू ना करा पाने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है।

-टिकट वितरण में वंशवाद

जैसा की भाजपा आए दिन कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाती रहती है, वैसे ही इस बार टिकट वितरण के समय भाजपा में भी वंशवाद देखने को मिला। पार्टी विधायकों ने खुद ही पार्टी पर आरोप भी लगाए। इंदौर-3 से विधायक ऊषा ठाकुर, पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता सरताज सिंह जैसे कई उदाहरण देखने को मिले। यह भी पार्टी को नुकसान पहुंचाने का बड़ा कारण बन सकते हैं।

वनवास खत्म कर सत्ता में आई कांग्रेस

जानकारों का कहना है कि, भाजपा को होने वाला हर नुकसान कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित होगा। अगर भाजपा प्रदेश की राजनीति से बाहर होती है, तो प्रबल चांसेज़ हैं कि, सत्ता की बगडोर कांग्रेस के हाथों में आएगी। इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने का बड़ा कारण भाजपा से लोगों की नाराज़गी होगा। इसके अलावा बढ़े मत-प्रतिशत को भी बदलाव की बयार माना जाता है। इस बार प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले तीन फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है। जबकि, इस बार बड़ी संख्या में प्रदेश के लोगों के मत सूति में नाम नहीं आए हैं। अगर वह सभी सीधे तौर पर अपने मत का इस्तेमाल करते तो यह आंकड़ा और भी बढ़ता। कांग्रेस इसी आधार पर जीत का दावा भी कर रही है। आइये क्रम अनुसार जानते हैं, कांग्रेस की जीत में किन चीजों का लाभ मिलेगा।

-किसान कर्ज माफी की घोषणा

मध्य प्रदेश के किसानो में इस बार सरकार के प्रति खासी नाराज़गी देखी गई, जिसका लाभ उठाने का प्रयास कांग्रेस ने किया। चुनाव प्रचार के दौरान मंदसौर पहुंचे राहुल गांधी ने किसानों के इस कर्ज को सरकार बनने के दस दिनो में माफ करने का दावा किया, जिसके बाद से प्रदेश के किसानों को दिए कर्ज की सरकार को मिलने वाली अदायगी में 90 पीसदी की कमी आ गई। जानकारों का मानना है कि, यह संकेत हैं कि किसानो को राहुल गांधी द्वारा दिया गया यह ऑफर पसंद आया। बता दें कि, प्रदेश में दो लाख तक की कर्ज श्रेणी में आने वाले लगभग 81 लाख किसान हैं, जिनपर करीब 70 हजा़र करोड़ रुपये कर्ज है।

-सरकार की खामियां

कांग्रेस की सत्ता वापसी का दूसरा कारण होगा सरकार द्वारा जनता को दिए गए सेकड़ों आश्वासनो में से कई का पूरा ना होना। दरअसल, जनता को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगभग हर स्टेज पर से एक घोषणा की है, लेकिन हकीकत में उनमें से कई लाभकारी घोषणाएं कागजों में ही उलझी हुई है। भाजपा द्वारा अपने काम को तय समय पर ना कर पाने का सीधा लाभ कांग्रेस को मिल सकता है।

-कांग्रेस की एकता

जानकारों का मानना है कि, पिछले चुनाव तक कांग्रेस का लगभग हर नेता खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार समझता है, जिसके चलते इन लोगों में एकता नहीं हो पाती। जिसका खामियाजा यह हुआ कि, अलग अलग होने के कारण इन्हें भाजपा द्वारा आसानी से तोड़ लिया गया, लेकिन इस बार अगर छोटे मोटे विवादों को हटा दें तो कांग्रेस एकजुट होकर चुनावी मैदान में नज़र आई है, हर दिग्गज ने राहुल गांधी के नेतृत्व में अपने अपने क्षेत्र का प्रभार संभाला। जानकारों के अनुसार कांग्रेस को इसका लाभ मिलेगा।

कांग्रेस की हार का यह होगा कारण

अगर, पिछले पंद्रह सालों की तरह इस बार भी अगर कांग्रेस को जीत तय कराने के लायक निधायक नहीं मिल सके तो इसका सीधा लाभ भाजपा का होगा। सीटों का सीधा लाभ ना मिल पाने कारण पार्टी में अंतर कलह होगी, साथ ही प्रदेश की जनता का भाजपा और शिवराज पर भरोसा होगा। इसके अलावा भाजपा द्वारा कांग्रेस कार्यकाल पर उठाए वह सवाल भी होंगे, जो दिग्विजय कार्यकाल के रहे। साथ ही, राहुल गांधी की लोकप्रीयता की कमी भी हार का कारण बन सकती है। आइये क्रम अनुसार जानते हैं, कि वह कोनसे कारण हैं, जिनके चलते कांग्रेस को इस बार भी हार का मूंह देखना पड़ सकता है।

-राहुल गांधी की लोकप्रीयता में कमी

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने चेहरा तय किये बिना चुनाव लड़ने का फैसला लिया। आला नेताओं का कहना था कि, चुनाव राहुल गांधी को मॉडल मानते हुए लड़ा जा रहा है। लेकिन राहुल गांधी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान कुछ ही दिनो पहले मिली है। जानकारों का मानना है कि, राजनीतिक परिवार से मिले अनुभव के अलावा उनमें एक उत्तम नेता होने के लिहाज़ से कुछ कमियां भी हैं, जिसका उदाहरण हम कई बार सभाओं के संबोधन में देख चुके हैं। इसलिए हो सकता है कि, प्रदेश में बिना चेहरे के चुनाव लड़ना कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है।

-शिवराज पर लोगों का भरोसा

पिछले चौदह सालों से शिवराज सिंह चौहान सूबे का नेतृत्व कर रहे हैं। इस बार भी अगर कांग्रेस सत्ता की होड़ में पिछड़ती है तो उसका सीधा कारण शिवराज का चेहरा होगा। यह भी सिद्ध होगा कि, पहले की तरह इस बार भी जनता को उनकी कार्यकुशलता पर विश्वास है।

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