मध्यप्रदेश : भाजपा के इन विधायकों व मंत्रियों के कटने जा रहे हैं टिकट! जानिये किस कारण लटकी तलवार1 min read

Madhya Pradesh

भोपाल। मध्यप्रदेश में इस बार विधानसभा के चुनाव 28 नवंबर को होने हैं। जिसे देखते हुए दोनों मुख्य पार्टियों की ओर से लगातार जीत की कोशिशें की जा रही हैं।

इसी के चलते दोनों पार्टियां जिताउ कैंडिडेट को ही अपना टिकट देने की कोशिशों में जुटी हैं। यहां तक की भाजपा कुछ सांसदों तक को प्रदेश की राजनीति में लाना चाह रही है। या यूं कहे की कुछ सांसद भी प्रदेश की राजनीति में ही इंट्रेस्ट दिखाते दिख रहे हैं।

वहीं भाजपा खराब परफॉर्मेंस वाले विधायकों, मंत्रियों और पिछली बार पराजित सीटों पर दूसरे नेताओं को उतारने की तैयारी में है। पिछले दिनों दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कुछ सांसदों से मुलाकात कर उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारने के संकेत भी दिए हैं।

हालांकि पार्टी सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाने के मूड में नहीं थी, लेकिन सामने आ रही जानकारी के अनुसार बदली हुई परिस्थितियों में निर्णय बदलना पड़ा।

एक ओर जहां कांग्रेस लगातार कई सालों से झेल रही राजनैतिक संयास से मुक्ति चाहती है, वहीं भाजपा एक बार फिर सत्ता में आने के लिए पूरी ताकत लगाती दिख रही है।

वहीं राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि भाजपा के लिए इस बार ये राह आसान नजर नहीं आ रही है। इसका कारण बताते हुए वे कहते हैं कि जहां एक ओर भाजपा से एक वर्ग काफी नाराज चल रहा है, जो शायद हमेशा से ही उसका वोट बैंक रहा, वहीं चुनावी मैदान में भाजपा के दूसरे मजबूत वोट बैंक को काटने के कांग्रेस सहित कई पार्टियां मैदान में हैं।

इसके अलावा नाराज हुए वोट बैंक के द्वारा वर्तमान में विधायकों का विरोध भी पार्टी के लिए मुसीबत बना हुआ है। यही वजह है कि पार्टी अब तक प्रत्याशियों के ऐलान को लेकर कोई फैसला नहीं ले सकी। जबकि चुनाव में सिर्फ डेढ़ माह का भी वक्त नहीं है।

बताया जाता है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कई स्तर पर टिकट के लिए चुनावी सर्वे कराया है। जिसमें सामने आ रही जानकारी के बाद भाजपा के कई नेताओं पर टिकट को लेकर तलवार लटक गई है। इसके अलावा और भी कई कारण हैं जिनके चलते भाजपा में टिकट को लेकर कई नेता परेशान हैं…

चुनाव रण: इन सांसदों को उतारा जा सकता है विधानसभा में…
भाजपा खराब परफॉर्मेंस वाले विधायकों और पिछली बार पराजित सीटों पर कुछ सांसदों को उतारने की तैयारी में है।

नागेंद्र सिंह लड़ सकते हैं नागौद सीट से…
खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह को पार्टी नागौद से विस चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही है। इस सीट से पिछली बार नागेंद्र सिंह के पुत्र गागनेंद्र प्रताप सिंह चुनाव लड़े थे, लेकिन वे कांग्रेस के यादवेंद्र सिंह से 10 हजार से ज्यादा
मतों से हार गए थे। नागेंद्र सिंह को नागौद से चुनाव लड़ाकर भाजपा विंध्य की अन्य सीटों पर क्षत्रीय मतदाताओं को साध सकती है।

उज्जैन की घट्टिया सीट से चिंतामन का नाम…
उज्जैन जिले की घट्टिया सीट से उज्जैन सांसद चिंतामन मालवीय का नाम तेजी से उभरा है। उनके लिए भाजपा के एक बड़े नेता ने दिल्ली में लॉबिंग की है।

मौजूदा विधायक सतीष मालवीय मारपीट के एक हमले में आरोपी थे, हालांकि हाईकोर्ट की इंदौर बैंच ने बीते 5 अक्टूबर को उन्हें राहत दे दी है, लेकिन पार्टी उनकी खराब परफॉर्मेंस के चलते चेहरा बदलना चाहती है।

सिलवानी से लड़ सकते हैं सांसद यादव…
सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव को पार्टी सिलवानी से चुनाव लड़ाने का मन बना रही है। सिलवानी के वर्तमान विधायक व पीडब्ल्यूडी मंत्री रामपाल सिंह को पार्टी फिर उदयपुरा भेज सकती है। केंद्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने भोपाल में यादव से कहा था कि वे सिलवानी के दौरे करें। यादव को सिलवानी से लड़ाकर पार्टी यादव वोटरों का साध सकती है।

जनार्दन मिश्रा कर रहे सेमरिया की तैयारी…
रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा को भी भाजपा चुनाव लड़ा सकती है। उन्हें सेमरिया सीट से मैदान में उतारा जा सकता है। सेमरिया की विधायक नीलम मिश्रा पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जा चुके अभय मिश्रा की पत्नी हैं।

वे चुनाव न लडऩे का ऐलान कर चुकी हैं। अभय के सेमरिया में प्रभाव को देखते हुए पार्टी वहां ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में मिश्रा को भेज सकती है।

वहीं इस संबंध में उज्जैन सांसद डॉ. चिंतामन मालवीय का कहना है कि यह प्रश्न संभावनाआें पर आधारित है कि मैं कौन सा चुनाव लड़ूंगा। संगठन क्या निर्णय ले रहा है, इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।

वहीं प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि जिताऊ उम्मीदवार ही भाजपा के टिकट वितरण का पैमाना है। इसी आधार पर पार्टी विधानसभा चुनावों में टिकट देगी।

इसके अलावा इन दिनों ये बात भी चर्चा में है कि वर्तमान सांसद व दिवंगत अटल बिहारी वाजपेई के भांजे अनूप मिश्रा भी इस बार वापस प्रदेश की राजनीति में आने को बेताब हैं। ऐसे में वे ग्वालियर क्षेत्र से विधानसभा सीट की कोशिश में लगे हुए है।

राजनीति के जानकार डीके शर्मा के अनुसार यदि इन लोगों को प्रदेश की राजनीति में लाया जाता है। तो साफ है कि मध्यप्रदेश के कई जगहों से वर्तमान विधायकों को टिकट कट सकता है।

इसके अलावा भाजपा की ओर से कराया गया सर्वे भी इस ओर इशारा करता है, कि वे विधायक या मंत्री जो अपने क्षेत्र में सर्वे में कमजोर दिख रहे हैं या जिनका विरोध जारी है उन्हें इस बार टिकट मिलने की कम ही आशा है।

कहा जा रहा है कि भाजपा की रिपोर्टों में 60 से 70 विधायकों के लिए जमीनी हालत ठीक नहीं है, वहीं कुसुम मेहदेले, माया सिंह, हर्ष सिंह और डॉ. गौरीशंकर शेजवार समेत आठ मंत्रियों की रिपोर्ट भी निगेटिव है।

इन पर खतरा…
बताया जाता है कि अब तक हुए सर्वे और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रिपोर्ट में लगभग 70 विधायकों की परफॉर्मेंस ठीक नहीं है। जिसके टिकट कट सकते हैं| वहीं एक दर्जन मंत्रियों की स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है, हालांकि पार्टी के सख्त निर्देश के बाद कुछ मंत्रियों ने चुनाव क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी थी, जिससे उनका ग्राफ बढ़ा है।

वहीं चर्चा है कि जिनकी परफॉर्मेंस अभी भी ठीक नहीं है उनमे पशुपालन मंत्री अंतर सिंह आर्य, वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार, बालकृष्ण पाटीदार, कुसुम मेहदेले, राज्यमंत्री हर्ष सिंह, राज्यमंत्री सुरेंद्र पटवा, नगरीय विकास मंत्री माया सिंह, राज्यमंत्री सूर्य प्रकाश मीणा के नाम हैं।

वहीं इनमें उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भी कुछ मंत्री को इस बार पार्टी टिकट देने से बचना चाहती है, जबकि कुछ का अपने ही क्षेत्र में जबरदस्त विरोध है।

ऐसे करेंगे टिकट के लिए चयन!:
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री स्तर से हुए इस सर्वे की रिपोर्ट तैयार है, वहीं प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने जमीनी नेताओं से फीडबैक लेकर सभी विधानसभा सीटों से टिकट के दावेदारों की लिस्ट तैयार की है। इसी के आधार पर टिकटों का चयन होगा। उनके पास हर विधानसभा क्षेत्र से 2 से 3 दावेदारों की कुंडली है।

इस ‘डायरी’ में हर नेता की कुंडली…
बताया जाता है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने पिछले एक पखवाड़े के भीतर प्रदेश के सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, जिले के प्रदेश एवं राष्ट्रीय पदाधिकारी समेत अन्य नेताओं को अलग-अलग दिन चर्चा के लिए समय बुलाया।

बताया जाता है कि एक दिन में राकेश सिंह ने 5 से 6 जिलों के नेताओं से सामूहिक एवं वन-टू-वन चर्चा कर जमीनी फीडबैक लिया है। खास बात यह है कि राकेश सिंह ने हर नेता के सुझाव / खामी को नोट किया है। उन्होंने जिलों के नेताओं से मौजूद विधायकों का रिपोर्ट कार्ड एवं अगले चुनाव के लिए जीत के प्रवल दावेदारों के नाम भी मांगे। जिलों पदाधिकारियों से चर्चा का दौर खत्म हो गया है।

जिलों से मिले फीडबैक के आधार पर राकेश सिंह ने हर विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिसमें पार्टी के मौजूदा विधायकों की परफार्मेंस रिपोर्ट भी है।

चर्चा है कि दोनों ही रिपोर्टों में 60 से 70 विधायकों पर संकट मंडरा रहा है, वहीं आठ मंत्रियों का काफी विरोध भी है, जिसको लेकर पार्टी इनके टिकट काट सकती है या किसी और सीट से चुनाव लड़ा सकती है| सूत्रों के मुताबिक पार्टी के संकेत के बाद इनमें से कुछ विधायक और मंत्री अन्य सीटों पर सक्रीय भी हो गए हैं|

संगठन स्तर पर मंथन…
बताया जाता है कि टिकट को लेकर बीजेपी में संगठन स्तर पर मंथन जारी है, सभी सर्वे रिपोर्टों और राकेश सिंह के फीडबैक के बाद टिकट पर फैसला होगा। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अमित शाह के 14-15 अक्टूबर को प्रस्तावित भोपाल-जबलपुर संभाग के दौरे के बाद पार्टी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान करेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि इस माह के अंत में ही प्रत्याशियों की घोषणा होगी।

जानकारों के अनुसार यदि ऐसा होता है तो इस स्थिति में टिकट की घोषणा के बाद चुनाव के लिए प्रत्याशियों के पास सिर्फ दो या तीन हफ्ते ही होंगे। वहीं पार्टी की और से सक्षम उम्मीदवार को ही टिकट दिया जाएगा, जो अपने स्तर पर ही सीट निकलने की ताकत रखता हो, ताकि पार्टी कमजोर स्थिति वाली सीटों पर फोकस किया जा सके।

इनसे बचते हुए, लिस्ट होगी दो चरणों में जारी…
दरअसल भाजपा में इस बार प्रत्याशी चयन का मामला मुश्किल भरा है, इसका कारण एक सीट पर कई दावेदारों के सामने आने को बताया जाता है। इनमें जहां कई पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और कई बड़े नेता भी शामिल हैं। इसके अलावा यदि मौजूदा विधायक और मंत्री सीट बदलते हैं तो भी ये माना जा रहा है कि वे जिस सीट से चुनाव लड़ेंगे वहां के स्थानीय नेता और दावेदार विरोध कर सकते हैं।

वहीं यह भी बताया जा रहा है कि इस बार भाजपा दो चरणों में ही टिकट की सूची जारी करेगी। इस बार परिवारवाद के तहत बेटे-बेटी, पति-पत्नी, रिश्तेदार या अन्य किसी को टिकट देने से भी पार्टी बच रही है। जबकि भाजपा अंतिम फीडबैक के लिए 20 अक्टूबर से पहले हर जिले में दो-दो वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश पदाधिकारी व सांसदों को भेजेगी। इसमें अपना नाम छोड़कर दूसरों के नाम सादी पर्ची पर मांगे जाएंगे।

वहीं ये बात भी सामने आ रही है कि भाजपा ने कई स्तर पर चुनावी सर्वे कराया है। जिसमें मौजूदा विधायकों की जनता में पकड़, जीतने की संभावना से लेकर नए नेताओं की रिपोर्ट तक शामिल हैं।

बताया गया कि राकेश सिंह ने जो रिपोर्ट तैयार की है, वे उसे चुनाव समिति की बैठक में साथ लेकर बैठेंगे। कहा जा रहा है कि इस बार टिकट चयन में राकेश सिंह की रिपोर्ट को खास तवज्जो दी जाएगी।

ऐसे बड़ी चिंता…
राजनीति के जानकारों के अनुसार दरअसल सांसदों की राज्य की राजनीति में आने की इच्छा से कई विधायकों या मंत्रियों की सीटें प्रभावित हो रही हैं। जिसे चलते कई बड़े नेताओं के टिकट भी इस बार कट सकते हैं।

इन्हीं सब चिंताओं के बीच भाजपा के कई नेता अपनी पकड़ मजबूत कराने में जुटे दिख रहे हैं। वहीं इसके अलावा कई पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश में जुटे हैं ताकि उनकी सीट पर किसी ओर को नहीं लाया जाए।

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