हाथी के मल से तैयार होती है यह Coffee, कीमत जानकर होश उड़ जाएंगे

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नई दिल्ली: असम की चाय ने एक नीलामी में वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया. एक किलो चाय 39001 रुपए में नीलाम हुई. यह अब तक बिकी चाय में सबसे महंगी है. लेकिन, सिर्फ चाय ही नहीं, कॉफी भी कीमत के मामले में आपको हैरान कर सकती है. क्योंकि, यह आम कॉफी नहीं होती. ब्लैक आइवरी ब्लेंड कॉफी (Black Ivory Coffee) की बात करें तो इसे दुनियाभर के रईस पीते हैं. क्योंकि, यह कॉफी वही अफोर्ड कर सकते हैं. इसकी कीमत इतनी है कि सुनकर होश उड़ जाएं. आपको यकीन नहीं होगा, जिसे कॉफी को आप घर में पीते हैं, उसकी कीमत 100 रुपए, 200 रुपए और 500 रुपए तक हो सकती है. लेकिन, ब्लैक आइवरी ब्लेंड दुनिया की सबसे महगीं कॉफी में से एक है.

67000 रुपए में एक किलो कॉफी
ब्लैक आइवरी कॉफी की कीमत है 1,100 डॉलर (यानी की 67000 रुपए) प्रति किलो बिकता है. कॉफी की कीमत का अंदाजा तो आपको लग गया, लेकिन ऐसा क्या खास है इस कॉफी में जो इसकी कीमत इतनी ज्यादा है. दरअसल, इसे तैयार करने की प्रक्रिया ऐसी ही है, जिसकी वजह से इसकी कीमत इतनी बढ़ जाती है. ब्लैक आइवरी कॉफी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक. यह कॉफी हाथी के मल यानी लीद से तैयार की जाती है. ब्लैक आइवरी को तैयार करने की प्रक्रिया की शुरुआत बेहद अचंभित करने वाली है. हाथी को पहले भारी मात्रा में कॉफी के कच्चे फल खिलाए जाते हैं. हाथी इसे पचाने के बाद पॉटी (लीद) कर देते हैं.

मल में तलाश किए जाते हैं बीज
हाथी की इस लीद को इकट्ठा किया जाता है. अब इस लीद में कॉफी के बीज तलाशे जाते हैं. एक हाथी को लगभग 33 किलो कॉफी के कच्चे फल खिलाए जाते हैं, जिसके लीद से एक किलो कॉफी के बीज निकाले जाते हैं. हाथी के लीद से निकाले गए कॉफी के बीज को धूप में अच्छी तरीके सुखाया जाता है. इस बीज को पिसा जाता है, फिर इसी से ब्लैक आइवरी कॉफी तैयार किया जाता है

थाइलैंड में तैयार होती है कॉफी
ब्लैक आइवरी कॉफी बिल्कुल भी कड़वी नहीं होती. इस महंगी कॉफी को थाइलैंड में बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है. यह दुनिया की सबसे महंगी कॉफी में से एक है आपको बता दें कि दुनिया की सबसे महंगी कॉफी लूवक भी जानवर की पॉटी से ही तैयार होती है. इस कॉफी की कीमत 2 लाख रुपए प्रति किलो है. हाथी की लीद से बीज निकालने का काम हाथियों के प्रशिक्षित ट्रेनर करते हैं.

इसलिए कड़वी नहीं होती कॉफी
हाथी के लीद से बीज अलग करने के बाद उन्हें धूप में सुखाया जाता है, फिर उसे मार्किट में बेच देते हैं. इस प्रकार से एक महंगी कॉफी तैयार हो जाती है. हैरत की बात तो यह है कि इस कॉफी में जरा भी कड़वापन नहीं होता है. कहा जाता है कि पाचन क्रिया के दौरान हाथी के एन्जाइम कॉफी के प्रोटीन को तोड़ देते हैं. प्रोटीन टूटने के साथ ही कॉफी का कड़वापन लगभग खत्म हो जाता है.