कोई कितना भी जिगरी यार क्यों न हो, भूलकर भी शेयर न करें ये बातें, वजह भी जान ले…1 min read

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दोस्तों की जरूरत हम सबको है। बहुत सारी बातों को हम दोस्तों से साझा करते हैं। लेकिन क्या हमें अपनी सारी बातें दोस्तों से बतानी चाहिए?

दोस्ती का रिश्ता रिश्तेदारों से इतर होता है। घर हो या बाहर, खून के रिश्ते एक सीमा तक साथ देते हैं, लेकिन दोस्त हर मोड़ पर। यही वजह है कि हमारे कई तरह के दोस्त होते हैं। मसलन मन बहलाने वाले दोस्त, शॉपिंग वाले दोस्त, पार्टी वाले दोस्त, वाट्सएप वाले दोस्त, फेसबुक वाले दोस्त, तफरी करने वाले दोस्त, चैटिंग वाले दोस्त, बेफिजूल गपशप करने वाले दोस्त, टाइमपास करने वाले दोस्त और जिगरी दोस्त। यानी जैसी जरूरत, वैसी दोस्ती।

इन विभिन्न प्रकार के दोस्तों में जिगरी दोस्त की दोस्ती सबसे अनूठी और मजबूत होती है। मन से जुड़े जिगरी दोस्तों के साथ दिल से रिश्ता जुड़ जाता है। लेकिन फिर एक दिन ऐसा होता है कि आपको किसी से प्यार हो जाता है। फिर जिंदगी में नया मोड़ आता है। तब आपकी दोस्ती और गहरी हो जाती है। कारण, प्रेमी के हर मैसेज और इशारों पर अपने दोस्तों से चर्चा करना और उसके अभिप्राय को समझना। हालांकि कुछ बातें बहुत निजी होती हैं, जो सिर्फ आप दोनों के बीच की होती हैं। उसमें किसी की दखल नहीं होनी चाहिए।

जैसे कि आपके प्रेमी ने बताया कि उसकी अपने बहन से नहीं बनती या मां-बाप की आपस में नहीं पटती, मां अपना खर्च खुद उठाती हैं, भाई की सगाई दो बार टूट चुकी है, घर के सभी सदस्य अपना खर्चा स्वयं उठाते हैं, बहन को उसके प्रेमी ने धोखा दिया, मां-बाप तलाक लेने की सोच रहे हैं, अपने लिए खाना स्वयं बनाता हूं, बॉस ने अप्रेजल रोक दिया, परिवार में जमनी को लेकर बहस हो रही है… वगैरह-वगैरह। ऐसी बातें बहुत निजी हैं। ऐसी निजी और गोपनीय बातें प्रेमी ने साझा की हैं, तो उन्हें अपने तक ही रखनी चाहिए।

-हम आधुनिक समय में हैं। चूंकि, रिश्ता इतना गहरा है, तो हर तरह की बातें चलती हैं। प्रेमी या आपके पति ने आपसे कोई गंभीर मजाक किया या अंतरंग रिश्तों पर कोई टिप्पणी की तो यह सिर्फ आपके लिए है। इसका आनंद लें। ये सब जिगरी दोस्त को बताने से आपके रिश्ते की खिल्ली ही उड़ेगी। दोस्त तो यही सोचेगी और कहेगी कि आपका प्रेमी कितना बेशर्म है। बाकी आप समझदार हैं।

-किसी की विचारधारा आप पर हावी नहीं हो। चाहे वो दोस्त हो या प्रेमी। उन्हें स्वच्छंद सोचने दीजिए। याद रखें कि दोस्त को आपके प्रेमी के दिमाग को पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह बात खुद समझें और दोस्त को भी समझाएं।

-प्रेमी ने आपको बहुत-सी अपनी कमियों व खामियों से वाकिफ किया है। आप यह भी जानती हैं कि दोस्त उन कमियों व खामियों को जानकर आपके और आपके प्रेमी के लिए किसी भी तरह की विचारधारा नहीं बनाएगी। फिर भी आप चुप्पी साध लें। याद रहे प्यार में डींगे तो हर कोई मारता है, लेकिन कमियों का बखान, प्यार की गहराई के बाद ही होता है।

-आपने प्रेमी के साथ कोई नई फिल्म देखने या कैफे में ब्रंच करने का प्रोग्राम बनाया है, तो उसे दोस्त के साथ शेयर नहीं करें। साथ ही इससे जुड़े खर्चे की बात की खबर दोस्त को नहीं दें।

-आप या प्रेमी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, तो उसे दोनों के बीच गुप्त ही रहने दें।

-आपके दोस्त आपके पार्टनर से अलग होने की सलाह देने लगेंगे। ऐसा करने से बाद में पछतावा के सिवा और कुछ नहीं रह जाता है। सबसे जरूरी बात, अपने दोस्तों से पुराने रिश्ते के बारे में बताने से बचें। क्योंकि हो सकता है आपके दोस्त वक्त आने पर इस बात का फायदा उठा लें।

-प्रेमी ने आपको कोई गिफ्ट दिया है, जो आपको पसंद नहीं। इस गिफ्ट संबंधी बात दोस्त को नहीं बताएं। आप थोड़ा परिपक्वतापूर्ण व्यवहार करें। यह सोचें कि उस गिफ्ट में प्रेमी की कितनी भावनाएं शामिल हैं। गिफ्ट की नापसंदगी से मालूम चलता है कि आप भौतिकवादी हैं।

-माना कि आप प्रेमी से हुई छोटी-बड़ी लड़ाई, बहस या मनमुटाव दोस्त से शेयर करती हैं। लेकिन अपनी इस आदत पर लगाम लगाएं। इतनी बुराइयों के बखान से आपकी दोस्त आपके लिए कुछ विपरीत विचार बना सकती है। दोस्तों के सामने हर वक्त अपने रिश्तों को लेकर रोना धोना न मचाएं। अगर आप अपने दोस्तों से सिर्फ नकारात्मक बातें ही करती हैं, तो एक वक्त ऐसा आएगा जब

-प्रेमी के जीवन में क्या समस्याएं हैं। यदि उसने इसका ब्योरा दिया है, तो उसे अपने दोस्त को नहीं बताएं। याद रहे, भरोसे की नींव को तोड़ना कभी-कभार संबंधों की नींव में दरार ले आता है।

-आपका प्रेमी कितना कमाता है। उसका ब्योरा दोस्तों को बताकर आपसी संबंधों में असहजता नहीं लाएं। हो सकता है कभी बातों ही बातों में यह बात वह आपके प्रेमी के सामने बोल दें। इससे आपके प्रेमी की भावनाओं को ठेस लग सकती है और इसका असर आपके रिश्ते पर भी पड़ सकता है।

-चाहे लड़का हो या फिर लड़की, उसे कभी भी नहीं बताना चाहिए कि आपकी जिंदगी में इससे पहले कौन-कौन आए थे? क्योंकि वर्तमान में आपके पास मौका है एक नई जिंदगी की शुरुआत करने का, तो बीते समय में आपसे जो गलतियां हो गई हैं, उसे दोहराने से क्या फायदा। इस गलती को कभी भी दोस्तों के साथ शेयर न करें। इससे आपकी छवि गलत बनती है और साथ ही आपका सच जानकर कोई आपसे बात भी नहीं करना चाहता है।

 ऑफिस में आपके साथी कर्मचारी में से कई आपके दोस्त भी बनते हैं। इनमें से कुछ के साथ आपके घरेलू संबंध भी बनते हैं, जिनसे आप कई तरह की बातें शेयर करते हैं। लेकिन आपका साथी कभी आपकी पर्सनल बातों का फायदा भी उठा सकता है। प्रेमी की की बातें या उसके किसी पूर्व संबंधों में अलगाव के कारण को दोस्त से शेयर नहीं करें। आपने सब कुछ स्वीकार कर लिया है, इसका मतलब यह नहीं कि दोस्त भी करे। कभी-कभी दोस्त आपसे हंसी-मजाक में आपके ‘बेडरूम’ के बारे में भी पूछ लेते हैं। उन्हें भूलकर भी इस बारे में कुछ न बताएं। अगर आपके पार्टनर को इस बारे में पता चलेगा तो यकीनन आपके बीच दूरियां आएंगी।– निवेदिता मिश्रा, साइकोलॉजिस्ट, बीआर अंबेडकर हॉस्पिटल, दिल्ली

 इंसान जब किसी को अपना समझने लगता है, तो दिल की तहों में सदियों से दबे गहरे राज तक बता देता है। सही है कि जिससे मन मिल जाए, उसके सामने तो दिल में छुपी राजदार बातें स्वतः ही खुल जाती हैं। दूसरी बात यह भी होती है कि जो दिल के करीब आ जाता है, जाने क्यूं उससे कुछ छिपाना अनुचित और सौतेलापन-सा लगने लगता है। इसी वजह से हम और आप सामने वाले से राजदार बातें भी कह डालते हैं। प्रेमी-प्रेमिका के बीच कई तरह की बातें होती हैं। साथ में कई तरह के पल आते हैं। अधिकांशतः दोनों पर रोमांटिक सरूर छाया रहता है। प्यार भरी बातें भी होती हैं। जिसमें दोनों बराबर के सहभागी होते हैं। ऐसे में पल-पल का अपडेट दोस्त को देना ठीक नहीं है। ऐसा करने से दोस्त खीझ सकता है या दोस्ती तोड़ भी सकता है। कारण दोस्त के साथ होते हुए भी आप पर प्रेमी का सरूर छाया रहता है। – डॉ राकेश कुमार राजू, समाजविज्ञानी

 प्रेमी-प्रेमिका का संबंध बेहद संवेदनशील होता है। इस संबंध पर परामर्श बेहद सावधानी से लिया जाना चाहिए। अक्सर संबंधों में कोई उलझन पैदा होने पर हम दोस्तों से परामर्श लेते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि दोस्त कितना भी अच्छा हो, पर संबंधों के मनोविज्ञान को समझने की वास्तविक परख किसी विशेषज्ञ को ही होती है। अक्सर दोस्त अपने व्यक्तिगत अनुभव से संचालित होकर परामर्श देते हैं, जो कि संभव है आपके लिए उपयुक्त न हो। विशेषज्ञ मानवीय व्यवहार की बेहतर समझ रखते हैं और उनका परामर्श अधिक उपयुक्त होता है। विशेषज्ञ आपकी निजता का भी पूरा ख्याल रखते हैं। – डॉ. दीपमाला लेखिका, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, मोटिवेशनल स्पीकर, लाइफ मैनेजमेंट कोच

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