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MP: सवर्णों के साथ सिंधिया के समर्थकों ने की मारपीट, मचा बवाल

भोपाल। सिंधिया राजघराने की जागीर रहे शिवपुरी शहर में आज सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कई जगह विरोध हुआ। घबराए सिंधिया ने पहले तो अपना रास्ता बदला और अफवाह उड़ाई गई कि सिंधिया के साथ भिंड-मुरैना के लठैत आ रहे हैं। इसके बाद भी जब काले झंडे दिखाने का सिलसिला जारी रहा तो कोलारस में सिंधिया समर्थकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सवर्ण समाज के लोगों पर हमला कर दिया।
सिंधिया ने रास्ता बदला बता दें कि श्री राजपूत करणी सेना ने ऐलान किया था कि आज सिंधिया को शिवपुरी में घुसने नहीं देंगे। वो झांसी से शिवपुरी आने वाले थे। ऐलान के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना रास्ता बदला और ग्वालियर से शिवपुरी में प्रवेश किया। सिंधिया की रणनीति कामयाब रही। करणी सेना के कार्यकर्ता 2 हिस्सों में बंट गए और शिवपुरी में प्रवेश से पहले कोई प्रदर्शन नहीं कर पाए।
शिवपुरी शहर में बम्बई कोठी पर सपाक्स के पदाधिकारियों ने सांसद सिंधिया से औपचारिक मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। यहां सपाक्स ने सिंधिया से वो सवाल नहीं पूछा जो सभी सांसदों से पूछा जा रहा है कि 'जब संसद में बिल पेश हुआ तब आप चुप क्यों थे।' सिंधिया ने डिप्लोमेटिकल बयान दिया और सपाक्स के लोग लौट आए।
शिवपुरी में जब सपाक्स औपचारिकता पूरी करके रह गई तो श्री राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता अतुल सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कम्यूनिटी हॉल में महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम से भाग लेकर लौट रहे सिंधिया का काला झंडा दिखाया। यहां कांग्रेसियों ने अतुल सिंह को घेर लिया और उसके साथ हाथापाई भी की।
कोलारस में सिंधिया समर्थकों ने गुंडई दिखाई कोलारस में सपाक्स के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को काले झंडे दिखाए। इससे तिलमिलाए सिंधिया समर्थकों ने पुलिस की मौजूदगी में सपाक्स कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया। बता दें कि इससे पहले भी सिंधिया के गार्ड ने काला झंडा दिखा रहे एक सवर्ण जाति के व्यक्ति को पीटा था। इस हमले के बावजूद सपाक्स के कार्यकर्ता ना केवल काला झंडा दिखाने में सफल रहे बल्कि उन्होंने सांसद सिंधिया की कार का रास्ता भी बाधित किया।
शिवपुरी में अब भी 'महाराजा' हैं सिंधिया यूं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा सदस्य मात्र हैं परंतु शिवपुरी में इनकी शान ही निराली है। यहां सिंधिया को आज भी इलाके का महाराजा कहा जाता है। इनके नाम के आगे श्रीमंत और महाराजा लगाया जाता है। यहां कोई भी इनसे सर, नेताजी या सांसद महोदय संबोधन से बात नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो उसे अगली बार मिलने का अवसर ही नहीं मिलता।




