सामना में शिवसेना ने सुशांत सिंह राजपूत को बताया चरित्रहीन कलाकार

सामना में शिवसेना ने सुशांत सिंह राजपूत को बताया चरित्रहीन कलाकार

एंटरटेनमेंट बिहार राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मौत के मामले में एम्स को फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद एक बार फिर शिवसेना हमलावर हो गई है. पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में शिवसेना ने सुशांत को चरित्रहीन एवं चंचल कलाकार बताया है. साथ ही उन सभी से माफ़ी मांगने के लिए कहा है, जिन्होंने महाराष्ट्र सरकार एवं मुंबई पुलिस पर सवाल उठाए थें.

बता दें सुशांत सिंह राजपूत के मौत के कारण की एम्स द्वारा फॉरेंसिक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें सुशांत की मौत को आत्महत्या बताया गया है.

रिपोर्ट आते ही शिवसेना मुखर हो गई है. शिवसेना ने न सिर्फ सामना में सुशांत को चरित्रहीन एवं चंचल कलाकार बताया साथ ही सुशांत के मामले को बिहार चुनाव का मुद्दा बताया है.

सम्पादकीय में सामना ने लिखा है कि बिहार चुनाव में कोई मुद्दा नहीं था. इसलिए नितीश सरकार एवं वहां के नेताओं ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को हत्या बताकर महाराष्ट्र सरकार एवं मुंबई पुलिस पर सवाल उठाते हुए मामले को राजनैतिक मुद्दा बनाया गया है.

खाकी का चरित्र हरण हुआ

सामना में शिवसेना ने नितीश सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा है कि इसके लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर को वर्दी में नचाया और आखिरकार यह महाशय नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हो गए, जिससे उनकी खाकी वर्दी का वस्त्र हरण हो गया.

40-50 दिन से CBI क्या कर रही है

मुंबई पुलिस सुशांत की जांच नहीं कर सकती इसलिए सीबीआई को बुलाओ, ऐसा चिल्लाने वाले एक सीधा-सा सवाल नहीं पूछ पाए कि 40-50 दिन से सीबीआई क्या कर रही है? सुशांत केस को भुनाकर महाविकास आघाड़ी की सरकार और मुंबई पुलिस का ‘मीडिया ट्रायल’ किया गया.

सुशांत सिंह राजपूत | संजय राउत

कई गुप्तेश्वरों को महाराष्ट्र द्वेष का गुप्तरोग हो गया था

सामना में शिवसेना ने लिखा है कि AIIMS सच्चाई सामने लेकर आया है. सुशांत की मौत आत्महत्या से हुई है, ह्त्या से नहीं. क्या अब भी AIIMS की रिपोर्ट को नकारेंगे? ‘ठाकरी’ भाषा में कहें तो सुशांत आत्महत्या केस के बाद कई गुप्तेश्वरों को महाराष्ट्र द्वेष का गुप्तरोग हो गया था, लेकिन 100 दिन खुजाने के बाद भी हाथ क्या लगा? 

कुत्तों की तरह भौंकने वाले चैनल महाराष्ट्र सरकार से माफ़ी मांगे

शिवसेना ने लिखा- ‘सुशांत की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को 110 दिन हो गए। इस दौरान मुंबई पुलिस की खूब बदनामी की गई. मुंबई पुलिस की जांच पर जिन्होंने सवाल उठाए, उन राजनेताओं को और कुत्तों की तरह भौंकने वाले चैनलों को महाराष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए। इन सभी ने जान-बूझकर महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा पर कलंक लगाने का प्रयास किया है. यह एक षड्यंत्र ही था. महाराष्ट्र सरकार को चाहिए कि वो उन पर मानहानि का दावा करे.’

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असफलताओं के बाद ड्रग्स के रास्ते पर चला गया सुशांत

शिवसेना ने सुशांत पर भी निशाना साधा. लिखा, ‘किसी युवक की इस तरह से मौत होना बिल्कुल अच्छा नहीं है. सुशांत विफलता और निराशा से ग्रस्त था. जीवन में असफलता से वह खुद को संभाल नहीं पाया. इसी कश्मकश में उसने मादक पदार्थों का सेवन करना शुरू कर दिया और एक दिन फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया.

मुंबई पुलिस मामले में बड़ी बारीकी से जांच कर रही थी. मुंबई पुलिस दुनिया की सर्वोत्तम पुलिस टीम है. लेकिन, मुंबई पुलिस कुछ छिपा रही है, किसी को बचाने का प्रयास कर रही है, ऐसा धुआं उड़ाया गया. उस दौरान सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के कई गुप्तेश्वरों का गुप्तरोग बढ़ गया.’

कंगना पर निशाना- किस बिल में छिपी है?
सामना ने कंगना को लेकर तंज कसा. लिखा- सुशांत की मौत को जिन्होंने भुनाया, मुंबई को पाकिस्तान और बाबर की उपमा दी, वह अभिनेत्री अब किस बिल में छिपी है? हाथरस में एक युवती से बलात्कार करके उसे मार डाला गया. वहां की पुलिस ने उस युवती के शरीर का अपमान करके अंधेरी रात में ही लाश को जला डाला. इस पर उस अभिनेत्री ने आंखों में ग्लिसरीन डालकर भी दो आंसू नहीं बहाए.

कंगना पर निशाना- किस बिल में छिपी है?
संजय राउत | कंगना रनौत

सामना में लिखा- सुशांत के पटना निवासी परिवार का उपयोग स्वार्थी और लंपट राजनीति करने के लिए केंद्र सरकार ने इसकी जांच जिस तेज गति से सीबीआई को दी, उसे देखते हुए ‘बुलेट ट्रेन’ की गति भी मंद पड़ गई होगी.

सुशांत एक चरित्रहीन और चंचल कलाकार था

मुंबई पुलिस ने इस मामले में जिस नैतिकता और गुप्त तरीके से जांच की, वह केवल इसलिए ताकि मृत्यु के बाद तमाशा न बने. लेकिन सीबीआई ने मुंबई आकर जब जांच शुरू की, तब पहले 24 घंटे में ही सुशांत का ‘गांजा’ और ‘चरस’ केस सामने आ गया. सीबीआई जांच में पता चला कि सुशांत एक चरित्रहीन और चंचल कलाकार था. बिहार की पुलिस को हस्तक्षेप करने दिया गया होता तो शायद सुशांत और उसके परिवार की रोज बेइज्जती होती.

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