रीवा के युवक के साथ हुई बड़ी घटना, हाथियों को देखने गए थे एक ने पीछा कर कुचल दिया1 min read

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भरतपुर ब्लाॅक के केल्हरी वनपरिक्षेत्र में हाथियों का दल इन दिनों सक्रिय हैं। उनकी 24 घंटे निगरानी करने के लिए टीम बनाकर जंगल भी वनकर्मी और अधिकारी हाथियों को मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं।

केल्हारी से खबर मिली है कि वहां के डिप्टी रेंजर सीताराम तिवारी टीम के साथ थे। उन्हें जंगल में एक हाथी ने उन्हें को कुचल कर मार डाला हैं। ये घटना शाम साढ़े चार बजे की है। इसमें रेंजर शिवपुर- घमाडांड़ के पास हाथी देखने गए थे। वे 11 हाथियों के दल की निगरानी कर रहे थे। इस दौरान एक हाथी ने उनका पीछा करके उन्हें कुचल कर मार डाला। सूचना पर केल्हारी वन परिक्षेत्र के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे। इस हादसे के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। यहां बता दें कि डिप्टी रेंजर रीवा के रहने वाले थे। जनवरी-फरवरी में रिटायर होने वाले थे। बीते साल से केल्हरी में पदस्थ रहे।

मृतक रीवा के रहने वाले थे, होने वाले थे रिटायर

यह वन अधिकारी की मौत का है पहला मामला

साल 2010 में जनहानि का पहला मामला कोरिया जिले में आया और दूसरा मामला 2014 रोबो गांव का था। यहा हाथी ने एक व्यक्ति को कुचल कर मार डाला। 2015 में सरई गहना गांव मे गिट्टी तोड़ने वाले मां-बेटे को हाथियों ने मार डाला था। वहीं चिरमिरी के पल्थाजाम में एक महिला को हाथी इसी साल बीते माह आधी को मार डाला। हाथी की चपेट में आने से वन अधिकारी की मौत का यह पहला मामला है।

कोरिया जिले के कॉरीडोर में हाथियों का दल सक्रिय क्षेत्र में निगरानी की जाती है मेन्युअली

कोरिया जिले में हाथियों की निगरानी मेन्युअली की जाती हैं। मतलब हाथी के मूवमेंट पर नजर रखने उसके पीछे-पीछे वनकर्मी चलते हैं। इन दिनों जंगल में हरियाली अधिक होने के कारण हाथियों के दल पर नजर रखना मुश्किल हो रहा है। वनकर्मियों की माने तो निगरानी के दौरान साथियों से अलग होने के कारण यह घटना हुई हैं। वहीं कोरबा सोमवार की रात 15 हाथियों का दल कोरिया जिले में दाखिल हो गया। इसकी निगरानी बैकुंठपुर, चिरमिरी सहित खडग़वां के वनकर्मी और अधिकारी कर रहे हैं। इसी बीच केल्हरी से डिप्टी रेंज के मौत की खबर आ गई। इन दिनों को कोरिया जिले में लगातार हाथियों का दल अपने कॉरीडोर में विचरण करने के लिए सक्रिय हैं।

जंगल में स्थाई निवास, यहां रेडियो कॉलर नहीं है

सीसीफ केके विशेन ने बताया जिन जंगलों में हाथियों का स्थाई निवास होता है। यहां रेडियों कॉलर इंस्टाॅल कर दिया जाता है। इससे उनकी निगरानी सेटेलाइट के माध्यम से 24 घंटे होती रहती है। सरगुजा और सुरजपुर जिले में हाथियों का स्थाई निवास माना जाता है। जबकि कोरबा और सरगुजा जिले से हाथियों का दल अपने तय कॉरीडोर से विचरण करने निकलते हैं और फिर वापस लौट आते हैं।

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