छत्तीसगढ़ में खुलेगा नारियल बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय: बृजमोहन1 min read

Chhattisgarh

रायपुर :कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में नारियल की खेती की व्यापक संभावनाआंे को देखते हुए नारियल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही नारियल विकास बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय छत्तीसगढ़ में शुरू किया जाएगा।

उन्होंने इस कार्यालय की स्थापना के राज्य शासन की ओर से भूमि तथा अन्य आवश्यक सहयोग देने का भरोसा दिया। श्री अग्रवाल आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में नारियल विकास बोर्ड, कोच्चि और छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी तथा प्रक्षेत्र वानिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित विश्व नारियल दिवस के राष्ट्रस्तरीय कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री रमेश बैस ने की। कार्यक्रम में नारियल विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राजू नारायण स्वामी, छत्तीसगढ़ शासन के अपर मुख्य सचिव कृषि श्री सुनिल कुजूर, राज्य योजना आयोग के सदस्य डॉ. डी.के. मारोठिया तथा इंदिरा गांधी कृृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर नारियल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।

कृषि मंत्री श्री अग्रवाल ने केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह के संदेश का वाचन करते हुए कहा कि नारियल एक कल्प वृक्ष है जो मानव जाति के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नारियल के वृक्ष का हर अंग उपयोगी है। देश में एक करोड़ से अधिक किसान नारियल की खेती पर आश्रित हैं और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।

नारियल हमारी सांस्कृतिक विरास और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा कि एशिया प्रशांत नारियल समूदाय (ए.पी.सी.सी.) के स्थापना दिवस पर प्रति वर्ष 2 सितम्बर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में बीस लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नारियल की खेती होती है और लगभग 240 करोड़ नारियल का उत्पादन होता है।

क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोन्डागांव, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी और रायपुर जिलों में नारियल की खेती की जा रही है।

बस्तर में नारियल की खेती की व्यापक संभावनाएं है। नारियल विकास बोर्ड द्वारा कोन्डागांव में नारियल विकास एवं अनुसंधान परियोजना संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि बस्तर में नारियल की खेती को बढ़ावा दिया जाए तो यह नक्सलवाद को खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है।

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