रीवा में कोरोना का असर; जिले में 83 फ़ीसदी अपराध में कमी

BC खेलते हैं तो सावधान रहें, ऐसे लगा दिया 44 लाख का चूना

छत्तीसगढ़

भिलाई। चिटफंड और फाइनेंस कंपनी की आड़ में बीसी खिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला उतई पुलिस ने दर्ज किया है। उतई थाना क्षेत्र के दो आरोपियों ने गांव के करीब 50 से अधिक लोगों से 44 लाख रुपये की ठगी की है। पीड़ितों ने पहले पुलिस से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की।

इसके बाद न्यायालय में परिवाद दायर किया। न्यायालय ने इस मामले में धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं के तहत अपराध दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद उतई पुलिस ने धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (अमानत में खयानत), 467, 468 और 471 (कूटरचना) व 34 (समान आशय से) के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस ने बताया कि उतई निवासी हुबलाल चंद्राकर ने न्यायालय में इस संबंध में परिवाद दायर किया था। परिवाद पर न्यायालय ने पाटन रोड ग्राम डुमरडीह निवासी आरोपी ज्ञान प्रकाश साहू और जामिनी कुमार सेनापति के खिलाफ अपराध दर्ज करने का आदेश दिया।

पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों ने चिटफंड कंपनी और फाइनेंस कंपनी में काम करने की बात बताकर प्रार्थी सहित आसपास के गांव के करीब 50 से 60 लोगों को अपने झांसे में लिया। आरोपियों ने सभी को बताया कि वे जिस कंपनी में काम करते हैं, वहां से लोगों को बिना किसी गारंटर के लोन मिल जाता है।
आरोपियों ने ग्रामीणों को झांसा दिया कि वे 20-20 लोगों का एक समूह बनाएंगे और समूह के हर सदस्य को महीने का 15 हजार रुपये जमा करना होगा। हर महीने तीन लाख रुपये जमा होंगे और लॉटरी सिस्टम से हर महीने एक सदस्य को तीन लाख रुपये दे दी जाएगी।

इससे उनके व्यापार या अन्य किसी काम को काफी मदद मिलेगी। इस स्कीम के झांसे में आकर ग्रामीणों ने हर महीने 15-15 हजार रुपये जमा करना शुरू किया। आरोपियों ने शुरुआती कुछ महीने में कुछ लोगों को लॉटरी के तहत पैसे भी दिए, इसके बाद पैसे देने बंद कर दिए और करीब 50 लोगों के करीब 44 लाख रुपये आरोपियों ने हड़प लिए। इसके बाद पीड़ित हुबलाल चंद्राकर ने न्यायालय में परिवाद दायर किया और आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया जा सका।

पुलिस के मुताबिक आरोपी ज्ञानप्रकाश साहू और जामिनी कुमार सेनापति ने समूह के सभी सदस्यों को तीन-तीन लाख रुपये के चेक दिए थे। रुपये न मिलने के बाद जब ग्रामीणों ने चेक को बैंक में लगाया तो हस्ताक्षर मेल न खाने के कारण चेक अनादरित हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने जब आरोपियों से संपर्क किया तो आरोपियों ने उन्हें रुपये देने के बजाए घुमाना शुरू कर दिया। पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपियों की पतासाजी शुरू कर दी है।