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Herbal Plants Farming: किसानों की दशा सुधार रही औषधीय पौधों की खेती, फसल खरीदने खेतों में जा रहे व्यापारी

Sandeep Tiwari
19 Sep 2021 10:12 AM GMT
Herbal Plants Farming: किसानों की दशा सुधार रही औषधीय पौधों की खेती, फसल खरीदने खेतों में जा रहे व्यापारी
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Herbal Plants Farming: किसानों के लिए औषधीय पौधों की खेती काफी फायदेमंद नजर आ रही है।

आज जिन किसानों ने औषधीय खेती (Herbal Farming) अपना ली है उनकी दशा दिनों दिन बेहतर होती जा रही है। औषधीय खेती के माध्यम से आय कमा रहे हैं। वर्तमान समय में औषधीय फसलों की खेती करने के बाद किसानों को बाजार के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। दवा बनाने वाली कंपनियां किसानों के खेत में जाकर किसानों से औषधि फसल खरीद रहे हैं। वही सरकार भी औषधि खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण (Training) के साथ सब्सिडी (Subsidy) दे रही है। आज हम बात करेंगे कुछ ऐसी औषधि खेती (Herbal Farming) के बारे में जिन्हें आसानी से किसान कर सकता है।

औषधीय गुणों से भरपूर स्टीविया (Stevia)


शुगर रोगियों के लिए स्टीविया (Stevia) का पौधा अत्यधिक लाभदायक होता है। स्टीविया (Stevia) की खेती (Stevia Farming) कर किसान प्रति एकड़ में करीब 6 लाख रुपए कमा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि देश के कई प्रांतों का मौसम स्टीविया (stevia) की खेती के लिए उपयुक्त है। स्टीविया के पौधे की ऊंचाई 60 से 70 सेंटीमीटर तक होती है। यह शक्कर से 25 से 30 गुना ज्यादा मीठा होता है।

पर्याप्त उत्पादन देता है इसबगोल (Isabgol)


ईसबगोल की खेती (Isabgol Farming) के लिए भारत भूमि अत्याधिक उपयोगी मानी गई है। विश्व में पैदा होने वाले कुल इसबगोल (isabgol) का 80 प्रतिशत भारत में उपजाया जाता है। प्रति एकड़ ईसबगोल (isabgol) का उत्पादन 15 कुंटल करीब है। वर्तमान समय में इस की सर्वाधिक खेती गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हो रही है।

सर्पगंधा खेती (Sarpagandha farming) सैकड़ों वर्ष पुरानी


विशेषज्ञों की मानें तो सर्पगंधा की खेती (Sarpagandha farming) सैकड़ों वर्ष पुरानी है। अनुमान के मुताबिक लगभग 400 वर्षों से सर्पगंधा (Sarpagandha) की खेती के प्रमाण मिल रहे। मुख्य रूप से इसकी खेती महाराष्ट्र (Maharashtra), केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में जा रही है।

शतावरी कम खर्च में ज्यादा कमाई


शतावरी (Shatwari) की खेती बहुत ही सरल तरीके से की जा सकती है। इसकी अनुमानित उपाय प्रति बीघा 4 कुंटल है। प्रति कुंटल शतावरी की कीमत 40 हजार के करीब है। प्रति एकड़ किसान इससे 4 से 6 लाख रुपए की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इसका मुख्य उत्पादन के हिमालय क्षेत्र तथा श्रीलंका में बहुतायत मात्रा में किया जा रहा है।

छोटे किसानों के लिए उपयुक्त है औषधीय खेती

औषधीय खेती के लिए किसानों को ज्यादा भूमि की आवश्यकता नहीं होती है। वही इस फसल से जितना मुनाफा हो रहा है लागत उसके अनुपात में कम है। 1 एकड़ का किसान भी इस औषधीय खेती को अपना कर उसमें पर्याप्त लाभ कमा सकता है।

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