MP: फ़र्ज़ी SC/ST Act लगवाना युवक को पड़ा मंहगा, उल्टा पड़ गया दांव, पढ़िए…1 min read

Bhopal Crime Madhya Pradesh

भोपाल। एससी एसटी एक्ट की दहशत देखिए, मात्र 20 साल के एक युवक पुलिस के पास पहुंचा और बताया कि वो अनुसूचित जाति से है। उसने 3 युवकों के खिलाफ मारपीट और जाति संबंधित गालियां देने का आरोप लगाया। मासूम सी पुलिस ने तीनों के खिलाफ SC-ST Act के तहत एफआईआर दर्ज की और सजा सुनिश्चित कराने के लिए कोर्ट में चालान पेश कर दिया।

कोर्ट में कार्यवाही के दौरान पता चला कि फरियादी युवक तो अनुसूचित जाति का है ही नहीं। फरियादी ने बहस के दौरान जाति प्रमाण पत्र पेश किया परंतु वो भी फर्जी निकला। अब कोर्ट ने फरियादी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

पुलिस ने नहीं की जांच?
इन दिनों देश भर में एससी एसटी एक्ट का विरोध किया जा रहा है। यह प्रकरण एक्ट के विरोध को उचित प्रमाणित करता है। बड़ा सवाल यह है कि प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद पुलिस ने जांच क्यों नहीं की। कम से कम इतनी जांच तो करनी ही थी कि फरियादी सच में अनुसूचित जाति से है या नहीं। मात्र 20 साल के एक युवक के कहने पर पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया, गिरफ्तार किया और न्यायालय में सजा के लिए पेश भी कर दिया। इन दिनों लोग सवाल कर रहे हैं कि ऐसे एक्ट को खत्म क्यों नहीं किया जाना चाहिए।

यह है मामला
शिव शक्ति नगर, छोला निवासी 20 वर्षीय सोनू पिता सुनील अहिरवार ने 9 अगस्त 2017 को छोला मंदिर थाने में एक केस दर्ज करवाया था। इस मामले में नक्का बंसोड़, सोनू सिंह भदौरिया और अजय अहिरवार के खिलाफ पुलिस ने जानलेवा हमले और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत केस किया था। छोला मंदिर पुलिस ने बगैर जाति प्रमाण-पत्र के ही तीनों आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर दिया। सुनवाई के दौरान सोनू ने अदालत में जाति प्रमाण-पत्र पेश किया। 9 जून 2012 को बना जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी निकला।

धोखाधड़ी का केस दर्ज 
अदालत के निर्देश पर छोला मंदिर पुलिस ने मामले के फरियादी सोनू के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया। शून्य पर दर्ज हुए इस मामले की केस डायरी एमपी नगर पुलिस को भेज दी गई। क्योंकि फर्जी जाति प्रमाण-पत्र उसने अदालत में पेश किया था। रविवार रात एमपी नगर पुलिस ने सोनू को धोखाधड़ी का आरोपी बनाया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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