भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन, लिवर कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद अंतिम सांस

क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का 60 वर्ष की उम्र में निधन। लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। नोएडा से अलीगढ़ लाया गया पार्थिव शरीर, आज होगा अंतिम संस्कार।

Update: 2026-02-27 05:08 GMT

मुख्य बातें

  • रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन
  • फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से थे पीड़ित
  • टीम इंडिया कैंप छोड़ पहुंचे थे रिंकू
  • शाम को अलीगढ़ में होगा अंतिम संस्कार

भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का शुक्रवार सुबह करीब 4:36 बजे निधन हो गया। वे 60 वर्ष के थे और लंबे समय से फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। कुछ दिनों से उनकी तबीयत गंभीर बनी हुई थी। पहले अलीगढ़ में इलाज चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।

भावुक क्षण

पिता की हालत बिगड़ने की खबर मिलते ही रिंकू सिंह टीम इंडिया का प्रैक्टिस सेशन छोड़ सीधे नोएडा पहुंचे थे।

टीम कैंप छोड़ पिता के पास पहुंचे थे रिंकू

पिता की तबीयत खराब होने की सूचना मिलने के बाद रिंकू सिंह मंगलवार को चेन्नई में चल रहे टीम इंडिया के अभ्यास सत्र को छोड़कर सीधे नोएडा पहुंचे थे। उन्हें टी-20 विश्वकप के प्रैक्टिस सेशन से हटना पड़ा था।

25 फरवरी को वे दोबारा टीम से जुड़े, लेकिन 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए सुपर-8 मुकाबले में वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। वे बतौर सब्स्टिट्यूट मैदान पर मौजूद रहे। अब पिता के निधन की सूचना के बाद वे अलीगढ़ लौट रहे हैं।

प्रिया सरोज भी अस्पताल में रहीं साथ

रिंकू सिंह की मंगेतर और मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज पिछले तीन दिनों से अस्पताल में परिवार के साथ मौजूद थीं। उनके पिता तूफानी सरोज ने बताया कि परिवार लगातार अस्पताल में था। देर रात घर लौटते समय ही निधन की सूचना मिली।

पार्थिव शरीर नोएडा से अलीगढ़ लाया जा चुका है। शुक्रवार शाम अंतिम संस्कार किया जाएगा।

संघर्षों से भरा रहा रिंकू का बचपन

रिंकू सिंह का क्रिकेट सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। परिवार में पांच भाई हैं और सभी आर्थिक रूप से एक-दूसरे का सहारा बने।

रिंकू और उनके भाई बाइक पर दो-दो सिलेंडर रखकर घरों और होटलों में डिलीवरी करते थे। मोहल्ले के दोस्तों के साथ मिलकर पैसे इकट्ठा कर गेंद खरीदते थे और स्थानीय मैदानों में अभ्यास करते थे।

मां ने उधार लेकर दिए थे पैसे

रिंकू ने बताया था कि शुरुआती दौर में क्लब क्रिकेट खेलने के लिए भी पैसे नहीं थे। मैच फीस के लिए घर से पैसे मांगने पर पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह मिलती थी। एक बार टूर्नामेंट खेलने के लिए उनकी मां ने दुकान से उधार लेकर एक हजार रुपये दिए थे।

अलीगढ़ के मॉडर्न स्कूल से क्रिकेट खेलने की शुरुआत करने वाले रिंकू ने इंटर-स्कूल टूर्नामेंट में 32 गेंदों पर 54 रन की नाबाद पारी खेलकर पहचान बनाई थी।

क्रिकेट जगत में शोक

रिंकू सिंह के पिता के निधन की खबर से क्रिकेट जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर लोग संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं और परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत देने की बात कह रहे हैं।

एक नजर में

  • फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से थे पीड़ित
  • टीम इंडिया कैंप छोड़ पहुंचे थे रिंकू
  • प्रिया सरोज अस्पताल में रहीं मौजूद
  • संघर्षों से भरा रहा बचपन
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