वर्ष की सबसे बड़ी चतुर्थी 10 जनवरी को, 27 वर्ष बाद बना संयोग

इस वर्ष की सबसे बड़ी चतुर्थी 10 जनवरी को है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकटा चौथ या संकष्टी चतुर्थी के नाम से लोग जानते हैं। मंगलवार 10 जनवरी को होने से यह अंगारकी चतुर्थी कहलाएगी।

Update: 2023-01-07 10:21 GMT

इस वर्ष की सबसे बड़ी चतुर्थी 10 जनवरी को है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकटा चौथ या संकष्टी चतुर्थी के नाम से लोग जानते हैं। मंगलवार 10 जनवरी को होने से यह अंगारकी चतुर्थी कहलाएगी। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो मंगलवार को नक्षत्र की अनुकूलता के कारण चतुर्थी सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है। जिसमें की गई साधना, उपासना लोगों को मनोवांछित फल प्रदान करती है।

बाधाएं दूर होकर सिद्ध हो जाते हैं कार्य

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 12 मास में आने वाली 24 चतुर्थीयों में 12 शुक्ल पक्ष की और 12 कृष्ण पक्ष की रहती हैं। माघ मास में आने वाली चतुर्थी सबसे बड़ी मानी जाती है। जिसके कारण महिलाओं द्वारा इस मौके पर व्रत भी रखा जाता है। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। मंगलवार के दिन आश्लेषा नक्षत्र होने से सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होता है। साथ ही मंगलवार के दिन चतुर्थी आने से अंगारकी चतुर्थी का योग बनता है। इस दौरान कनया अथवा बालक के शुभ विवाह में बाधा आ रही हो तो इस दिन का उपयोग कर लेने से अथवा चौथ का पूजन करने से संकट बाधाएं दूर होकर कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

करना चाहिए विशिष्ट अनुष्ठान

अश्लेषा नक्षत्र में इस बार मंगलवार के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में अंगारकी चतुर्थी होने से यह विशेष प्रबल हो गई है। इस दौरान मंदिरों में भी भारी मात्रा में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक नक्षत्र मंडल की गणना से देखा जाए तो इस तरह का संयोग 27 वर्ष के बाद बनता है। इसलिए इस दिन व्रत के साथ विशिष्ट अनुष्ठान भी लोगों द्वारा करना लाभकारी रहेगा।

Tags:    

Similar News