Shami Siddhi Vinayak Temple: छत्तीसगढ़ में स्थित है 1312 वर्ष पुराना श्री गणेश का चमत्कारी मंदिर, तंत्र विद्या के द्वारा हुआ था निर्माण

Siddhi Vinayak Temple Chhattisgarh: गणेश उत्सव के इस मौके पर हम छत्तीसगढ़ के एक ऐतिहासिक, दुर्लभ और चमत्कारी मंदिर के बारे में जानकारी देने जा रहें हैं जो की कभी तंत्र विद्या का केंद्र था।

Update: 2022-09-03 08:05 GMT

Siddhi Vinayak Shami Ganesh Mandir Chhattisgarhइस समय गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) की धूम पूरे देश है। कोई भगवान श्री गणेश (Bhagwan Ganesh) की प्रतिमा अपने घर में, मोहल्ले में स्थापित कर उनकी पूजा आराधना (Ganesh Aradhna) में लगा हुआ है। तो वहीं जिन्होंने गणेश प्रतिमा की स्थापना नहीं की है वह भी अपने आसपास तथा देश-प्रदेश के गणेश मंदिरों (Ganesh Temple) में जाकर भक्ति आराधना कर रहे हैं। गणेश उत्सव के इस मौके पर हम छत्तीसगढ़ के एक ऐतिहासिक, दुर्लभ और चमत्कारी मंदिर के बारे में जानकारी दे रहे हैं। कहते हैं यह मंदिर 1312 वर्ष पुराना है (Oldest Ganesh Temple) । यहां तंत्र विद्या (Tantra Vidhya) सीखने का बहुत बड़ा केंद्र था। साथ ही बताया गया है कि इस मंदिर का निर्माण भी तंत्र सिद्धि के द्वारा किया गया था। आइए जाने मंदिर के संबंध में।

कहां स्थित है यह मंदिर

मंदिर के महत्व और उसकी विशेषताओं के संबंध में जानने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि यह मंदिर कहां स्थित (Where Is Siddhivinayak Shri Shami Ganesh Temple) है। इतिहासकार बताते हैं कि मंदिर का निर्माण 1312 वर्ष पहले हुआ था (Shami Ganesh Temple History) । मंदिर छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के नवागढ़ (Bemetara District Navagarh) में स्थित है। इस मंदिर को सिद्धिविनायक श्री शमी गणेश मंदिर (Siddhivinayak Shri Shami Ganesh Temple) के नाम से जाना जाता है।

पूरी होती है मनोकामना

सिद्धिविनायक श्री शमी गणेश मंदिर के संबंध में कहा जाता (Shami Ganesh Temple Maanyata) है कि जो भी भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस मंदिर की खासियत है कि मंदिर के के सामने शमी का वृक्ष (Shami Tree) है। जिसे साक्षात भगवान शनिदेव माना गया है। शमी का वृक्ष वैसे ही बहुत ही शुभ और फलदाई होता है। भगवान श्री गणेश को हर दिन पूजा में शमीपत्र चढ़ाया जाता है। गणेश उत्सव के समय 11 दिनों तक हर वर्ष यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं।

क्या है मंदिर का इतिहास

मंदिर के संबंध में बताया जाता है कि यह बहुत पुराना और पूर्व मुखी मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना की कड़ी पांडवों से जुड़ी हुई है। इतिहासकारों की मानें तो मंदिर बाहर 1312 वर्ष पुराना है। बताते हैं कि मंदिर की स्थापना विद्या से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को संवत 646 ने सन 704 को किया गया था। मंदिर का निर्माण राजा ने नरबर साय द्वारा करवाया गया था। मंदिर अष्टकोण है साथ में अष्टकोण कुआं भी है। मंदिर के संबंध में वर्णन गणेश पुराण (Ganesh Puran) में मिलता है। अपनी तरह का यह भारतवर्ष में सिर्फ 2 मंदिर हैं। जिसमें एक छत्तीसगढ़ और दूसरा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है।

होती थी तांत्रिक क्रियाएं

मंदिर के संबंध में बताया गया है कि इसका निर्माण तंत्र सिद्धि के द्वारा किया गया था। ऐसे में इस मंदिर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। किसी जमाने में यह मंदिर तंत्र विद्या (Tantra Vidhya) के लिए प्रसिद्ध था। बताया जाता है कि भारत देश के कोने-कोने से लोग यहां तंत्र विद्या सीखने आया करते थे।

स्थित है शमी का विशाल वृक्ष

मंदिर के सामने शमी का वृक्ष है। माना जाता है इसे पांडवों ने लगाया था। भगवान श्री गणेश की पूजा में शमीपत्र का उपयोग किया जाता है। साथी यहां आने वाले श्रद्धालु भी शमी पत्र भगवान श्री गणेश को अर्पित करते हैं। मंदिर के सामने शमी वृक्ष होना दुर्लभ संयोग माना गया है।

मौजूद हैं कई शिलालेख

इस मंदिर के आसपास खुदाई में कई सारी मूर्तियां मिली है। साथ ही कई शिलालेख भी मिले हैं। शिलालेख में किस लिपि और भाषा का उपयोग किया गया है यह आज तक नहीं जाना जा सका है। इस शिलालेख को पढ़ने का प्रयास लगातार चल रहा है लेकिन आज तक पता नहीं चल सका है।

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