Bhaum Pradosh Vrat 2022: 29 मार्च को है भौम प्रदोष व्रत, जानिए इसके महत्व, पूजा विधि और कथा के बारे में

आइये जानें भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat) से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियां

Update: 2022-03-23 09:26 GMT

Bhaum Pradosh Vrat 2022

Bhaum Pradosh Vrat 2022, Bhaum Pradosh Vrat Katha Hindi Mei: हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। हमारी आस्था में व्रत और त्योहारों का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। लोग इसे बड़ी आस्था के साथ मनाते हैं। कई बार लोगों का यह भी कहना है कि जीवन से जुडी कई समस्याओं का निदान पूजा तथा व्रत के माध्यम से हो जाता है। वैसे तो मूल व्रत त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का होता है। लेकिन इसमें पड़ने वाले दिन इसे और महत्वपूर्ण बना देते हैं।

Bhaum Pradosh Vrat: क्यों कहते हैं भौम प्रदोष व्रत?

बताया गया है कि भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से इंसान के कई कष्टों का निवारण भगवान भोलेनाथ करते हैं। बताया जाता है कि जब प्रदोष सोमवार के दिन आता है तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। इसी तरह अगर मंगलवार को प्रदोष पड़ जाए तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। 

शिवजी का मिलता है आशीर्वाद

प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा की जाती है। ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । साथ ही बताया गया है कि अगर किसी के विवाह में अड़चन आ रही है तो वह भी दूर हो जाता है। अगर किसी के विवाह में मंगल दोष है तो उसे भौम प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए।

Bhaum Pradosh Vrat: क्या है पूजन विधि?

भौम प्रदोष व्रत पूजन (Bhaum Pradosh Vrat Poojan Vidhi) की विधि समझना बहुत सरल है। कहा गया है कि भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करना ज्यादा कठिन नहीं है इन्हें मन से अगर पूजा जाए तो यह अवश्य प्रसन्न होते हैं। भौम प्रदोष व्रत करने के लिए सूर्योदय के पहले उठकर स्नान करें। इसके पश्चात विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ और हनुमान जी का पूजन करें।

कहा गया है कि शाम के समय भगवान शंकर जी की विधि विधान से पुनः पूजा करना चाहिए। पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन सात्विक चीजों का भगवान भोलेनाथ को भोग लगाएं और उसी का प्रसाद ग्रहण करें।

एक नगर में एक वृद्धा निवास करती थी। उसके मंगलिया नामक एक पुत्र था। वृद्धा की हनुमान जी पर गहरी आस्था थी । वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमान जी की आराधना करती थी। उस दिन वह न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी। वृद्धा को व्रत करते हुए अनेक दिन बीत गए।

Bhaum Pradosh Vrat Katha (भौम प्रदोष व्रत कथा)

एक बार हनुमान जी ने उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने की सोची । हनुमान जी साधु का वेश धारण कर वहां गए और पुकारने लगे -"है कोई हनुमान भक्त जो हमारी इच्छा पूर्ण करे?' पुकार सुन वृद्धा बाहर आई और बोली- 'आज्ञा महाराज?' साधु अ वेशधारी हनुमान बोले- 'मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा। तू थोड़ी जमीन लीप दे।' वृद्धा दुविधा में पड़ गई। अंततः हाथ जोड़ बोली- "महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी ।"

साधु तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- 'तू अपने बेटे बुला। मै उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाउंगा।'

वृद्धा के पैरों तले धरती खिसक गई, परंतु वह प्रतिज्ञाबद्ध थी । उसने मंगलिया को बुलाकर साधु के सुपुर्द कर दिया । मगर साधु रूपी हनुमान जी ऐसे ही मानने वाले न थे। उन्होंने वृद्धा के हाथों से ही मंगलिया को पेट के बल लिटवाया और उसकी  पीठ पर आग जलवाई। आग जलाकर, दुखी मन से वृद्धा अपने घर के अन्दर चली गई ।

इधर भोजन बनाकर साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा 'मंगलिया को पुकारो, ताकि वह भी आकर भोग लगा ले।' इस पर वृद्धा बहते आंसुओं को पौंछकर बोली - 'उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न पहुंचाओ।' लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो वृद्धा ने मंगलिया को आवाज लगाई। पुकारने की देर थी कि मंगलिया दौड़ा-दौड़ा आ पहुंचा । मंगलिया को जीवित देख वृद्धा को सुखद आश्चर्य हुआ । वह  साधु के चरणों में गिर पड़ी । साधु अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए। हनुमान जी को अपने घर में देख वृद्धा का जीवन सफल हो गया । सूत जी बोले- "मंगल प्रदोष व्रत से शंकर (हनुमान भी रुद्र हैं) और पार्वती जी इसी तरह भक्तों को साक्षात् दर्शन दे कृतार्थ करते हैं ।"

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