सिंगरौली में समदड़िया बिल्डर्स को जल्द से जल्द 8 एकड़ की सरकारी जमीन मिल जाए, जमा करा दिए अधूरे दस्तावेज
ब्लॉक कॉलोनी और आर आई क्वार्टर के 8 एकड़ भूमि के बदले समदड़िया बिल्डर्स को बिलौंजी में जहां 290 सरकारी आवास बना कर देने हैं वह जमीन मूलतः कृषि विभाग की थी और उस पर उसे बीज फार्म हाउस बनाना था।
सिंगरौली। जिला मुख्यालय बैढ़न की बेशकीमती 8 एकड़ सरकारी जमीन व्यवसायिक उपयोग के लिए जल्द से जल्द समदड़िया बिल्डर्स (Samdariya Builders) को हस्तांतरित हो सके, इसके लिए हाउसिंग बोर्ड ने पूरा फॉर्म भरे बिना ही टीएंडसीपी (Town & Country Planning) में एनओसी के लिए फाइल जमा कर दी। बिल्डर, बोर्ड तथा कंसलटेंसी एजेंसी के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से आजिज आ कर, T&CP ने तीनों को जल्द पूरा फॉर्म भरने तथा मूल दस्तावेजों की कमी पूरी करने के लिए कहा है।
सूत्रों के मुताबिक ब्लॉक कॉलोनी और आर आई क्वार्टर के 8 एकड़ भूमि के बदले समदडिया को बिलौंजी में जहां 290 सरकारी आवास बना कर देने हैं वह जमीन मूलतः कृषि विभाग की थी और उस पर उसे बीज फार्म हाउस बनाना था। हाउसिंग बोर्ड की ओर से टीएंडसीपी में जो फाइल जमा कराई गई है उसके साथ धारा-29-1 के तहत जो फॉर्म प्रस्तुत किया गया है, वह तक पूरा नहीं भरा गया है।
आधे-अधूरे भरे फॉर्म और जरूरी दस्तावेजों के अभाव में यह तक पता नहीं चल रहा है कि उक्त जमीन का मद परिवर्तन भी हुआ है या नहीं। जमीन के खसरा नंबरों को लेकर भी कंफ्यूजन है। उप संचालक ने हाउसिंग बोर्ड सहित समदड़िया बिल्डर्स और उसकी कंसलटेंसी एजेंसी के इस रवैये पर आपत्ति जताते हुए स्थिति साफ़ करने तथा सभी सम्बंधित दस्तावेजों को विधिवत लगाने के लिए कहा है।
फीस के कैलकुलेशन में भी गड़बड़ियां
सूत्रों के मुताबिक समदड़िया बिल्डर्स प्रा. लि. की कंसलटेंसी एजेंसी मेहता एंड संस द्वारा भी अभी तक न तो पूरे दस्तावेज भेजे गए हैं और न ही ले-आउट रिपोर्ट पूरी भेजी गई है। प्रारंभिक जांच में विकास शुल्क के कैलकुलेशन में भी गड़बड़ी पाई गई है। ऐसे में विभाग के अफसरों को फोन पर ही जानकारी जुटा कर और दस्तावेजों की फोटो कॉपी से काम चलाना पड़ रहा है।
हाउसिंग बोर्ड यूँ दिखा रहा जल्दबाजी
समदड़िया को 8 एकड़ जमीन व्यवसायिक उपयोग के लिए तभी मिल पाना संभव हो सकेगा जब वह बिलौंजी में चयनित जमीन पर 290 सरकारी आवासों में से 25 प्रतिशत आवास बना कर प्रशासन को सौंपेगा। नियमानुसार इसके बिना उसे 8 एकड़ में से एक इंच जमीन नहीं मिल सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक हाउसिंग बोर्ड के अफसर इस फिराक में हैं कि, सरकारी आवासीय कॉलोनी के नाम पर टीएंडसीपी से आधे-अधूरे कागजातों पर ही एनओसी ले कर काम शुरू करा दिया जाए, ताकि समदड़िया को जमीन हस्तांतरित किए जाने की फाइल आगे बढ़ सके।
सीधी में तो मद परिवर्तन तक नहीं हुआ
सिंगरौली जैसा एपीसोड सीधी जिले में भी दोहराया जा रहा है। यहां भी हाउसिंग बोर्ड की ओर से टीएंडसीपी में एनओसी के लिए जो फाइल सम्मिट की गई है, उसमें भी दस्तावेजों का अभाव है। सूत्रों के मुताबिक सीधी में री-डेंसीफिकेशन योजना के तहत ठेका पाने वाली भोपाल की डीजेवी कंस्ट्रक्शन को सम्राट चौक की 4.72 एकड़ जमीन को हासिल करने सीधी खुर्द में जहाँ सरकारी निर्माण कार्य करने हैं उस जमीन का तो अभी तक मद परिवर्तन ही नहीं हुआ है। बताया जाता है कि उक्त कृषि भूमि को आवासीय में बदले बिना ही बोर्ड द्वारा टीएंडसीपी में आवेदन कर दिया गया।
री-डॅसीफिकेशन योजना के तहत बिलौंजी में सरकारी आवसीय का प्रस्ताव हाउसिंग बोर्ड की ओर से प्राप्त हुआ था। प्रारंभिक जांच में जो कमियां नजर आई हैं, उनसे हाउसिंग बोर्ड, बिल्डर्स और उसकी कंसलटेंसी एजेंसी को अवगत करा दिया है। -इंद्र नारायण, डिप्टी डायरेक्टर, टीएंडसीपी, सिंगरौली