वीर सावरकर की असली आवाज सुनकर तिलमिला जायेंगे आप
Veer Savarkar Jayanti 2022: महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रन्तिकारी, समाज सुधारक, इतिहासकार व राष्ट्रवादी नेता तथा विचारक थे जिन्हे प्रायः स्वातन्त्र्यवीर , वीर सावरकर के नाम से सम्बोधित किया जाता है
Swatantra Veer Savarkar/Veer Savarkar Jayanti : वीर सावरकर जिनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) था. वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रन्तिकारी, समाज सुधारक, इतिहासकार व राष्ट्रवादी नेता तथा विचारक थे जिन्हे प्रायः स्वातन्त्र्यवीर , वीर सावरकर (Swatantra Veer Savarkar) के नाम से सम्बोधित किया जाता है. सावरकर को हिंदुत्व विचारधारा का जनक माना जाता है उन्होंने ही सर्वप्रथम हिंदुत्व शब्द का प्रयोग किया था, मुस्लिम लीग के गठन होने के 6 सालों के बाद वीर सावरकर ने हिन्दू महासभा के नाम से राष्ट्रवादी संगठन की स्थापना की थी। वे एक वकील, राजनीतिज्ञ, कवि, लेखक और नाटककार भी थे। उन्होंने हिन्दुओं के अपने धर्म में घरवापसी के लिए निरंतर प्रयासरत रहे और उसके लिए उन्होंने आंदोलन भी चलाए थे। सावरकर एक कट्टर तर्कबुद्धिवादी विचारधारा के व्यक्ति थे जो की सभी धर्मों के रूढ़िवादी मान्यताओं और विश्वासों का विरोध करते थे।
अटल बिहारी बाजपेयी ने बताये थे सावरकर के मायने (Atal bihari vajpayee on veer savarkar)
सावरकर (Savarkar) माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व, सावरकर माने तर्क, सावरकर माने तारुण्य, सावरकर माने तीर, सावरकर माने तलवार, सावरकार माने तिलमिलाहट... सागरा प्राण तड़मड़ला, तड़मड़ाती हुई आत्मा, सावरकर माने तितीक्षा, सावरकर माने तीखापन, सावरकर माने तिखट। कैसा बहुरंगी व्यक्तित्व! कविता और क्रांति! कविता और भ्रांति तो साथ-साथ चल सकती है, लेकिन कविता और क्रांति का साथ चलना बहुत मुश्किल है। कविता माने कल्पना, शब्दों के संसार का सृजन, ऊंची उड़ान। कभी-कभी ऊंची उड़ान में धरातल से पांव उठ जाएं, वास्तविकता से नाता टूट जाए तो कवि को इसकी शिकायत नहीं होगी। उसके आलोचक भी इस बात के लिए टीका नहीं करेंगे। मगर सावरकर जी का कवि ऊंची से ऊंची उड़ान भरता था, मगर उन्होंने यथार्थ की धरती से कभी नाता नहीं तोड़ा। सावरकर जी में ऊंचाई भी थी और गहराई भी थी।
गांधीजी को मांस खाने व शराब के सेवन की सलाह दी थी।
1906 में गांधीजी से सावरकर की मुलाकात लंदन में थी उसके बाद गांधीजी सावरकर से मिलने इंडिया हॉउस उनके कमरे में जाते हैं जहाँ पर सावरकर जी झींगे ताल रहे होते हैं, और उन्होंने गांधीजी को खाने पर बुलाया था, दोनों की बातचीत शुरू होती है गांधीजी सावरकर को सलाह देते हैं की अंग्रेजों के खिलाफ उनकी नीति जरुरत ज्यादा उग्र और आक्रामक है। सावरकर गांधीजी से पहले खाना खाने का आग्रह करते हैं इस पर गांधीजी ने यह कहते हुए माफी मांग ली कि वे मांस-मदिरा (Non Vegetarian) का सेवन नहीं करते. इस पर सावरकर ने गांधीजी का हल्का-फुल्का मजाक उड़ाते हुए कहा था, 'कोई कैसे बिना गोश्त खाए अंग्रेज़ों की ताक़त (British Colony) को चुनौती दे सकता है?' उस रात गांधी सावरकर के कमरे से अपने सत्याग्रह आंदोलन के लिए उनका समर्थन लिए बगैर ख़ाली पेट बाहर चले गए थे।
सावरकर गाय को पूजनीय नहीं मानते थे (Savarkar on Cow)
सावरकर के अनुसार ईश्वर सर्वोपरि है और उसके बाद कोई है तो वह इंसान ही है जिनके बाद पशु आते हैं. वे गाय के बारे में लिखते हैं गाय एक ऐसा पशु है जिसके पास मूर्ख से मूर्ख इंसान के बराबर भी बुद्धि नहीं होती है, गाय को दैवीय मानकर इसे मनुष्य से ऊपर समझना अपमान है. हालांकि सावरकर गाय को पूजनीय न कहते हुए भी, गाय के प्रति खुद को समर्पित कहते थे, और गाय की उपयोगिता पर कई तर्क भी दिए हैं। और गाय के सर्वोत्तम उपयोग के लिए गाय के अच्छी देखभाल करने के लिए भी कहा है।
सावरकर के अनुसार हिन्दू समाज 7 बेड़ियों में जकड़ा हुआ है
स्पर्शबंदी: निम्न जातियों का स्पर्श तक निषेध, अस्पृश्यता
रोटीबंदी: निम्न जातियों के साथ खानपान निषेध
बेटीबंदी: खास जातियों के संग विवाह संबंध निषेध
व्यवसायबंदी: कुछ निश्चित व्यवसाय निषेध
सिंधुबंदी: सागरपार यात्रा, व्यवसाय निषेध
वेदोक्तबंदी: वेद के कर्मकाण्डों का एक वर्ग को निषेध
शुद्धिबंदी: किसी को वापस हिन्दूकरण पर निषेध