जिस School में Quarantine किया, 14 दिन में मजदूरों ने वहां की सूरत ही बदल दी
लॉकडाउन के चलते फंसे अलग-अलग प्रदेशों के 54 मजदूरों को एक गाँव के School में Quarantine किया गया. इनके 14 दिनों के Quarantine दौर के वक़्त गा
लॉकडाउन के चलते फंसे अलग-अलग प्रदेशों के 54 मजदूरों को एक गाँव के School में Quarantine किया गया. इनके 14 दिनों के Quarantine दौर के वक़्त गाँव के सरपंच की सेवा से ये मजदूर इतने खुश हुए की उन्होंने सरपंच को कुछ गिफ्ट करने का प्लान किया. इसके लिए उन्होंने School को रेनोवेट करके गाँव और सरपंच को गिफ्ट में दे दिया.
दरअसल ये मजदूर कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लागू किए गए लॉकडाउन में राजस्थान के सीकर जिले में क्वारनटीन किए गए थे. इन सभी को जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कस्बे पलसाना के सरकारी स्कूल में बनाए गए क्वारनटीन सेंटर में ठहराया गया था.
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स्कूल में रहने के दौरान इन मेहनतकश मजदूरों ने ऐसा कदम उठाया जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है. बता दें कि यहां रह रहे मजदूरों ने समय का सदुपयोग करते हुए स्कूल की सूरत ही बदल दी, इसके पीछे की उनकी वजह भी भावुक करने वाली है. जिस तरह मजदूरों ने खाली समय में स्कूल के रंग-रोगन का बीड़ा उठाया और वे दूसरों के लिए मिसाल बन गए.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार पलसाना कस्बे के शहीद सीताराम कुमावत और सेठ केएल ताम्बी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश के 54 मजदूर ठहरे हुए हैं. ये सभी लोग पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और इनका क्वारनटीन पीरियड भी पूरा हो गया है.
मजदूरों ने बताया कि पृथक वास के दौरान सरपंच और गांव के लोगों ने उनके रहने के लिए बहुत ही बढ़िया व्यवस्था की थी. मजदूर इस व्यवस्था से इतना खुश थे कि बदले में गांव के लिए कुछ करना चाहते थे और इसी सोच में उन्होंने स्कूल के रंग-रोगन का काम शुरू कर दिया.
मजदूरों ने बीते शुक्रवार को सरपंच से रंग-रोगन का सामान लाकर देने की मांग की. फिर सरपंच और विद्यालय कर्मियों की ओर से सामग्री उपलब्ध कराने के बाद मजूदरों ने विद्यालय में रंगाई पुताई कर स्कूल को ऐसा चमका दिया कि प्रशासन भी तारीफ किए बिना नहीं रह सका.
हाल ही में शिविर का निरीक्षण करने के लिए आए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जगत सिंह पंवार ने भी स्कूल को देखा तो वो इससे प्रभावित हो गए. उन्होंने केंद्र में ठहरे लोगों से काफी देर तक चर्चा भी की. पंवार ने मजदूरों के विचार सुनकर उनकी तारीफ की और कहा कि उनका यह कार्य अन्य केंद्रों के लिए ‘रोल मॉडल’ बन गया है.