मार्केट में आने वाला है 20 रुपये का सिक्का, इस बार ये होगा ख़ास

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Update: 2021-02-16 06:08 GMT
भोपालः बाजार में अब एक, दो, पांच और दस रुपए के सिक्के के साथ अब बीस का सिक्का भी जल्द ही नज़र आने वाला है। हालांकि, इस सिक्के को बाज़ार में लाने की तैयारी पिछले साल से ही की जा रही है। साथ ही, ये भी दावा किया गया था कि, साल 2018 के अंत तक इसे बाज़ार में भेज दिया जाएगा। लेकिन, कुछ प्रक्रियात्मक विलंब के कारण उस समय इसे बाज़ार में नहीं उतारा गया। हालांकि, पिछले दिनों पेश हुए केन्द्रीय बजट ( central budget ) में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर बीस रुपए का सिक्का जारी करने की घोषणा की। राजधानी भोपाल के जाने माने अकाउंटिंग कंसलटेंट मयंक चतुर्वेदी का कहना है कि, आरबीआई द्वारा 20 रुपये के सिक्के को जारी करने के पीछे सरकार का उद्देश्य लोगों को छुट्टे पैसों की किल्लत से छुटकारा दिलाना है।

फायदे और नुकसान

फिलहाल, मार्केट में पांच और दस रुपए के सिक्के और नोट दोनों ही चल रहे हैं, लेकिन अभी बीस का नोट जारी नहीं हुआ है। शहर के व्यापारियों का कहना है कि, बाज़ार में आने वाले बीस रुपये के सिक्के से जहां लोगों को फायदा है वहीं नुकसान भी है। फायदा ये है कि, नोट के मुकाबले सिक्के की लाइफ काफी ज्यादा होती है। नोट के फटने का डर रहता है, लेकिन सिक्के का नहीं। इस सिक्के के बाज़ार में आने से लोगों को नोट की तरह इसके फटने, खराब होने का डर नहीं रहेगा। वहीं, इसका ज्यादा नुकसान छोटे दुकानदार को हो सकता है। क्योंकि, छुट्टे पैसे की ही बात करें तो, जैसा कि, पहले बताया गया कि, बाज़ार में एक, दो, पांच और दस रुपए के सिक्के पहले से ही मौजूद हैं, जो छुट्टों की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त हैं। वहीं, छोटे और मझोले दुकानदार सिक्का लेने से परहेज करते हैं। उसका कारण ये है कि, वजन के कारण सिक्के न तो ग्राहक वापस लेना चाहता है और न ही बैंक में जमा करने वाले गिनती करना चाहते हैं। जिसके चलते दुकानदारों के पास ढेर सारी रेजगारी जुड़ जाती है। कई जगहों पर तो दुकानदार को कागज के नोट लेने के लिए कीमत से अधिक सिक्कों का भुगतान तक करना पड़ता है।

सिक्के चले पर उन्हे लेने से कोई इंकार न करें

खास तौर पर शहर की नवबहार सब्जी मंडी के अधिकांश फुटकर व्यापारियों का कहना है कि, उन्हें सिक्के लेने में कोई परेशानी नहीं, लेकिन ऐसा पैसा लेने का क्या मतलब जिसे ग्राहक ही ना लेना चाहे। माल खरीदने जाओ तो बड़े दुकानदार बैंक का हवाला देते हुए रेज़गारी लेने से इंकार कर देते हैं। व्यापारियों का कहना है कि, बीस रुपए का सिक्का आने से खुल्ले पैसों की किल्लत में बहुत हदतक कमी आएगी। पर इन सिक्कों को लेने में ग्राहक, बैंक और व्यापारी को सजग करने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए। तभी बाज़ार में इसका चलन अवरुद्ध नहीं होगा।"

दो धातुओं से बनेगा 20 रुपए का सिक्का

पहले तो 20 रुपए के इस सिक्के को 2018 के दिसंबर तक बाजार में लाने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कुछ कारणों से इसे उस समय जारी नहीं किया गया। लेकिन अब वित्त मंत्री के बयान के बाद बीस के सिक्को को बाज़ार में आने की प्रबलता ने एक बार फिर गति पकड़ ली है। हालांकि, अब तक ये स्प्ष्ट नहीं है कि, नया बीस रुपये का सिक्का बाज़ार में कब तक आएगा। जानकार मान रहे हैं कि, इल बार साल के अंत तक इसके बाज़ार में उतारे जाने की प्रबलता ज्यादा है। बता दें कि, इस सिक्के को गस रुपये के सिक्के की तरह दो धातुओं को मिलाकर बनाया डिज़ाइन किया गया है। यह सिक्का लंबे समय तक चलने वाला होगा ताकि बाजार में चल रही मुद्रा की आयु बढ़ाई जा सके, क्योंकि नोट कुछ ही सालों में खराब होकर चलन में नहीं रह पाते।

20 रुपए के सिक्के की थीम

जानकारी के अनुसार, 20 रुपए के सिक्के की थीम भी मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर होंगी जैसे डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण, डिफेंस सेक्टर और स्वच्छ भारत अभियान। अब सवाल ये उठता है कि आखिर रिजर्व बैंक को 20 रुपए के सिक्के लाने की तैयारी क्यों करनी पड़ी?

मुद्रा की लागत कम करने की कवायद

दरअसल भारतीय अर्थव्यवस्था में 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के दस और बीस रुपए के पुराने नोट हैं जो धीरे-धीरे चलन से बाहर हो जाते हैं और रिजर्व बैंक के पास वापस आ जाते हैं। इतने नोटों की भरपाई करने में करोड़ों रुपए का खर्च आएगा और ऐसा माना जाता है कि चलन में पांच साल रहने पर नोट खराब हो जाते हैं। सिक्कों की आयु ज्यादा होती है इसलिए 20 रुपए का सिक्का बाजार में उतारा जा रहा है।

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