संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' फिल्म को लेकर इस केन्द्रीय मंत्री ने दिया बड़ा बयान

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Update: 2021-02-16 05:56 GMT
भोपाल। एक तरफ जहां संजय दत्त की बायोपिक संजू को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कई मैसेज वायरल हो रहे हैं। एक ओर संजय दत्त के जीवन की कहानी को मार्मिक बताया जा रहा था तो कोई उनके ऊपर चले आपराधिक प्रकरणों पर सवाल उठा रहा है। अब केन्द्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने फिल्म संजू और संजय दत्त के किरदार पर सवाल उठा दिए हैं। यह वही सत्यपाल सिंह हैं, जिन्होंने बागपत में आयोजित एक कार्यक्रम में खुद को एक समय मुंबई का सबसे बड़ा गुंडा बताया था।

भोपाल पहुंचे केन्द्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने फिल्म संजू पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपराधियों का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। संजय दत्त की सच्चाई सभी को पता है। अपने बयान में दाऊद का जिक्र करते हुए सत्यपाल सिंह ने कहा कि फिल्मों में अपराधियों की सही स्थिति दिखाना चाहिए। आपको बता दें कि सत्यपाल सिंह पूर्व में मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद पर भी रह चुके हैं।

1980 में महाराष्ट्र कैडर से IPS अधिकारी बनने वाले सत्यपाल सिंह 1990 के दशक में मुंबई क्राइम ब्रांच के ज्वॉइंट कमिश्नर इन्चार्ज थे। उन्होंने ही मुंबई क्राइम चीफ रहते हुए अंडरवर्ल्ड के खिलाफ स्पेशल पुलिस टास्क फोर्स बनाया। उस समय मुंबई में छोटा राजन, छोटा शकील और अरुण गवली गैंग का बोलबाला था। उनके ही सेवा काल में दया नायक, प्रदीप शर्मा, विजय सालस्कर जैसे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट तैयार हुए थे।

आपको बता दें कि 90 के दशक में मुंबई में अपराध की कमर तोड़ने वाले पुलिस अधिकारियों में सत्यपाल सिंह का नाम भी शामिल है। सत्यपाल ने अपनी ड्यूटी के दौरान मुंबई, पुणे और नागपुर के पुलिस आयुक्त का पदभार संभाला और फिर खाकी से खादी का रुख कर लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बागपत से चुनाव लड़ा और राजनीति में एंट्री मारी। सत्यपाल सिंह देश के पुलिस विभाग के सबसे सफल और कर्मठ पुलिस अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्हें 2008 में आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक से सम्मानित किया गया। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में उनके अदम्य साहस के बूते पर अंजाम दिए गए असाधारण कार्यों के लिए उन्हें विशेष सेवा पदक से सम्मानित किया गया था।

सोशल मीडिया पर चल रही है संजू के दूसरे पहलू पर चर्चा वैसे सिर्फ सत्यपाल सिंह ही नहीं, तमाम सोशल मीडिया साइट्स पर इस बारे में चर्चा औऱ बहस चल रही है कि क्या वाकई संजय दत्त के जीवन पर फिल्म बनाई जानी चाहिए थी और उसे इस तरह प्रदर्शित किया जाना चाहिए था मानो उन पर काफी अत्याचार हुए हैं। संजय दत्त पर टाडा के तहत आरोप लगे थे और आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें सजा भी सुनाई गई थी। उन्होंने अपने द्वारा किए गए अपराधों के लिए काफी समय जेल में बिताया है, ऐसे में उनका व्यक्तिव आदर्श नहीं माना जा सकता। बहरहाल सत्यपाल सिंह के बयान के बाद एक बार फिर से यह बहस तेज होती दिखाई दे रही है।

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