Rupee vs Dollar: 130 पैसे मजबूत होकर 90.20 पर पहुंचा रुपया, 3 साल की सबसे बड़ी बढ़त

INR vs USD में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 130 पैसे मजबूत होकर 90.20 पर पहुंच गया, जो 3 साल की सबसे बड़ी बढ़त है। India-US trade deal, FII flows और RBI की भूमिका ने रुपये को सपोर्ट दिया है।

Update: 2026-02-03 12:11 GMT
  • डॉलर के मुकाबले रुपया 130 पैसे मजबूत
  • 90.20 के स्तर पर पहुंचा INR
  • 3 साल की सबसे बड़ी एक-दिन की बढ़त
  • India-US Trade Deal से बदला करेंसी ट्रेंड

भारतीय मुद्रा बाजार में मंगलवार, 3 फरवरी को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। Rupee vs Dollar में भारतीय रुपया 130 पैसे की जबरदस्त मजबूती के साथ 90.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले 3 साल की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। इससे पहले 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बनकर उभरा था।

2025 की कमजोरी के बाद रुपये की दमदार वापसी

पिछले साल 2025 में भारतीय रुपया करीब 5% तक टूट गया था और एशियाई बाजारों में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया था। वहीं January 2026 में भी इसमें लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई थी। Foreign Portfolio Investors (FIIs) की लगातार बिकवाली ने रुपये पर दबाव बनाए रखा।

हालांकि, मंगलवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पिछले क्लोज 91.49 के मुकाबले रुपया सीधे 130 पैसे मजबूत होकर बंद हुआ, जिससे बाजार में sentiment तेज़ी से बदला।

India-US Trade Deal से आई तेजी

रुपये में इस उछाल का सबसे बड़ा कारण India-US Trade Deal माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने के ऐलान ने बाजार की अनिश्चितता को काफी हद तक खत्म कर दिया।

इसके साथ ही यह भी संकेत मिला कि भारत आने वाले वर्षों में अमेरिका से $500 billion (करीब 45 लाख करोड़ रुपये) के energy, technology और agriculture products खरीदेगा। इससे भारत के export outlook और forex inflows को लेकर उम्मीदें मजबूत हुईं।

तेल सौदे और करेंसी पर असर

ट्रेड डील के तहत यह भी सामने आया कि भारत Russia से तेल खरीद धीरे-धीरे कम कर सकता है और इसके बदले America और Venezuela से crude oil import करेगा। Market experts के अनुसार, इससे डॉलर-आधारित energy transactions में स्थिरता आएगी और रुपये पर दबाव कम होगा।

क्या रुपया 89 के स्तर तक जा सकता है?

Currency market experts का मानना है कि रुपये में यह मजबूती फिलहाल जारी रह सकती है। Market analyst Anuj Gupta के मुताबिक, export बढ़ने की उम्मीद से रुपये की मांग और बढ़ेगी। Short term में रुपया 89.50 से 89.00 के स्तर को टेस्ट कर सकता है।

वहीं, Kotak Securities के currency research head Anindya Banerjee का कहना है कि टैरिफ कटौती से रुपये के लिए रास्ता साफ हुआ है, लेकिन आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि RBI किस स्तर पर हस्तक्षेप करता है।

रुपये में गिरावट: फायदे और नुकसान

डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये का असर आपकी जेब और अर्थव्यवस्था पर

✔ रुपये के फायदे

  • ▪ एक्सपोर्ट कंपनियों को ज्यादा मुनाफा
  • ▪ विदेशी पर्यटकों के लिए भारत सस्ता
  • ▪ मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा
  • ▪ विदेश से डॉलर भेजने पर ज्यादा रुपये

✖ रुपये के नुकसान

  • ▪ महंगाई बढ़ने का खतरा
  • ▪ तेल और सोना महंगा
  • ▪ विदेश में पढ़ाई और घूमना महंगा
  • ▪ विदेशी निवेश में गिरावट

Rupee vs Dollar: करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

जब डॉलर के मुकाबले किसी मुद्रा की कीमत गिरती है, तो उसे currency depreciation कहा जाता है। वहीं, मुद्रा मजबूत होने को appreciation कहते हैं। किसी भी देश की मुद्रा की ताकत उसके foreign exchange reserves पर काफी हद तक निर्भर करती है।

अगर भारत के पास पर्याप्त डॉलर reserves होते हैं, तो रुपया स्थिर रहता है। डॉलर reserves घटने पर रुपया कमजोर और reserves बढ़ने पर रुपया मजबूत होता है। यही वजह है कि trade inflows, exports और foreign investments का सीधा असर INR vs USD पर पड़ता है।

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FAQs

Rupee vs Dollar में रुपया इतना मजबूत क्यों हुआ?

India-US trade deal, टैरिफ कटौती और बेहतर export outlook के कारण रुपये में तेज़ मजबूती आई।

क्या रुपया 89 के स्तर तक जा सकता है?

Experts के अनुसार short term में रुपया 89.50–89.00 तक जा सकता है, लेकिन RBI की भूमिका अहम होगी।

2025 में रुपया कमजोर क्यों हुआ था?

FII outflows, global uncertainty और डॉलर की मजबूती के कारण 2025 में रुपया कमजोर पड़ा था।

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