iPhone आर्डर किया और मिली साबुन की बट्टी! फिर कस्टमर ने जो किया उसे Flipkart कभी नहीं भूलेगा

Ordered an iPhone and got a bar of soap: Flipkart से iPhone आर्डर करने वाले को साबुन की बट्टी मिली थी, वो भी कपड़े धोने वाली

Update: 2023-03-23 11:30 GMT

Ordered an iPhone and got a bar of soap: एक व्यक्ति ने Flipkart से बढ़िया iPhone आर्डर किया और जब उसका आर्डर घर आया और उसने अनबॉक्सिंग की तो उसके अंदर साबुन की बट्टी मिली, वो भी कपड़े धोने वाली। बंदा यह देखकर हैरान रह गया लेकिन उसके बाद उसने माथा पकड़ के बैठने की बजाय दिमाग का इस्तेमाल किया और Flipkart को ऐसा सबक सिखाया की कम्पनी कभी भूल नहीं पाएगी। 

अगर ऑनलाइन शॉपिंग में फ्रॉड हो तो क्या करें? 

ऑनलाइन शॉपिंग में फ्रॉड आम बात हो गई है. कोई ड्रोन मंगवाता है तो उसे आलू मिलता है, कोई मोबाइल मंगवाता है तो साबुन की टिकिया मिल जाती है. ऐसे में ग्राहकों को यह जानना बेहद जरूरी है कि ऑनलाइन फ्रॉड में क्या करना चाहिए। 

ऐसा ही एक वाकिया कर्नाटक के रहने वाले व्यक्ति के साथ हुआ था जिसने 50 हज़ार रुपए देकर Flipkart से iPhone आर्डर किया था मगर उसे मोबाइल नहीं साबुन की बट्टी मिली थी. जिसके बाद वह कर्नाटक कंज्यूमर कोर्ट चला गया और अब कंज्यूमर कोर्ट कर्नाटक का फैसला आया है. 

कंपनी को देने पड़े 74 हज़ार रुपए 

कर्नाटक के कोप्पल जिले के रहने वाले हर्षा ने 2021 में iPhone 11 ऑर्डर किया था जिसकी कीमत 48,999 रुपए थी. लेकिन आर्डर आने पर हर्षा को मिला साबुन, उसने फ्लिपकार्ट वालों से शिकायत की, लेकिन उन्होंने मदद का भरसा जताने के अलावा कुछ नहीं किया, उसने कंपनी को लीगल नोटिस भेजा लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ. बाद में हर्षा ने फ्लिपकार्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर और थर्ड पार्टी कंपनी के मैनेजर के खिलाफ एक उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) में मामला दर्ज किया. 

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया 

इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा- "ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाली कंपनी से इस तरह के रवैये की उम्मीद नहीं की जा सकती. ये काम अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी के अंतर्गत आता है. प्रॉडक्ट की पूरी कीमत चार्ज करने के बाद भी खरीदी हुए सामान के बदले गलत चीज बेची गई." 

अदालत ने 17 मार्च को फ्लिपकार्ट को 74 हज़ार रुपए का भुगतान करने का आदेश जारी किया, 48,999 रुपए मोबाइल के और 10000 रुपए सेवा में कमी और अनुचित व्यापर व्यव्हार के और 15 हज़ार मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाज़ी में लगे पैसों के 

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