कोटक महिंद्रा बैंक में ₹160 करोड़ का बड़ा घोटाला! पंचकूला नगर निगम की FD में खेल, पुलिस तक पहुंचा मामला
कोटक महिंद्रा बैंक में पंचकूला नगर निगम की ₹160 करोड़ की FD में धोखाधड़ी का आरोप। बैंक ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत। जानें क्या है पूरा मामला और बैंक की सफाई।
नई दिल्ली: बैंकिंग जगत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हरियाणा के पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपयों के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को लेकर कोटक महिंद्रा बैंक विवादों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि नगर निगम के करीब 160 करोड़ रुपयों की एफडी में बड़ी धोखाधड़ी की गई है। मामला सामने आते ही प्रशासन और बैंक दोनों में हड़कंप मच गया है।
कैसे खुला 160 करोड़ की धोखाधड़ी का राज?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पंचकूला नगर निगम ने अपनी एक मैच्योर हो चुकी एफडी (Fixed Deposit) के पैसे ट्रांसफर करने के लिए बैंक से संपर्क किया। नगर निगम के कमिश्नर विनय कुमार ने बताया कि जब फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हुई, तो बैंक के रिकॉर्ड और निगम के रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया।
गड़बड़ी की आशंका होते ही नगर निगम ने बैंक से अपनी सभी जमा राशियों का पूरा हिसाब मांग लिया। शुरुआती जांच और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह हेरफेर ₹160 करोड़ तक पहुंच सकता है।
कोटक महिंद्रा बैंक की सफाई: 'दस्तावेज और हस्ताक्षर सब सही'
मामला बढ़ता देख कोटक महिंद्रा बैंक ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। बैंक के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने नगर निगम की शिकायतों के बाद आंतरिक जांच (Internal Investigation) शुरू कर दी है।
- KYC सही पाया गया: बैंक का दावा है कि अब तक की जांच में अकाउंट खोलने की प्रक्रिया, केवाईसी (KYC) दस्तावेज और अधिकृत हस्ताक्षर (Authorized Signatures) बिल्कुल सही मिले हैं।
- नियमों का पालन: बैंक का कहना है कि सभी लेनदेन बैंकिंग नियमों के तहत ही किए गए थे और जो भी निर्देश निगम की ओर से मिले थे, उन्हीं का पालन किया गया।
बैंक ने खुद पुलिस में दर्ज कराई शिकायत
अपनी छवि साफ रखने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक ने खुद पंचकूला पुलिस को इस मामले की लिखित शिकायत दी है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि वे सच सामने लाने के लिए पुलिस, नगर निगम और सरकार का पूरा सहयोग कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड और कागजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि पैसा आखिर गया कहां?
क्या हरियाणा में बढ़ रहे हैं सरकारी खातों में घोटाले?
सरकारी पैसों में हेरफेर का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में भी ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया था। उस समय भी हरियाणा सरकार के कुछ खास खातों को निशाना बनाया गया था। उस मामले में बैंक ने माना था कि कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर इस फ्रॉड को अंजाम दिया था। अब कोटक बैंक का मामला सामने आने के बाद सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आम जनता और जमाकर्ताओं के लिए सबक
यह मामला हमें सिखाता है कि चाहे आप सरकारी विभाग हों या आम नागरिक, अपनी एफडी और बैंक खातों की समय-समय पर जांच करना बहुत जरूरी है।
- हमेशा बैंक से ऑथेंटिक रिसीप्ट (Original Receipt) लें।
- समय-समय पर बैंक स्टेटमेंट और नेट बैंकिंग के जरिए अपने फंड्स को चेक करते रहें।
- किसी भी संदिग्ध लेनदेन की सूचना तुरंत बैंक और पुलिस को दें।
फिलहाल ₹160 करोड़ के इस मामले की जांच जारी है। क्या यह किसी बैंक कर्मचारी की करतूत है या नगर निगम के किसी सिस्टम की खामी, यह तो पुलिस जांच के बाद ही साफ होगा। लेकिन इस घटना ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और सरकारी फंड्स के मैनेजमेंट पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
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