अगर घर में गौरैया ने बना लिया है घोसला तो ये खबर पढ़ हिल जाएंगे आप!

आमतौर पर घरों में पक्षियों का आना जाना बना ही रहता है। लेकिन इन पक्षियों के घर आने उनके घोसला बनाने का अपना कुछ विचार होता है।

Update: 2022-01-07 09:32 GMT

आमतौर पर घरों में पक्षियों का आना जाना बना ही रहता है। लेकिन इन पक्षियों के घर आने उनके घोसला बनाने का अपना कुछ विचार होता है। इसके सम्बंध में हमारे धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग मत हैं। हमारी धार्मिक मान्यताआें के अनुसार कुछ पक्षियों का घर में घोसला बानना शुभ माना गया है। इसमें खासतौर पर गौरैया और कबूतर के घोसले को शुभ बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि अगर हम इनके घोसले को नुक्सान पहुंचाते हैं तो इसका हमारे जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए इससे बचना चाहिए।

कबूतर के सम्बंध में क्या है मत

कबूतर ऐसा पक्षी है जिसे पालना, उसे दाना खिलाना बहुत ही शुभ माना गया है। लेकिन कबूतर के घर में घोसला बनाने के सम्बंध में जानकारों के दो अलग-अलग मत हैं। जिसमें कुछ लोगों द्वारा कबूतर के घोसला बनाकर रहने को अच्छा नहीं मानते। लेकिन दाना खिलाने को शुभ माना गया है।

गौरैया से दूर हो जाते हैं वास्तु दोष

कहा गया है कि अगर गौरैया हमारे घर में घोसला बनाती है तो मानना चाहिए कि सुख-शांति और सौभाग्य आने वाला है। साथ ही हमारे ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि गौरैया के घर में घोसला बनाने से कई तरह के वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। ऐसे में गौरौया के घोसले को कभी भी हटाना नहीं चाहिए।

गौरैया के घोसले का दिशा विचार

  1. वहीं जानकार गौरैया के घोसले बनाने में दिशा का विचार भी करते हैं। दिशा विचार में कहा गया है कि अगर गौरैया पूर्व दिशा में अपना घोसला   बनाती है इससे घर के लोगों का मान-सम्मान बढ़ता है।
  2. वहीं अगर गौरैया अपना घोसला दक्षिण-पूर्व अग्नेय कोण में बनाती है तो इसका अर्थ है कि बहुत जल्दी घर में मांगलिक कार्य होने वाले हैं।
  3. अगर गौरैया का घोंसला दक्षिण दिशा में है तो इसे माना जाता है कि बहुत जल्दी धन में वृद्धि होने वाली है।
  4. वहीं कहा गया है कि अगर दक्षिण-पश्चिम में गौरैया घोंसला बनाएं तो परिवार के सदस्यों की आयु बढ़ेगी।
  5. इन सभी मान्यताओं के आधार पर ही कहा जाता है कि गौरैया के घोंसला बनाने से हमें कही भी नुक्सन नही है। गौरैया की आवाज काफी   मनमोहक होती है।

घट रही गौरैया की संख्या

आज के समय में वैसे ही गौरैया की दिनो-दिन संख्या कम होती जा रही है। इसके लिए मोबाइल टावरों को कारण माना जा रहा है। टावरों के रेडियेसन से इनकी मौत हो रही है। ऐसे में हमें गौरैया को संरक्षित करना चाहिए।

नोट-ः उक्त समाचार में दी गई जानकारी सूचना मात्र है। रीवा रियासत समाचार इसकी पुष्टि नहीं करता है। दी गई जानकारी प्रचलित मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।

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